भोपाल। राजधानी में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए भेल वर्कर्स कॉन्ट्रैक्ट यूनियन ने प्रदेश के श्रम विभाग को एक महत्वपूर्ण सुझाव पत्र सौंपा है। मध्य प्रदेश मजदूरी संहिता नियम 2026 के प्रारूप के संबंध में सचिव, श्रम विभाग को संबोधित इस पत्र में यूनियन ने मांग की है कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन उनके परिवार के वास्तविक खर्चों के आधार पर निर्धारित किया जाए. यूनियन का कहना है कि वर्तमान वेतन में भोजन, किराया, बच्चों की शिक्षा, और चिकित्सा जैसे मूलभूत खर्चों को पूरा करना अब बेहद कठिन हो गया है।
यूनियन द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, एक सामान्य श्रमिक परिवार का अनुमानित मासिक खर्च अब 25,000 से 30,000 के बीच पहुंच गया है. इसमें मुख्य रूप से राशन एवं भोजन पर 8,000-10,000, मकान किराए पर 4,000-7,000, और बच्चों की पढ़ाई पर 3,000-5,000 तक का खर्च शामिल है. इसके अतिरिक्त बिजली, पानी, दवाइयों और यात्रा पर भी प्रतिमाह हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं।
श्रमिक नेताओं, अध्यक्ष अवधेश कुशवाहा और महासचिव मेहर अली ने सरकार से विनम्र निवेदन किया है कि ठेका श्रमिकों को सम्मानजनक और जीवन-यापन योग्य वेतन सुनिश्चित किया जाए. सुझाव पत्र में यह भी मांग की गई है कि महंगाई सूचकांक के अनुसार समय-समय पर वेतन में संशोधन हो और पीएफ , ईएसआई , बोनस एवं सामाजिक सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए. साथ ही, महिलाओं और ठेका श्रमिकों के रोजगार एवं अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की गई है।
