भोपाल
भेल भोपाल इकाई में कर्मचारियों के बीच असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। एक यूनियन इंटक की भूमिका और पिछले वर्षों में लिए गए फैसलों को लेकर बीएमएस लगातार सवाल उठा रही हैं। विभिन्न मुद्दों को लेकर कर्मचारियों ने नेतृत्व से जवाब मांगा है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 1980 में अन्य यूनिटों में कर्मचारियों का नियमितीकरण एक वर्ष में हो जाता था, जबकि भोपाल इकाई में यह प्रक्रिया ढाई वर्ष में क्यों पूरी हुई, जबकि उस समय इंटक प्रथम पंक्ति की मान्यता प्राप्त यूनियन थी।
इसी तरह वर्ष 2019 के वेज रिवीजन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बीएमएस का आरोप है कि एक इन्क्रीमेंट के स्थान पर ‘लैपटॉप’ जैसी सुविधा पर सहमति क्यों दी गई। इसी तरह 2020 में इंटक नंबर वन होने के बावजूद इंसेंटिव बंद होने, कैंटीन दरों में वृद्धि, ओवरटाइम के नगद भुगतान पर रोक तथा 2009 बैच के 2.5 इन्क्रीमेंट के मुद्दे पर भी नेतृत्व से जवाब मांगा जा रहा है। यह भी सवाल उठाया है कि 32 वर्षों तक चुनाव प्रक्रिया से वंचित क्यों रखा गया और शेयर बिक्री के समय विरोध क्यों नहीं किया गया। प्लांट कमेटी में भागीदारी न करने और विशेष पास जारी कराने जैसे मुद्दों को भी कर्मचारी नेतृत्व की जवाबदेही से जोड़ रहे हैं।
बीएमएस की मानें तो इन सभी मुद्दों को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है। कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। बीएचईएल कि नंबर वन यूनयन बीएमएस ने यह मुद्दा जोरदार तरीके से सोशल मीडिया पर चलाया है । इसको लेकर हेम्टू इंटक पर कई सवाल दागें हैं जिसे भेल का कर्मचारी बड़ी गंभीरता से समझने रहा है कि सही क्या है और गलत क्या है ।
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