— एम्स और हमीदिया अस्पताल किया जा रहा है रेफर
भोपाल।
भेल क्षेत्र के सोनागिरी स्थित राज्य बीमा अस्पताल में बीमित परिजनों को ही इलाज की सुवधिा नहीं मिल रही है। जबकि बीमा अस्पताल में करीब 4 लाख 57 हजार आईपी के परिवार जिनकी संख्या 15 से 20 लाख है, जिनका इलाज बीमा अस्पताल सोनागिरी में सुचारू रूप से होता चला आ रहा था। बीमा अस्पताल राज्य सरकार के श्रम विभाग के अधीन आता था, लेकिन जब से यह अस्पताल केंद्र सरकार के श्रम विभाग में चला गया है तब से स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।
लोगों का कहना है कि जो भी मरीज इलाज कराने जाता है उसको यदि कोई भी बीमारी की जांच कराना है जैसे एक्स—रे, सोनोग्राफी, थायराइड की जांच आदि जांचों के लिए वहां का अस्पताल प्रबंधन मैसेज कर बोलता है कि मरीजों की कोई भी जांच हो हमीदिया या फिर एम्स अस्पताल भेजिए यहां कोई जांच नहीं होगी। इस तरह के मामले लगातार प्रकाश में आ रहे हैं।
10 जुलाई को शाम 4:45 बजे भेल में कार्यरत वर्षा शुक्ला अपनी नौकरी करके घर जा रही थीं कि बीच में उनका एक्सीडेंट हो गया। उन्होंने अपने पति को फोन कर बुलाया उनको सीधे बीमा अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन ड्यूटी पर उपस्थित डॉक्टर ने यह कहकर मना कर दिया कि आपके पास आपका आई कार्ड नहीं है जबकि पहले आईकार्ड से इलाज होता था। ईएसआई नंबर 1810 283513 बताने पर के बावजूद भी उन्होंने इलाज नहीं किया। उन्होंने बोला कि आप हमीदिया अस्पताल या फिर एम्स अस्पताल में दिखा दीजिए।वर्षा शुक्ला ने बोला कि आप अपने कंप्यूटर में चेक कर लीजिए यदि मेरा ईएसआई नंबर नहीं हुआ तो आप इलाज मत करिए।
इसी तरह 13 जुलाई को बीमित प्रवीण नामित जिनका ईएसआई नंबर 8100699539 है । बीमा अस्पताल इलाज कराने गए जिनका लिवर ट्रांसप्लांट पहले दिल्ली में खुद के पैसों से करा लिया है। सिर्फ जांच कराने के लिए वहां गए तो वहां पर डॉक्टरों ने बोल दिया कि टीसीएल—एलएटी जांच की यह सुविधा हमारे पास नहीं है। उन्होंने बोला कि प्राइवेट हॉस्पिटल में भेज दीजिए। इस पर जवाब मिला कि आज कल सभी जांचों की व्यवस्था यहां खत्म कर दी है। आप एम्स या हमीदिया अस्पताल चले जाइए। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर विपुल बावेजा द्वारा फोन पर मैसेज करके सभी डॉक्टरों को बोला गया है कि जितने भी मरीज यहां इलाज कराने आएं इलाज के लिए आप हमीदिया या फिर एम्स अस्पताल भेजिए। ठेका मजदूर संघ के कार्यकारी अध्यक्ष तोरण सिंह मीणा का कहना है कि अस्पताल में लगातार व्यवस्थाएं बिगड रही हैें। मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। यहां व्यवस्थाएं जल्द सुधरना चाहिए।
