24.6 C
London
Friday, May 29, 2026
Homeअमेरिका को टोपी पहनाना पड़ेगा भारी… चीनी माल को लेकर भारतीयों को...

अमेरिका को टोपी पहनाना पड़ेगा भारी… चीनी माल को लेकर भारतीयों को यह चेतावनी कैसी?

Published on

नई दिल्‍ली:

आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरआई ने भारतीय निर्यातकों को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि उन्‍हें चीन जैसे ऊंचे टैरिफ वाले देशों से आने वाले सामान को अमेरिका भेजने के लिए भारत को रूट के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दूसरे शब्‍दों में उन्‍हें ‘रीरूट‍िंंग’ यानी इधर का माल उधर करने से बचना चाह‍िए। जीटीआरआई के अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय निर्यातकों को रियल वैल्‍यू एडिशन, सप्लाई चेन में ट्रांसपैरेंसी और अमेरिकी सीमा शुल्क नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने भारतीय न‍िर्यातकों को शॉर्टकट से बचने की सलाह दी है।

जीटीआरआई का कहना है कि भारत के लिए अवसर वास्तविक है। लेकिन, यह तभी संभव है जब निर्यातक नियमों का पालन करें। अमेरिका ने चीन पर 245% तक शुल्क लगाया है। जबकि अन्य देशों को सिर्फ 10% शुल्क देना पड़ता है। इस वजह से कंपनियां अपनी सोर्सिंग रणनीतियों पर फिर से विचार कर रही हैं। इससे तीन तरह के व्यापार मॉडल बन रहे हैं। इनका निर्यातकों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।

चीनी न‍िर्माता दूसरे बाजारों में भेज सकते हैं माल
चीन से अमेरिका को होने वाले निर्यात में कमी आने से चीनी निर्माता अपने माल को अन्य बाजारों में सस्ते दामों पर बेचने की कोशिश कर सकते हैं। इससे भारत जैसे देशों में कीमतें बिगड़ सकती हैं। घरेलू उद्योगों को नुकसान हो सकता है। जीडीटीआर स्टील, खिलौने, रसायन और सिंथेटिक टेक्सटाइल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आयात पर कड़ी नजर रख रहा है।

जीटीआरआई ने कहा कि भारतीय उद्योग को बचाने के लिए एंटी-डंपिंग उपायों को जल्दी लागू करना जरूरी है। अमेरिकी नियमों का पालन करने के लिए कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन की जांच करनी चाहिए, विदेशी सामग्री की पहचान करनी चाहिए, उत्पादन प्रक्रियाओं को फिर से डिजाइन करना चाहिए और सभी दस्तावेजों को संभाल कर रखना चाहिए।

भारत के पास कहां है एडवांटेज?
भारत के पास API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट) बनाने का अच्छा सिस्टम है। इसलिए, भारत रसायन क्षेत्र में मांग को पूरा करने के लिए अच्छी स्थिति में है। 2024 में अमेरिका ने 165.5 अरब डॉलर के रसायन आयात किए। इसमें चीन की हिस्सेदारी 9.7% थी। इस शुल्क के झटके से बचने के लिए कई देश आगे आ रहे हैं। इसी तरह के अवसर भारतीय कंपनियों के लिए मशीनरी, बिजली उपकरण, टेक्सटाइल, कपड़े, चमड़े के उत्पाद, सिरेमिक, सीमेंट उत्पाद, प्लास्टिक, फर्नीचर, खिलौने और मेडिकल डिवाइस जैसे क्षेत्रों में भी हैं।

शॉर्टकट से बचने की सलाह
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय कंपनियों को वास्तविक मूल्यवर्धन, सप्लाई चेन में पारदर्शिता और अमेरिकी सीमा शुल्क नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘शॉर्टकट’ से बचना चाहिए। उनका कहना है कि भारत जैसे देशों के लिए अवसर तो है, लेकिन तभी जब निर्यातक नियमों के अनुसार काम करें।

श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि निर्यातक अक्सर अमेरिका के गैर-वरीयता मूल नियमों (RoO) को गलत समझते हैं। ये नियम बताते हैं कि किसी उत्पाद का असली मूल क्या है। अगर किसी उत्पाद में चीनी सामग्री ज्यादा है और वह ‘सब्सटेंशियल ट्रांसफॉर्मेशन टेस्ट’ पास नहीं करता है तो उसे चीनी ही माना जाएगा। भले ही उसे कहीं और जोड़ा गया हो। उस पर भारी शुल्क लगेगा।

Latest articles

वीर सावरकर की जयंती पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया नमन, बोले- उनके विचार युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए करेंगे प्रेरित

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल से राजस्थान टीबी मुक्त अभियान में तेजी, 60 दिन में 19 लाख लोगों की स्क्रीनिंग

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और मजबूत इच्छाशक्ति के फलस्वरूप राजस्थान 'टीबी मुक्त'...

भजनलाल सरकार का कमाल: राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच निर्बाध बिजली आपूर्ति, शिकायतों में आई 41 हजार की कमी

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार के बेहतर प्रबंधन और दूरगामी...

More like this

भेल में अत्याधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणालियों का उद्घाटन— ईडी ने किया शुभारंभ

भोपाल। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) भोपाल के कार्यपालक निदेशक (ईडी) पीके उपाध्याय ने...

कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में DBT प्रायोजित व्याख्यान श्रृंखला संपन्न: जैव प्रौद्योगिकी के भविष्य पर हुई चर्चा

भोपाल। भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग (DBT) के सहयोग से भोपाल के कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ...