भोपाल। मप्र के देवास जिले के टोंककलां में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में श्रम विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट ने प्रबंधन की रोंगटे खड़े कर देने वाली लापरवाहियों को उजागर कर दिया है। गुरुवार सुबह हुए इस धमाके में 5 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए। रिपोर्ट के अनुसार, जिस कारखाने में यह हादसा हुआ, वह अभी पूरी तरह बनकर तैयार भी नहीं हुआ था।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए निर्माणाधीन इमारत में ही पटाखों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया था। श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने जांच के हवाले से बताया कि हादसे की मुख्य वजह मैग्नीशियम पाउडर की केमिकल रिएक्शन हो सकती है। शुरुआती तौर पर दो थ्योरी सामने आई हैं— पहली यह कि निर्माण के दौरान बारूद का पानी से संपर्क हो गया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। दूसरी थ्योरी ‘सेल्फ इग्निशन’ की है, जिसमें माना जा रहा है कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज पैदा हुआ जिसने आग पकड़ ली।
धमाका इतना शक्तिशाली था कि शवों के टुकड़े 25 फीट दूर तक जा गिरे और झुलसे हुए लोग बदहवास हालत में बाहर भागते दिखे। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि प्रबंधन के पास कलेक्टर द्वारा जारी विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन कारखाना अधिनियम (फैक्ट्री एक्ट) के तहत अनिवार्य लाइसेंस नहीं लिया गया था। फैक्ट्री में न तो अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम थे और न ही श्रमिकों का कोई उपस्थिति रजिस्टर रखा गया था। सबसे गंभीर बात यह है कि इतनी संवेदनशील यूनिट होने के बावजूद वहां कोई ‘ऑन-साइट इमरजेंसी प्लान’ तैयार नहीं था, जो धारा 41B के तहत अनिवार्य है। साथ ही, खतरनाक रसायनों के बीच काम करने वाले मजदूरों को सुरक्षा संबंधी जरूरी जानकारियां (MSDS) भी नहीं दी गई थीं।
