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मोदी के साइलेंट वोटर्स पर राहुल का दांव, कल भारत जोड़ो यात्रा में सिर्फ महिलाएं होंगी शामिल

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नई दिल्ली ,

लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी कांग्रेस के सियासी आधार को दोबारा से मजबूत करने के लिए कन्याकुमारी से शुरू होकर कश्मीर तक ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर निकले हैं. राहुल तमिलनाडु से केरल, कर्नाटक, तेलंगाना होते हुए महाराष्ट्र तक का पैदल सफर तय कर चुके हैं. पदयात्रा के जरिए राहुल गांधी सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अंदर नया जोश ही नहीं फूंक रहे हैं बल्कि सियासी समीकरण को भी साधने की कवायद कर रहे हैं. युवाओं, कर्मचारियों, किसानों और कामगारों के साथ संवाद करने के बाद अब राहुल की नजर पीएम मोदी के ‘साइलेंट वोटर’ पर है.

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती पर शनिवार को राहुल गांधी के साथ ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में सिर्फ महिलाएं ही पदयात्री होंगी. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि 19 नंवबर को राहुल के साथ महिलाएं ही पैदल चलेंगी. यात्रा के दोनों सत्रों (भोजन पूर्व और मध्याह्न भोजन के बाद) में कांग्रेस और उससे जुड़ी शाखाओं की महिला कार्यकर्ता भाग लेंगी. महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों से पार्टी की महिला जनप्रतिनिधि शिरकत करेंगी.

राहुल के साथ पदयात्रा में महिलाएं
कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ सात नवंबर को तेलंगाना से महाराष्‍ट्र में प्रवेश की है और मध्य प्रदेश की ओर बढ़ रही है. ऐसे में नांदेड़ से होते हुए पदयात्रा अब तक हिंगोली और वाशिम जिलों से होते हुए अकोला पहुंच गई हैं. इंदिरा गांधी की जयंती के अवसर पर शनिवार को अकोला में महिलाएं बड़ी संख्या में शिरकत करेंगी और राहुल गांधी के साथ आगे-आगे पदयात्रा करेंगी. इस तरह कांग्रेस महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ आधी आबादी को साधने का दांव चला है.

राहुल गांधी कन्याकुमारी से कश्मीर तक के लिए पदयात्रा कर रहे हैं और दो महीने से ज्यादा का सफर तय कर चुके हैं. 150 दिनों तक चलने वाली ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के जरिए राहुल गांधी सियासी समीकरण को साधने की कवायद कर रहे हैं, जिसके लिए कई अनोखे नजारे भी देखने को मिल रहे हैं. इस दौरान राहुल रास्ते में चाय की दुकानों पर छोटे-छोटे समूहों में शामिल हो जाते हैं और उनसे बातें करते हैं. वह विक्रेताओं, दुकानदारों, युवाओं, उत्साहित स्कूली बच्चों, छोटे बच्चों, स्थानीय ग्रामीणों के साथ सहज रूप से मिलते हैं

कांग्रेस शनिवार को इंदिरा गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ साथ महिला शक्ति के रूप में दर्शाना है, जिसके लिए राहुल गांधी के साथ सिर्फ महिलाएं भारत जोड़ो यात्रा में पैदल चलेगी. राहुल गांधी के साथ कांग्रेस की विधायक, सांसद और कार्यकर्ताओं के अलावा पंचायत सदस्य हिस्सा लेंगी. कांग्रेस कहना है कि महिला शक्ति दिखाने के लिए यह एक अहम मौका बनेगा. कांग्रेस में महिला सशक्तीकरण का संदेश देने के लिए भी राहुल गांधी के साथ पदयात्रा में सिर्फ महिलाओं को साथ चलने की अनुमति दी है.

हालांकि, राहुल गांधी के साथ उनकी भारत जोड़ो यात्रा में 122 यात्रियों में से एक तिहाई से अधिक महिलाएं पहले से पैदल चल रही हैं. शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक रूप से 3,570 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए प्रतिबद्ध, महिलाओं ने एक बड़े मिशन के लिए अपने परिवार को 150 दिनों के लिए छोड़कर शिरकत कर रही हैं. ये 35 महिलाएं कश्मीर तक पैदल यात्रा कर रही हैं और शनिवार को काफी बड़ी संख्या में महिलाएं इससे जुड़ेंगी.

