मुजफ्फरपुर
जन सुराज के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बड़ा सियासी दावा किया है। पीके ने कुछ ही दिन पहले कहा था कि इसी साल अक्टूबर में वे अपनी पार्टी का ऐलान करेंगे। इसके अलावा वे बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। साथ ही पीके ने ये भी कहा था कि बिहार के 55 फीसद लोग चाहते हैं कि बिहार में राजनीतिक परिवर्तन हो। वैसे लोग जन सुराज के साथ हैं। अब पीके ने दावा किया है कि जन सुराज से जुड़ी जमीनी हकीकत जिस दिन बिहार और दिल्ली के नेताओं को पता चल जाएगी। उस दिन उनके अंदर की बेचैनी और छटपटाहट बढ़ जाएगी।
नेताओं की बेचैनी बढ़ी-पीके
प्रशांत किशोर ने कहा है कि राजनीति सिर्फ समीकरण की बात करने से नहीं होती, बल्कि जनता का विश्वास जितना बहुत जरूरी है। प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि अभी सरकार को बदले कुछ ही महीने हुए हैं और आप देख रहे होंगे कि बिहार से दिल्ली तक नेताओं में छटपटाहट होने लगी है। ऐसा इसलिए हो पा रहा क्योंकि बिहार में जमीन में लोगों को जन सुराज की ताकत दिख रही है। मुझे अगर कोई धंधे बाज कह रहा है तो मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा की हां मैं इस बार बिहार के लोगों और बिहार को सुधारने के लिए काम ले लिया है।
जन बल समीकरण
पीके ने कहा कि जिन नेताओं को उन्हें धंधेबाज कहना है कह लेने दीजिए। बिहार की जनता का ठेका लेकर इस बार वे मैदान में आए हैं। अभी तरकस में कई तीर बाकी है। बिहार में कई लोग कह रहे हैं कि पदयात्रा हो गई अब क्या करेंगे, तो मैं उनको बतला दूं कि अभी इससे बड़ा बुलेट दागना बाकी है। जब हम पदयात्रा में आए थे तो 1 सौ से 50 लोगों के साथ आए थे। आज हज़ारों से भी ज्यादा लोग जन सुराज के साथ जुड़ गए हैं। बिहार के अन्य पार्टियों को समीकरण बनाने दीजिए कोई MY समीकरण बना रहा है। कोई PY बना रहा है। कोई A to Z बना रहा है। आप देखियेगा एक ही समीकरण होगा, वो होगा जन बल का समीकरण। देश में जन बल के आगे कोई समीकरण नहीं है।
आरजेडी के पत्र पर दिया था बयान
अभी हाल में बिहार आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष की ओर से जारी एक पत्र वायरल हुआ था, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में आरजेडी कार्यकर्ताओं के जन सुराज ज्वाइन करने पर आपत्ति जताते हुए कार्यकर्ताओं को सावधान किया गया था। जिसके बाद प्रशांत किशोर ने उस पत्र को लेकर बड़ी बात कही थी। पीके ने कहा था कि जन सुराज के पार्टी बनने की घोषणा भर से बिहार का सबसे मजबूत दल होने का दावा करने वाली RJD की घबराहट देखिए। बेचारे अपने दल में मची अफरा-तफरी और RJD छोड़कर जाने वाले नेताओं को रोकने के लिए अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को धमकी दे रहे हैं। भय और अपराध की राजनीति इनकी फितरत है। पहले बिहार की जनता ने छोड़ा अब दल के कार्यकर्ता और नेता छोड़ रहे हैं।
