नई दिल्ली,
बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को दुरुस्त करने की दिशा में भारत ने एक और कामयाबी हासिल की है. अब भारत दुश्मन के बैलिस्टिक मिसाइलों और एयरक्राफ्ट्स को आसमान में उड़ा देने की क्षमता को ‘नेक्स्ट लेवल’ तक ले गया है. पाकिस्तान और चीन के द्वारा बैलिस्टिक साजो-सामान विकसित करने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए ये भारत की अहम कामयाबी है.
इसी सिलसिले में भारत ने मंगलवार को ओडिशा के तट पर एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लार्ज किल एल्टीट्यूड ब्रैकेट के साथ फेज़- II बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) इंटरसेप्टर एडी-1 का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया. इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है.
क्या है इंटरसेप्टर एडी-1
इंटरसेप्टर एडी-1 एक लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल है जिसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ एयरक्राफ्ट के लो एक्सो-एटमॉस्फेरिक और एंडो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्शन दोनों के लिए डिज़ाइन किया गया है. यानी कि इंटरसेप्टर एडी-1 लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और एयरक्राफ्ट को पृथ्वी के वायुमंडल में और उससे बाहर दोनों जगह डिटेक्ट कर सकता है और इसे नष्ट भी कर सकता है. इंटरसेप्टर मिसाइल एक एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल है. इसे दुश्मन देश की इंटरमीडिएट रेंज और अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों को ध्वस्त करने के लिए डीआरडीओ ने विकसित किया है.
India today successfully conducted maiden Flight Test of Phase-II Ballistic Missile Defence (BMD) interceptor AD-1 missile with large kill altitude bracket today from APJ Abdul Kalam Island, Odisha. Flight test was carried out with participation of all BMD weapon system elements. pic.twitter.com/itbRtrsBBp
— ANI (@ANI) November 2, 2022
देश के सभी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस हुए शामिल
इस मिसाइल के सफल परीक्षण के साथ ही भारत को आसमान में एक और कवच मिल गया है. रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस टेस्ट को करने के लिए देश में अलग अलग स्थानों पर मौजूद सभी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के हथियारों का इस्तेमाल किया गया. ये हथियार रणनीतिक लिहाज से देश में अलग अलग खुफिया स्थानों पर तैनात किया गया है.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये इंटरसेप्टर दो चरणों वाली सॉलिड मोटर द्वारा संचालित है. मिसाइल को टारगेट तक सटीक रूप से मार्गदर्शन करने के लिए इस इंटरसेप्टर में स्वदेशी रूप से विकसित उन्नत नियंत्रण प्रणाली, नेविगेशन है. इस इंटरसेप्टर को एलगोरिद्म के द्वारा गाइड किया जाता है.
चुनिंदा देशों के पास है ये हथियार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ये इंटरसेप्टर मिसाइल दुनिया के बहुत कम देशों के पास उपलब्ध है और इसकी उन्नत तकनीक यूनीक है. इसी के साथ ही भारत दुश्मन के बैलिस्टिक मिसाइलों को उड़ा देने की अपनी क्षमता को नेक्स्ट लेवल तक ले गया है.
इंटरसेप्टर एडी-1 पृथ्वी के वायुमंडल में धरती की सतह से 20-40 किलोमीटर (एंडो-एटमॉस्फेरिक) के दायरे में दुश्मन के बैलिस्टिक मिसाइल को ध्वस्त कर सकता है. इसके अलावा इंटरसेप्टर एडी-1 धरती से 50-150 किलोमीटर की ऊंचाई के दायरे (एक्सो-एटमॉस्फेरिक) में भी दुश्मन के बैलिस्टिक हथियार को बर्बाद कर सकता है. इस तरह से इंटरसेप्टर एडी-1 भारत को आसमान में दुश्मन के बैलिस्टिक हमलों से सुरक्षा प्रदान करता है.
सभी मानकों पर सटीक
इस टेस्ट फ्लाइट के दौरान सभी मिसाइल से मिले सभी आंकड़े अपेक्षाओं के अनुसार थे. फ्लाइट डेटा को कैप्चर करने के लिए तैनात रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग स्टेशनों ने इस बात की पुष्टि की.
22 सालों से रक्षा कवच पर काम कर रहा है भारत
बता दें कि भारत ने 2000 में एंटी बैलिस्टिक मिसाइल को डीआरडीओ के जरिए विकसित करना शुरू किया गया. ये वो दौर था जब पाकिस्तान और चीन बैलिस्टिक साजो-सामान तैयार कर रहे थे. माना जाता है कि 2010 तक इस फेज को भारत ने हासिल कर लिया. इसी का नतीजा रहा कि भारत ने पृथ्वी मिसाइलों पर आधारित रक्षा कवच तैयार किए.
इसके बाद भारत ने दूसरे फेज के एंटी बैलिस्टिक मिसाइल को विकसित करना शुरू किया. ये वैसे मिसाइल थे जो इंटरमीडिएट रेंज के बैलिस्टिक मिसाइलों को ध्वस्त कर सकते है. भारत ये एंटी बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिका के Theatre High-Altitude Area Defence system की तर्ज पर तैयार हो रहे हैं.
