भोपाल
मंगलवार को बीएमएस के अध्यक्ष विजय सिंह कठैत ने भेल कापरेटिव सोसाइटी में व्याप्त भष्ट्राचार को उजागर किया है उन्होंने भेल उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष मनोज बुध्दिराजा, उपाध्यक्ष राम नारायण गिरी, संचालक शैलेष अग्रवाल गैस इंचार्ज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं उनका कहना है कि उपभोक्ता भंडार अपने कार्यकाल के सबसे बड़े भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में गिर चुकी है तथा दिवालियापन और बंद होने के कगार पर खड़ी है उपाध्यक्ष राम नारायण गिरी और अध्यक्ष मनोज और बुद्धिराजा के कार्यकाल में 55 लाख का जीएसटी घोटाला हुआ जिससे गैस गोदाम को सील कर दिया गया ।
भोपाल कॉपरेटिव बैंक से लगभग 24 लाख का लोन लेकर पैसे का दुरुपयोग किया गया लोन की किस्त समय ना चुकाने का कारण पूर्व अध्यक्ष द्वारा जमा 50 लाख की एफडी टूटने के कगार पर खड़ी है विजय मार्केट और पिपलानी मार्केट में लाखों रुपए खर्च कर एसके चीमा प्राइवेट व्यक्ति के साथ मिलकर सुपरमार्केट का व्यवसाय प्रारंभ किया जो बाहर के ठेकेदार को दे दिया गया जो गैरकानूनी है और इस गैरकानूनी कार्य के उद्घाटन में भेल के कई अधिकारियों को बुलाया जिससे उनकी छवि खराब हुई जो पिपलानी पोस्ट ऑफिस के पास आटा चक्की थी उसमें सरसों के तेल घानी खोली गई वह भी विवादों में उसमें भेल कर्मचारी दीपक चौरसिया और राम नारायण गिरी दोनों की मिलीभगत चर्चाओं में और भारी अनियमितताओं का बाजार गर्म है।
उन्होंने कहा कि भेल उफभोक्ता भंडार में काम करने वाले श्रमिकों को 2 वर्षों से जूते और ड्रेस नहीं दिए गए भेल ठेका श्रमिक सेवानिवृत्ति होने पर उनकी ग ग्रेजुएटी और उपदान राशि समय पर नहीं दी जाती मृत्यु उपरांत उनकी विधवाओं व परिवार सोसाइटी का चक्कर लगाते हैं उनका भुगतान भी नहीं हो रहा है कठैत जी ने कहा इनके कार्यकाल में एक तेल वाले का चेक बाउंस हुआ जिससे सोसाइटी की भारी बदनामी हुई वहीं उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष मनोज बुद्धि राजा उपाध्यक्ष रामनारायण गिरी ने भेल विजय मार्केट बरखेड़ा में पार्किंग की जगह 80320 फीट का टीन का सेट अवैध निर्माण कर भेल की जमीन पर कब्जा किया जिस पर लाखों रुपए खर्च कर बर्बाद किया जिसका कोई उपयोग नहीं है साथ ही इस पर भेल भोपाल के द्वारा नोटिस भी जारी किया गया इस प्रकार कई सारी अनियमितताओं को उजागर किया तथा मध्यप्रदेश शासन से इसकी जांच की मांग की ।
उन्होंने बताया कि इसकी जांच भी चल रही है उनका कहना है कि यह सोसाइटी भेल कर्मचारियों की खून पसीने की कमाई की है जिनके पैसों का दुरुपयोग कर रहे हैं । इधर भेल उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष मनोज बुध्दिराजा, उपाध्यक्ष राम नारायण गिरी और संचालक शैलष अग्रवाल ने इस आरोप को एक सिरे से नकारते हुये बताया कि जब इस संचालक मंडल को संस्था की जवाबदारी सौंपी गई थी तब संस्था पर 2.5 करोड़ की देनदारी थी । व्यापार में लाभ-हानी होती रहती है इसमें संचालक मंडल दोषी नहीं है बल्कि गैस ऐजेन्सी को प्रायवेट हाथों में जाने से बचाया है । यदि आरोप सही हैं तो जांच करा लें ।
