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Tuesday, April 21, 2026
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लापरवाही की हद: 9 बच्चों पर 2 अतिथि शिक्षक, जर्जर सरकारी स्कूल में शिक्षा का मजाकबड़वाह से सचिन शर्मा की रिपोर्ट

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बड़वाह

लापरवाही की हद: 9 बच्चों पर 2 अतिथि शिक्षक, जर्जर सरकारी स्कूल में शिक्षा का मजाकबड़वाह से सचिन शर्मा की रिपोर्ट,मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के बड़वाह विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। बड़वाह विकासखंड के ग्राम सापट में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां न तो कोई सरकारी शिक्षक है और न ही स्कूल की इमारत सुरक्षित है।

केवल 9 बच्चों के नामांकन पर दो अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रही यह शाला शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही को उजागर करती है। स्कूल में विद्यार्थियों की दर्ज संख्या के अनुसार, कक्षा पहली में 3, दूसरी में 2, तीसरी में 0, चौथी में 1 और पांचवी में 3 बच्चे हैं, जिनकी कुल संख्या 9 है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए दो अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। स्कूल की इमारत की जर्जर हालत देखकर यह साफ पता चलता है कि इसकी मरम्मत या रंगाई-पुताई वर्षों से नहीं हुई है।

छत और दीवारों की जर्जर हालत किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। यह स्थिति तब है जब सरकार हर साल सरकारी स्कूलों के रखरखाव और मरम्मत के लिए लाखों रुपए जारी करती है। सवाल उठता है कि यह राशि कहां जा रही है और इसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है? जहां एक ओर सरकार स्कूलों को मर्ज करने का काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे स्कूल हैं जहां शिक्षक ही नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का गिरता स्तर अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

एसी कमरों में बैठकर रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारी शायद ही कभी जमीनी हकीकत का सामना करते हैं। यही कारण है कि आज गरीब परिवार भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने से कतराते हैं और साहूकारों से कर्ज लेकर निजी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हैं। सापट जैसे स्कूल इस बात का प्रमाण हैं कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था किस तरह से चरमरा गई है। 9 बच्चों के लिए दो अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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शिक्षा विभाग के अधिकारियों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर फील्ड में जाकर वास्तविकता देखनी चाहिए। यदि सरकारी स्कूलों की दशा सुधारी जाए और शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था हो तो न केवल बच्चों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि गरीब परिवारों को भी बेहतर शिक्षा का अवसर मिल पाएगा।

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