– बिना आमसभा के नहीं बंट सकता लाभांश
भोपाल
पिछले 10 माह से भेल की बीएचईई थ्रिफ्ट क्रेडिट को-आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के चुनाव कराने में असफल संचालक मंडल ने एक नया बवाल खड़ा कर दिया है । भेल जैसी महारत्न कंपनी एसआईपी और पीपी बोनस देगी या नहीं इस पर भी सवालिया निशान लगा हुआ है ऐसे में भेल कर्मचारियों को एक उम्मीद की किरण सिर्फ थ्रिफ्ट सोसायटी बची हुई थी । जिन सदस्यों ने पूरे भरोसे के साथ जिस पैनल को जिताकर सवा सौ करोड़ की पूंजी सौंपी थी वह आज खुद ठगे हुये महसूस कर रहे हैं । इस पैनल के दो फाड़ ने न केवल चुनाव जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को ठेंगा दिखाया है बल्कि लाभांश के मामले को भी बुरी तरह उलझा दिया है ।
संचालकों का यह हाल है कि वह चुनाव और लाभांश वितरण के लिये संस्था अध्यक्ष को बार-बार पत्र थमाकर सोशल मीडिया पर यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं हम सही हैं वो गलत । सवाल यह खड़ा हो रहा है कि इनकी आपसी लड़ाई के चलते सदस्य को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं । ऐसा भी नहीं थ्रिफ्ट के महत्वपूर्ण ओहदों पर बैठे लोग यह नहीं जानते की बिना आम सभा के लाभांश वितरण किसी भी नियम के अनुसार हो ही नहीं सकता है । इसके बावजूद संस्था के अध्यक्ष ने एक बार फिर लाभांश वितरण की चर्चा के लिये 18 अक्टूबर 2022 को बैठक बुला ली ।
मल्टी नेशनल कॉपरेटिव एक्ट या मध्यप्रदेश सहकारिता अधिनियम 2002 के मुताबिक अंतरिम लाभांश बाटने का बायलॉज के अनुसार प्रावधान ही नहीं है । यह अधिकार सिर्फ आम सभा को ही है। संस्था ने कितना लाभ कमाया इसकी जानकारी खुद संचालक मंडल को नहीं है । मजेदार बात यह है कि अभी तक बेलेंशसीट ही नहीं बनी है या बताई गई है । ऐसे में सदस्यों को कितना लाभांश दिया जायेगा इसका फैसला कैसे होगा यह भी बड़ा सवाल खड़ा है । इस तरह का मजाकिया काम पहली बार संस्था में देखने को मिला है । सदस्य अपनी ही संस्था के अपने लाभ को पाने के लिये तरस रहे हैं ।
अगली आम सभा का खर्च अध्यक्ष को उठाना पड़ सकता है
धारा 40 के अंतर्गत यदि यह सदस्य एकजूट होकर चाहें तो एक माह के नोटिस पर विशेष आम सभा बुला सकते हैं जिसके खर्चों की भरपाई उक्त नियम के अनुसार संस्था के अध्यक्ष को उठानी पड़ सकती है । संस्था के एक डायरेक्टर द्वारा अध्यक्ष को सौंपे गये एक पत्र में लिखा है कि आम सभा,लाभांश वितरण और बेलेंसशीट के संबंध में 7,17 और 24 सितंबर 2022 को बैठक बुलाई गई थी जिसमें सचिव उपाध्यक्ष और अन्य संचालक मौजूद नहीं थे । साफ जाहिर है कि संस्था अध्यक्ष संचालक मंडल का विश्वास खो चुके हैं । रही बात विपक्ष सदस्यों की तो वह इस पूरे मामले को नजर अंदाज किये हुये हैं । दरअसल जब संस्था के चुनाव के बाद जिस पैनल को हजारों सदस्यों ने चुनकर भेजा था उनमें से 6 संचालक अलग हो गये और 2 अपनी ढपली अपना राग अलाप रहे हैं इनकी आपसी लड़ाई व खींचतान में संस्था की छवि को काफी हद तक प्रभावित किया है । सोशल मीडिया इसका गवाह बना हुआ है । जिसमें खुले आम भ्रष्टाचार और मनमानी खरीद फरोक्त के आरोप लगाये जा रहे हैं जिसका जवाब पिछले 10 माह से कोई नहीं दे पा रहा है । इससे सदस्यों में भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि आखिर सच क्या है ।
बिना लाभ-हानि पत्रक बैलेंस शीट फाइनल किए कैसे किसी चीज का निर्धारण हो सकता है अध्यक्ष ने समय पर आमसभा ना करा कर और संस्था को बंधक बना दिया है । बिना एजेंडा जारी किए संचालकों की बैठक मनमानी तौर पर बुला रहा है जबकि पूर्व के सभी एजेंडे पर संचालकों की रिसीविंग हस्ताक्षर होते हैं । एक ही क्षेत्र के तीन संचालक रोज एक दूसरे को ज्ञापन सौंपकर सदस्यों को लाभांश के संबंध में गुमराह कर रहे हैं ।
कमलेश नागपुरे, सचिव थ्रिफ्ट सोसायटी
संस्था के सदस्यों को दीवाली पूर्व लाभांश वितरण हो सके इसके लिये अध्यक्ष को पत्र लिखा है । इस संबंध में 17 अक्टूबर को बैठक कर चर्चा की जायेगी । बैठक के बाद ही फैसला हो पायेगा कि लाभांश वितरण होगा की नहीं इसके लिये सभी का होना जरूरी है ।
रामनारायण गिरी,संचालक थ्रिफ्ट सोसायटी
