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पहले सुषमा स्वराज, अब शी जिनपिंग को बताया अप्रिय, खुद दागी बनकर विदेश मंत्री पद से हटे थे माइक पॉम्पियो

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वॉशिंगटन

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री और सीआईए चीफ माइक पोम्पिओ अपने किताब के प्रोमोशन में नए-नए दावे कर रहे हैं। उन्होंने अब कहा है कि जब वह अमेरिकी विदेश मंत्री थे तो दुनिया के दर्जनों नेताओं से मिले। लेकिन, उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सबसे ज्यादा अप्रिय पाया। ‘नेवर गिव एन इंच: फाइटिंग फॉर द अमेरिका आई लव’ नाम अपनी किताब में माइक पोम्पियो ने लिखा है कि उन्होंने शी जिनपिंग के साथ कई बार बातचीत की और इस दौरान वे काफी बेदर्द और स्पष्टवादी कम्युनिस्ट लगे। माइक पोम्पियो ने इसी किताब में भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वर्तमान विदेश मंत्री एस जयशंकर पर भी टिप्पणी की है। पोम्पियो ने लिखा कि उन्होंने सुषमा स्वराज को कभी महत्वपूर्ण राजनीतिक शख्सियत के रूप में नहीं देखा लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर से पहली मुलाकात में ही अच्छे मित्रवत रिश्ते बन गए थे।

पोम्पियो बोले- जिनपिंग ने धमकाया था
माइक पोम्पियो ने कहा कि शी जिनपिंग ने उन्हें धमकाया भी था कि अगर अमेरिका ने कोविड महामारी के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराना बंद नहीं किया तो वह पीपीई किट की सप्लाई रोक देंगे। पोम्पियो ने यह भी कहा कि बातचीत के दौरान शी जिनपिंग हमेशा चीन को पीड़ित दिखाने की कोशिश करते। वे उन शिकायतों के लिए बदला लेने की बात करते, जो उन लोगों के पैदा होने से भी काफी पुरानी हैं। पोम्पियो ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से, मैंने सोचा था कि शी बेदर्द थे। जबकि दुष्ट होते हुए भी पुतिन मजाकिया और हंसमुख लगते थे। शी अपनी छोटी-छोटी आंखों के साथ इतने गंभीर नहीं लगते थे।

जिनपिंग विचारों को थोपने की कोशिश करते थे
पोम्पियो ने कहा कि शी जिनपिंग चर्चा के दौरान अपने विचारों को हमेशा थोपने की कोशिश करते थे। वह दूसरों की बातें नहीं सुनते थे, भले ही वह आपकी बातें सुनने का दिखवा करते हों। उन्होंने कहा कि जिनपिंग एक पूर्वी जर्मन या सोवियत कम्युनिस्ट के मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल में फिट बैठते हैं, जो अपनी सेना के दिनों में अध्ययन करने आया था। विदेश विभाग में मेरे चीन के नीति सलाहकार, माइल्स यू ने बाद में मुझे बताया कि सामान्य रूप से सीसीपी नेताओं और विशेष रूप से महासचिव शी ने भोले-भाले अमेरिकी नेताओं की भूमिका निभाने के लिए अत्यधिक ज्ञान को अपना हथियार बनाया था।

पोम्पियो अमेरिका के सबसे कमजोर विदेश मंत्री!
माइक पोम्पियो को अमेरिकी इतिहास के सबसे कमजोर विदेश मंत्री के तौर पर देखा जाता है। पोम्पियो डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान 26 अप्रैल 2018 को अमेरिका के विदेश मंत्री नियुक्त हुए थे। वे 20 जनवरी 2021 को बाइडेन प्रशासन के शपथग्रहण के दिन तक अपने पद पर बने रहे। उनके मंत्री रहने के दौरान अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी माइकल मैककिनले यूक्रेन को लेकर विवादों में फंस गए थे। मामला इतना बढ़ गया था कि उन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ा था। इस मामले में पोम्पियो की काफी बेइज्जती हुई थी।

उनके कार्यकाल में मजबूत हुए थे अमेरिका विरोधी देश
अमेरिका के कई राजनयिकों का मानना है कि पोम्पियो के कार्यकाल के दौरान विदेश नीति काफी कमजोर हुई थी। उस समय अमेरिका ने ईरान के साथ परमाणु समझौता तोड़ दिया था। इस कारण ईरान परमाणु बम बनाने के करीब पहुंच गया। उत्तर कोरिया ने ट्रंप प्रशासन के दौरान पहले की तुलना में अधिक परमाणु हथियार बनाए। ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के कारण खाड़ी देशों का अमेरिका से मोहभंग हो गया था। इसके अलावा यूरोपीय देशों के साथ भी अमेरिका के रिश्ते काफी कमजोर हुए थे। उनके कार्यकाल के दौरान नाटो को काफी कमजोर किया गया था।

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