भोपाल। बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी (बीयू) का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ करने के प्रस्ताव पर कैंपस के छात्र-छात्राओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। इस निर्णय को लेकर अधिकांश छात्रों का साफ तौर पर कहना है कि केवल नाम बदलने से यूनिवर्सिटी का स्तर नहीं सुधरेगा। छात्रों के मुताबिक, प्रशासन को नाम बदलने पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय यूनिवर्सिटी की आंतरिक व्यवस्थाओं, परीक्षा परिणामों में देरी, शैक्षणिक सत्र को नियमित करने और मूलभूत सुविधाओं में सुधार करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, कुछ छात्रों ने इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव वाले नाम का स्वागत भी किया है।
उल्लेखनीय है कि यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह दूसरी बार होगा जब इस प्रतिष्ठित संस्थान का नाम बदला जाएगा। इससे पहले इस संस्थान की स्थापना के समय इसका नाम ‘भोपाल यूनिवर्सिटी’ रखा गया था। इसके बाद में महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी मौलाना बरकतउल्लाह के देश की आजादी में दिए गए योगदान को सम्मान देने के लिए इसका नाम बदलकर ‘बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी’ किया गया था।
अब एक बार फिर इसके नाम को बदलने की कवायद शुरू हो गई है। इस पूरे प्रस्ताव और नाम बदलने की राजनीति को लेकर छात्र संगठन और आम विद्यार्थी अलग-अलग गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं, लेकिन सभी की प्राथमिकता यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक व्यवस्था को दुरुस्त करना ही बनी हुई है।
