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Saturday, March 7, 2026
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असम में बाढ़ से 13 जिलों के 38 हजार लोग प्रभावित, खतरे का निशान पार कर गईं नदियां

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गुवाहाटी

असम में आई बाढ़ से 13 जिलों और उपमंडलों के करीब 38,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि असम बाढ़ के दौरान आपात स्थिति से निपटने के लिए कुशल प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। इसमें खास तौर पर बेड, ऑक्सीजन और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर एक ऑनलाइन डेटाबेस तैयार किया जाए। उन्होंने असम में मानसून के मौसम के दौरान बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा के लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ बैठक भी की।

खतरे के निशान से ऊपर नदियां, लैंडस्लाइड से एक की मौत
असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के विभिन्न इलाकों में नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने इसको लेकर रविवार सुबह के बुलेटिन जारी किया। इसमें कहा गया कि जोरहाट जिले के निमतिघाट में ब्रह्मपुत्र खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं, कामपुर (नागांव) में कोपिली और कामरूप जिले के पुथिमारी में भी नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।सीडब्ल्यूसी के बुलेटिन के मुताबिक राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र सहित कई अन्य नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। पिछले कुछ दिनों से पूरे असम में लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण बाढ़ की पहली लहर ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया है। गुवाहाटी में भूस्खलन से एक व्यक्ति की मौत हुई है। हालांकि, बाढ़ के कारण राज्य में अब तक किसी की जान जाने की कोई सूचना नहीं है

स्वास्थ्य मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की चर्चा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बाढ़ से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने असम में बाढ़ के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय संस्थानों और राज्य सरकार की एजेंसियों की व्यवस्थाओं का आंकलन किया। मंडाविया ने बाढ़ और किसी भी अन्य आपात स्थिति के प्रभावी प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। खासतौर पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण देखभाल उपकरण, ऑक्सीजन, अस्पताल के बिस्तर और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता की तैयारी को लेकर मंडाविया ने तरजीह दी। उन्होंने वेक्टर-जनित और जल-जनित रोगों के बारे में निवारक स्वास्थ्य देखभाल और समुदायों के बीच अधिक जागरूकता पर जोर दिया।

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