— उषा काल में उदयाचल सूर्य को अर्ध्य अर्पित कर चैत्र छठ पूजा का किया जाएगा पारण
भेल भोपाल।
“सकल जगतारिणी हे छठी मैया” “कांच ही बांस के बहंगिया”, “पहिले पहिले छठी मैया” जैसे मधुरिम लोकगीतों के मध्य पूर्ण भक्तिमय एवं आस्था के साथ बिहार तथा उत्तर भारत का सबसे बड़ा त्यौहार बिहार सांस्कृतिक परिषद भोपाल द्वारा आयोजित महापर्व चैत्र छठ के तीसरे दिन सूर्यदेव की आराधना हेतु अस्ताचल सूर्य को प्रथम अरघ देकर उपास किया गया।
आयोजन समिति के अध्यक्ष सतेन्द्र कुमार ने बताया कि छठी मैया के इस महापर्व में साक्षात देव सूर्य भगवान को बाँस के बने सूप में ठेकुआ, गन्ना, संतरा, सेव, मह्तावी, केला, मुली, सुथनी, हल्दी, नारियल, पुआ, लडुआ जैसे प्रकृति प्रदत अनाजों को पूर्ण पवित्रता एवं स्वच्छता के साथ परंपरागत रूप से तैयार प्रसाद के साथ जल कुंड में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया। अर्घ्य देते समय श्रद्धालू भक्त एवं परिजनों ने दूध ढारकर भगवान सूर्य की आराधना एवं छठी मैया की उपासना किया।
इस महापर्व का पारण शुक्रवार को उदयगामी सूर्य को पारण अरघ के साथ पूर्ण होगा। इस महापर्व के सफल एवं पवित्रता के साथ आयोजन के लिए छठ पूजा आयोजन समिति एवं सरस्वती मंदिर समिति द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष 66वे आयोजन में विशेष व्यवस्था की गई थी। समिति के सदस्यों एवं छठव्रती श्रद्धालुगण ने नगर निगम की सहायता से पूरे घाट एवं कुंड की सफाई की। आयोजन में सैकड़ो श्रद्धालु एवं भक्त शामिल हुए।
