– फेरबदल करने कर्मचारियों को मनाने के प्रयास जारी
भोपाल
काफी समय से खामोश बैठी भेल की यूनियनें गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस के पक्ष में मैदान में दिखाई दे रही हैं। कौनसी यूनियन कितना दम दिखा पाएगी यह अलग बात है लेकिन कर्मचारियों को मनाने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रही है। कांग्रेस समर्थित इंटक यूूनियन तो पहले से ही प्रचार करने में जुटी है लेकिन ऐबू यूनियन भी भाजपा के पक्ष में मैदान में उतर गई है। रही बात एचएमएस और बीएमएस यूनियन का तो दोनों ही गुप्त प्रचार में लगी हैं।
यहां यह बता देना जरुरी है कि हर विधानसभा चुनाव में भेल कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है। इस बार इनका रुख फिफ्टी-फिफ्टी दिखाई दे रहा है। रिटायर कर्मचारियों की बात तो केन्द्र सरकार उनके पेंशन मुद्दों को लेकर सकारात्मक रवैया नहीं होने के कारण नाराज बताए जा रहे हैं। भेल के ठेका श्रमिक सालों से समान काम का समान वेतन न मिलने से नाराज हैं तो वर्क्स कांट्रेक्ट के मजदूर शोषण का शिकार हैं।
जानकारों का कहना है कि भेल के कर्मचारी, रिटायर्ड, अधिकारी, ठेका मजदूर, ठेकेदार, भेल के व्यापारियों की संख्या करीब एक लाख से ज्यादा बताई जा रही है। राजधानी की गोविन्दपुरा विधान सभा चुनाव में भेल कर्मचारी अहम भूमिका निभायेंगे। चाहे भेल के कर्मचारी हो या फिर भेल के ही ठेका श्रमिक, सोसायटी कर्मचारी, रिटायर्ड कर्मचारी, सप्लायर व ठेकेदार, व्यापारी या फिर भेल उद्योग नगरी में कार्यरत केन्द्र व राज्य सरकार के कर्मचारी यह चुनाव परिणाम में फेरबदल करने में काफी सक्षम है।
गौरतलब है कि दो बार स्थानीय उम्मीदवार ने भाजपा से हार का अंतर कम किया है। वर्ष 1980 और 1985 में कांग्रेस उम्मीदवार आरडी त्रिपाठी क्रमश: 1524 व 6974 मतों के अंतर से बाबूलाल गौर से हारे। वर्ष 1998 में कांग्रेस प्रत्याशी करनैल सिंह उम्मीदवार रहे जो 10883 मतों से हारे और 2018 गिरीश शर्मा 46000 मतों से श्रीमती कृष्णा गौर से हारे थे। गौरतलब है कि इस विधानसभा क्षेत्र से स्व. बाबूलाल गौर लगातार 2018 तक भाजपा से विधायक रहे हैं । 2018 में उनकी पुत्र वधु कृष्णा गौर भाजपा से टिकट मिला था । इस बार पुन: उन्हें मैदान में उतारा उनका मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के समर्थक रविन्द्र साहू झूमरवाला से है ।
भेल परिवार की इस चुनाव अहम भूमिका रही है। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को यदि मतदाता स्थानीय प्रत्याशी मानकर मतदान करते हैं तो काफी हद तक वह भाजपा को टक्कर दे सकते हैं जबकि बाहरी प्रत्याशी मानकर मत देते हैं तो भाजपा प्रत्याशी को काफी हद तक फायदा मिल सकता है । ऐसे में भेल परिवार इस चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा कर सकते हैं। कर्मचारियों में परिवर्तन की लहर है या गौर परिवार से प्रेम यह तो परिणाम आने पर ही पता चलेगा। मतदान शुक्रवार को है मतदाता क्या गुल खिलाते हैं यह देखना बाकी है ।
आज बंद रहेगा भेल कारखाना
भेापाल में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवंबर 2023 को होने वाले मतदान को ध्यान में रखते हुए बीएचईएल कारखाना एवं कार्यालय को इस दिन बन्द रहेंगे । सभी कर्मचारी इस दिन के सामान्य वेतन के पात्र होंगे । सभी ठेकेदारों को भी निर्देशित किया गया है कि वे अपनेे ठेका श्रमिकों को भी उपरोक्त अनुसार सुविधा प्रदान करें। बीएचईएल प्रवक्ता ने सभी कर्मचारियों अपील की है कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग करें।
