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हमारी बात पीओके पर होगी… संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर की पाकिस्तान को खरी-खरी, आतंक के मुद्दे पर जमकर सुनाया

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न्यूयॉर्क

अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से एस जयशंकर ने पाकिस्तान को जमकर फटकार लगाई है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के एक दिन पहले हुए भाषण में कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने की ओर इशारा करते हुए जयशंकर ने कहा कि मैं बता दूं कि कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच मुद्दा सिर्फ पीओके है। हमारे बीच हल होने वाला मुद्दा केवल ये है कि पाकिस्तान के कश्मीर पर अवैध कब्जे को खाली करना है।

जयशंकर ने पाकिस्तान को घेरते हुए उसे दूसरों की जमीनों पर लालच करने वाले एक बेकार देश कहा। उन्होंने कहा कि ऐसे देशों को बेनकाब करते हुए उनका मुकाबला किया जाना चाहिए। हमने कल इस मंच पर इसके कुछ विचित्र दावे सुने। इसलिए मैं भारत की स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट कर दूं। पाक को पीओके पर कब्जा छोड़ना है इसके अलावा पाकिस्तान को आतंक से अपने लगाव को भी खत्म करना है।

आतंकवाद से दुनिया को पार पाना होगा
जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की नीति कभी सफल नहीं हो सकती है। आतंक की नीति पर किसी को भी बचने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। ऐसे कामों के नतीजे निश्चित रूप से होंगे। आतंकवाद दुनिया की हर चीज के विपरीत है। इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का दृढ़ता से विरोध किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बहुत से देश अपने नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण पीछे छूट जाते हैं। लेकिन कुछ देश जानबूझकर ऐसे फैसले लेते हैं, जिनके परिणाम विनाशकारी होते हैं। इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है। दुर्भाग्य से उनके कुकृत्यों का असर दूसरों पर भी पड़ता है, खास तौर पर पड़ोसी देश इसका शिकार होते हैं।

दुनिया कई मुश्किलों का सामना कर रही
जयशंकर ने कहा कि भारत 79वें संयुक्त राष्ट्र महासभा की थीम ‘कोई पीछे ना छूटे’ का पुरजोर समर्थन करता हैं। उन्होंने कहा कि ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हम यहां एक कठिन समय में जमा हुए हैं। दुनिया अभी भी कोविड महामारी के कहर से उबर रही है। यूक्रेन में लगातार युद्ध चल रहा है और गाजा में भी एक साल से संघर्ष जारी है।

जयशंकर ने कहा कि दुनिया आपसी संघर्षों से ध्रुवीकृत और निराश है। आज के समय में बातचीत और समझौते मुश्किल हो गए हैं। मुझे नहीं लगता कि ये यह वैसा है, जैसा संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक चाहते होंगे। आज हम अगर शांति और समृद्धि को दोनों खतरे में पाते हैं तो इसकी वजह विश्वास कम होना और बातचीत की प्रक्रिया टूटना है।

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यवस्था के सहमत सिद्धांतों और साझा उद्देश्यों का प्रमाण है। इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रतिबद्धताओं का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण और जरूरी है। हमें अगर वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करनी है, तो यह आवश्यक है कि जो लोग नेतृत्व करना चाहते हैं, वे सही उदाहरण पेश करें ना कि मूल सिद्धांतों का ही उल्लंघन किया जाए।

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