भोपाल। मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अशोकनगर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां वर्षों पहले बंद हो चुके और डूब क्षेत्र में समा चुके स्कूल को विभागीय रिकॉर्ड में सक्रिय दिखाते हुए वहां एक शिक्षक का तबादला कर दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि शिक्षक द्वारा बार-बार स्कूल के अस्तित्व में नहीं होने की जानकारी देने के बावजूद विभाग ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उन्हें परेशान किया।
मामला प्राथमिक शिक्षक रामगोपाल शिवहरे का है, जो शासकीय प्राथमिक विद्यालय मढ़ी तूमैन, विकासखंड अशोकनगर में पदस्थ थे। 11 दिसंबर 2023 को जारी आदेश के तहत उनका तबादला शासकीय प्राथमिक विद्यालय पगरा, विकासखंड चंदेरी में कर दिया गया। जानकारी के अनुसार शासकीय प्राथमिक विद्यालय पगरा लंबे समय पहले कम छात्र संख्या और डूब क्षेत्र में आने के कारण बंद हो चुका था। स्कूल भवन और शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी थीं, लेकिन विभागीय पोर्टल पर इसे सक्रिय विद्यालय के रूप में दर्ज रखा गया था। इसी त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड के आधार पर शिक्षक का तबादला आदेश जारी कर दिया गया।
शिक्षक ने अधिकारियों को बताया कि जिस विद्यालय में उन्हें भेजा जा रहा है, उसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं है, लेकिन उनकी आपत्ति पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई। जांच में सामने आया कि पगरा विद्यालय अकेला मामला नहीं था। जिले के विभिन्न विकासखंडों में 11 शासकीय और 27 अशासकीय विद्यालय ऐसे थे, जो लंबे समय से बंद थे, लेकिन विभागीय पोर्टल पर चालू दर्शाए जा रहे थे। बताया गया कि संबंधित प्रस्तावों और नोटशीटों को समय पर आगे नहीं बढ़ाए जाने के कारण बंद विद्यालयों की जानकारी पोर्टल पर अपडेट नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप कई वर्षों तक ये विद्यालय रिकॉर्ड में संचालित दिखते रहे।
