केवल 34 नियमित शिक्षकों के भरोसे चल रहा पूरा विश्वविद्यालय
भोपाल। बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय (बीयू) में गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। परिषद का आरोप है कि यह प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय वर्तमान में पूरी तरह से शैक्षणिक, प्रशासनिक और आर्थिक अनियमितताओं की भेंट चढ़ चुका है। एबीवीपी के पदाधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक विवि में ‘मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973’ की धारा 52 (असाधारण परिस्थितियों में सरकार द्वारा प्रशासनिक नियंत्रण हाथ में लेना) लागू नहीं होती और वर्तमान कुलपति अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका यह आंदोलन और धरना प्रदर्शन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
कार्यकर्ताओं ने कुलपति के व्यवहार को तानाशाह जैसा बताते हुए कहा कि विवि में कुल 105 शिक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन प्रबंधन की उदासीनता के कारण यह संस्थान महज 34 नियमित प्रोफेसर्स के भरोसे सांसें ले रहा है। खाली पदों को भरने के लिए हाल ही में 31 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन तो निकाला गया, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया गया। इस भारी कमी के कारण विवि की साख लगातार गिर रही है, जिसके चलते इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में छात्र-छात्राओं की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। विश्वविद्यालय के लचर प्रशासनिक ढर्रे पर प्रहार करते हुए एबीवीपी के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि विवि का अकादमिक कैलेंडर पूरी तरह से पटरी से उतर चुका है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि एमबीए प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाएं इसी साल जनवरी में आयोजित की गई थीं, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी जून तक इसके परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किए जा सके हैं।
कई अन्य मुख्य पाठ्यक्रमों के नतीजे भी लंबित पड़े हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से हाथ धोना पड़ रहा है। अकादमिक लापरवाही के साथ-साथ विवि परिसर के छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं ने भी सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इंदिरा गांधी छात्रावास की स्थिति इतनी बदतर है कि कमरों की खिड़कियां तक गायब हैं और जालियां टूटी होने के कारण जहरीले सांप व अन्य जंगली जानवरों के अंदर घुसने का खतरा हमेशा बना रहता है। छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल परिसर में न तो सीसीटीवी कैमरे चालू हैं और न ही रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था है, लेकिन बार-बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
