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Tuesday, April 28, 2026
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लानत है साउथ अफ्रीका… ! इतनी घटिया पिच, बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे बल्लेबाज

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केपटाउन

भारत और साउथ अफ्रीका के बीच दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन सिर्फ 75.1 ओवरों में 23 विकेट गिरे (भारत के 10, साउथ अफ्रीका के 13)… अब संभव है कि दूसरे ही दिन मैच रिजल्ट आ जाए। अब इसे साउथ अफ्रीका की मैच जीतने की सनक कहें या फिर घटिया प्लानिंग और क्यूरेटर को विलन करार दें। केपटाउन के न्यूलैंड्स क्रिकेट पिच पर पड़ी दरारों के बीच झांक रहीं हरी घासों पर क्रिकेट खेलना किसी मौत के खेल से कम नहीं है। अब आप सोच रहे होंगे कि मौत का खेल कहना कुछ ज्यादा ही है… तो ऐसा नहीं है। केपटाउन की अनप्रेडिक्टेबल पिच पर गेंद जिस स्पॉट से 5-7 फीट ऊपर उछलती दिखी तो उसी जगह से दूसरी गेंद की हाइट स्टंप्स से भी कम थी। भारतीय तो छोड़िए मेजबान टीम के बल्लेबाज डीन एल्गर तक हैरान दिखाई दिए।

SENA की पिच है तो हर कोई चुप है
यहां यह हैरान करने वाली बात नहीं है कि पिच को लेकर साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के दिग्गजों ने चुप्पी साध रखी है। अगर यह मामला भारत का होता तो यकीन मानिए सोशल मीडिया पर एक अलग ही बवाल मचा हुआ होता। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन पिच खोदकर तस्वीर शेयर करते तो ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर भी मोर्चे पर होते। अब यह मामला SENA कंट्री यानी साउथ अफ्रीका से है तो यह उनके घर का मामला है। खैर, मुझे याद आ रहा है कि 2008 में साउथ अफ्रीका भारत दौरे पर आई थी और सीरीज का तीसरा टेस्ट कानपुर में था। आज भी विदेशी टीमें जब आती हैं तो उस मैच का रोना रोती हैं। यह दलील देते हैं कि वैसी पिच नहीं होनी चाहिए।

2008 का रोना आज भी रोते हैं साउथ अफ्रीकी
दरअसल, उस दौरे पर भारत और साउथ अफ्रीका के बीच चेन्नई में पहला टेस्ट हुआ था। इस मैच में वीरेंद्र सहवाग ने 319 रनों की पारी खेली थी, जबकि मौजूदा हेड कोच राहुल द्रविड़ ने 111 रन ठोके थे और भारत ने बनाए थे 627 रन। साउथ अफ्रीका बड़ी मुश्किल से यह मैच ड्रॉ करवा पाया था। अगले मैच में साउथ अफ्रीका ने भारत को 90 रनों से हराया था। वह सीरीज में 1-0 की बढ़त ले चुका था। अब आखिरी टेस्ट कानपुर में खेला जाना था।

कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में मेजबान टीम ने उसे 3 दिन में हरा दिया। यहां कुल 32 विकेट गिरे थे। इसके बाद टीम के कोच मिकी ऑर्थर ने भारत के विरोध में भयंकर बवाल काटा था। इस पिच को उन्होंने अपने जीवन की सबसे घटिया पिच करा दी थी। मैच रेफरी रोशन महानामा तक से शिकायत की थी। आईसीसी ने इसे खराब पिच रेट किया था। खैर, अब आते हैं केपटाउन की पिच पर। हिट द डेक बॉलर मोहम्मद सिराज ने पहली पारी में 15 रन देकर अकेले 6 विकेट झटके और विपक्षी टीम को सिर्फ 55 रनों पर ढेर कर दिया। विपक्षी टीम की हालत पतली थी और किसी तरह वे भारतीय गेंदबाजों को झेल पा रहे थे।

भारत के 6 विकेट तो बिना रन बनाए गिरे
इसके बाद भारतीय पारी 153 रनों पर सिमटी, लेकिन इस दौरान यह चर्चा का विषय रहा कि 6 विकेट बिना कोई रन के गिर गए। इसमें विराट कोहली का विकेट भी शामिल रहा। देखते ही देखते लगभग 2-3 मिनट में ही भारतीय पारी के साथ खेल हो गया। अब साउथ अफ्रीका भी अपने 3 विकेट गंवा चुका है, जबकि वह अभी भी 36 रनों से पीछे है। यानी अगर आज पहले घंटे में भारतीय गेंदबाजों को मदद मिली, जिसकी पूरी संभावना है, तो संभव है कि साउथ अफ्रीका पारी से हार जाए।

साउथ अफ्रीका ने मैच और सीरीज दोनों जीतने के लिए पिच तो ऐसी तैयार कर ली, लेकिन उसके ही बल्लेबाजों के लिए यह उल्टा दांव जैसा हो गया। जिस तरह से विकेट गिरे पहले दिन उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अगर साउथ अफ्रीका पारी से हार जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। मेजबान अभी भी 36 रन पीछे है, जबकि उसके 3 विकेट गिर चुके हैं।

इस तरह की पिच सिर्फ विकेट नहीं, जानलेवा भी हो सकती हैं!
इन सभी बातों के बीच एक बात जो शायद हर कोई इग्नोर कर रहा है वह यह कि अनप्रेडिक्टेबल उछाल की वजह से खिलाड़ी चोटिल भी हो सकते हैं। तेज रफ्तार वाली गेंदें क्रिकेट में हमेशा बल्लेबाजों के लिए काल रही हैं। फिलिप ह्यूज सहित कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां खिलाड़ियों की चोट की वजह से जान गई। दूसरी ओर, साउथ अफ्रीका के मार्क बाउचर का आंख पर लगी चोट के कारण करियर जल्दी खत्म हो गया। इस पूरे मामले का एक लाइन में निचोड़ यह है कि यह जीत की सनक ही रही होगी कि साउथ अफ्रीका ने इस तरह की पिच तैयार की, लेकिन यह अब जानलेवा दिखाई दे रही है। 3 दिन में खेल खत्म होने का मतलब यह है कि टेस्ट क्रिकेट का खत्म होना। अगर जिंदगी और टेस्ट क्रिकेट दोनों को बचाना है तो न केवल साउथ अफ्रीका को, बल्कि हर क्रिकेट नेशन को इस तरह की पिच से तौबा करना होगा।

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