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अब रेलवे का पेपर लीक : CBI का बड़ा ऐक्शन, 16 लोको पायलट समेत 26 अफसर गिरफ्तार, कार्रवाई जारी

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नई दिल्ली

भारतीय रेलवे में अब पेपर लीक होने का मामला सामने आया है। पेपर लीक का यह मामला रेलवे की ईस्ट-सेंट्रल जोन की डीडीयू रेलवे डिवीजन का है। जहां 4 मार्च को चीफ लोको इंस्पेक्टर की पोस्ट के लिए इंटरनल डिपार्टमेंटल पेपर होना था। लेकिन पेपर होने से पहले ही यह लीक हो गया। इस मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 16 लोको पायलट समेत रेलवे के 26 अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। रेलवे के कई अधिकारी सीबीआई के रेडार पर हैं। इस मामले में सीबीआई ने डीडीयू डिवीजन में आठ ठिकानों पर छापेमारी की है। जहां से 1 करोड़ 17 लाख रुपए बरामद करने समेत पेपर लीक से संबंधित अन्य चीजें बरामद की गई हैं। पेपर लीक होने के बाद मंगलवार को यह पेपर नहीं हो सका।

सीबीआई ने बताया कि इस बारे में उन्हें इनपुट मिला था कि पूर्व-मध्य रेलवे में चार मार्च को होने वाली विभागीय परीक्षा का पेपर लीक हो गया है। इनपुट मिला था कि पेपर लीक करने की एवज में लाखों रुपए का हेरफेर किया गया है। इसमें कोई और नहीं बल्कि रेलवे के ही अधिकारी और अन्य कुछ लोग शामिल हैं। जिन्होंने असली पेपर के तमाम सवालों को अन्य कागजों में अपने हाथ से लिखकर रेलवे के उन इच्छुक अधिकारियों को दिए। जो-जो चार मार्च को होने वाली रेलवे की चीफ लोको इंस्पेक्टर पोस्ट के लिए होने वाले एग्जाम को देने वाले थे। इससे पहले ही सीबीआई ने रेलवे के इस पेपर लीक रैकेट का भंडाफोड़ कर डाला।

क्या है मामला?
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि लीक कराए गए पेपर को 3 और 4 मार्च की दरम्यानी रात को मुगलसराय में पूर्व-मध्य रेलवे के तहत पैसा देकर पेपर खरीदने वालों को रटवाने के लिए दिया गया था। सीबीआई ने इस गंभीर मसले पर एक वरिष्ठ डिविजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर यानी डीईई (ऑप्स), रेलवे के आठ अन्य अधिकारियों, अज्ञात उम्मीदवारों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जिसमें पूर्व-मध्य रेलवे ने 4 मार्च 2025 को मुख्य लोको निरीक्षकों के पदों के लिए एक विभागीय परीक्षा निर्धारित की थी।

सीबीआई ने ऐसे दबोचा
सीबीआई ने बताया कि मिले इनपुट के आधार पर सीबीआई की सबसे पहले तीन अलग-अलग टीमें बनाई गई। इन टीमों ने तीन-चार मार्च की रात को मुगलसराय में 3 स्थानों पर रेड डाली। इस दौरान सीबीआई टीमों को 17 उम्मीदवार ऐसे मिले। जिनके पास हाथ से लिखे प्रश्न पत्रों की फोटोकॉपी थीं। इन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।

सीबीआई ने बताया कि मामले की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इसके लिए पेपर को तैयार करने की जिम्मेदारी आरोपी वरिष्ठ डीईई (ऑप्स) और अन्य को दी गई थी। आरोप है कि उन्होंने अपने ही हाथों से असली पेपर से दूसरे कागज पर अंग्रेजी में प्रश्न लिख कर उसे लीक करते हुए कथित तौर पर इसे एक लोको पायलट को दिया। जिसने बदले में इसका हिंदी में अनुवाद किया और आगे एक ऑफिस सुपरिटेंडेंट यानी ओएस (ट्रेनिंग) को दे दिया। उक्त ओएस (ट्रेनिंग) ने कथित तौर पर इसे कुछ अन्य रेलवे कर्मचारियों के माध्यम से उम्मीदवारों को दिया।

सीबीआई ने आरोपी वरिष्ठ डीईई (ऑप्स) और अन्य रेलवे कर्मचारियों को पैसे इकट्ठा करने और प्रश्न पत्र वितरित करने में शामिल होने के आरोपों में गिरफ्तार किया है। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में इस पेपर को देने वाले 17 लोको पायलट को गिरफ्तार किया है। सीबीआई का कहना है कि इन सभी के पास 3-4 मार्च की रात जब छापेमारी की गई थी। तब इनके पास पेपर लीक प्रश्न पत्रों की फोटो कॉपियां थी। जिन्हें असली पेपर से मिलाया गया तो साफ हो गया कि पेपर लीक हुआ था। इन्हें रंगे हाथों पकड़ा गया। इनसे पूछताछ करने पर अन्य रेलवे अधिकारियों को भी दबोचा गया। सीबीआई ने इस मामले में अभी तक 26 रेलवे अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। अभी और अधिकारी पकड़े जाने बाकी हैं।

1 करोड़ 17 लाख रुपये की रकम बरामद
छापेमारी में बरामद 1 करोड़ 17 लाख रुपये की रकम को सीबीआई ने बताया कि यह सब पेपर लीक होने की एवज में जुटाया गया पैसा था। सीबीआई ने बताया कि आरोप है कि इस मामले में पेपर तैयार करने वालों ने ही पेपर लीक किया। इसके बदले में रेलवे के अधिकारियों ने रेलवे के उन लोको पायलटों से पैसे लेकर उन्हें लीक पेपर बेचें। जो चीफ लोको इंस्पेक्टर बनने के लिए मंगलवार को होने वाले इस एग्जाम में बैठने वाले थे। लीक पेपर को पिछले साल नीट-यूजी पेपर लीक की तरह ही पहली रात अलग-अलग ठिकानों पर देकर उन्हें रटवाया जा रहा था। लेकिन सीबीआई को इसकी भनक लग गई और इसका भंडाफोड़ हो गया।

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