आधी आबादी के बीच सियासी पैठ
माना जा रहा है कि इंदिरा गांधी की जयंती पर राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा में महिलाओं के साथ चलकर आधी आबादी के बीच अपनी सियासी पैठ को मजबूत करना चाहते हैं. 2024 लोकसभा चुनाव के लिहाज से कांग्रेस की इस यात्रा काफी अहम मानी जा रही है. इसी मद्देनजर राहुल शनिवार को महिलाओं के साथ सिर्फ यात्रा ही नहीं बल्कि संवाद भी करेंगे. इसके पीछे कांग्रेस का सियासी मकसद भी छिपा है.

दरअसल, 2014 लोकसभा चुनाव के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी योजनाओं और नीतियों के जरिए बीजेपी के लिए एक मजबूत वोटबैंक तैयार किया है, जिसे साइलेंट वोटर के रूप में जाना जाता है. बीजेपी की लगातार जीत में इस साइलेंट वोटर की भूमिका रही है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के पीछे महिला मतदाता के समर्थन को बड़ी वजह मानी गई थी.

PM मोदी के साइलेंट वोटर पर नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार चुनाव के बाद खुद बताया था कि बीजेपी की जीत में यह साइलेंट वोटर कोई और नहीं बल्कि महिला मतदाता है. पीएम मोदी ने कहा था ‘बीजेपी के पास साइलेंट वोटर का एक ऐसा वर्ग है जो उसे बार-बार वोट दे रहा है. यह साइलेंट वोटर देश की नारी शक्ति है. ऐसा इसलिए है कि बीजेपी के शासन में महिलाओं को पूरा सम्मान भी मिलता है और सुरक्षा भी.

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद सबसे ज्यादा फोकस महिला वोटरों पर रहा है. उज्ज्वला योजना, शौचालयों का निर्माण, पक्का घर, मुफ्त राशन, महिलाओं को आर्थिक मदद जैसी कई ऐसी योजनाएं हैं, जिनका सीधा लाभ महिलाओं को होता है. मुद्रा योजना के तहत सर्वाधिक जोर अनुसूचित समाज की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर है. महिलाओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कई योजनाओं पर विश्वास 2019 के लोकसभा चुनाव में भी दिखा है. ऐसे ही पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की जीत में भी महिला वोटरों की अहम भूमिका रही है.

मोदी सरकार की लोकप्रिय उज्ज्वला योजना से बड़े पैमाने पर ग्रामीण महिलाओं को गैस सिलिंडर मिले. सीएसडीएस के एक सर्वे के मुताबिक उज्ज्वला योजना का फायदा 34 फीसदी परिवारों को हुआ है और उनमें से एक बड़ी संख्या में लोग जानते थे कि यह योजना मोदी सरकार चला रही है. इस वजह से महिलाएं वोट देने के लिए पहले से ज्यादा संख्या में निकलीं और उन्होंने बीजेपी के पक्ष में वोट किया. ऐसे ही मोदी सरकार महिलाओं के लिए कई विकास योजनाएं भी चला रही हैं.

देश में 46.1 करोड़ महिला मतदाता
साइलेंट वोटर की सियासी ताकत को देखते हुए कांग्रेस भी महिलाओं को साधे रखने की कवायद में है. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान देश में 43.8 करोड़ महिला मतदाताएं थीं, जो अब बढ़कर 46.1 करोड़ हो गई हैं. महिला मतदाताओं की भूमिका चुनावों में हमेशा खास रही है. इसलिए बीजेपी भी इन तक पहुंचने का प्रयास कर रही है. इसी कड़ी में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती पर राहुल गांधी महिलाओं को साथ पदयात्रा कर आधी आबादी के बीच अपनी पैठ को मजबूत करना चाहते हैं.

कांग्रेस महिलाओं के बीच अपनी पैठ इसीलिए भी गहरी करना चाहती हैं, क्योंकि देश में अब महिलाएं अपने मत का प्रयोग चुनावों के दौरान बढ़ चढ़कर कर रही हैं. उदाहरण के तौर पर अगर हम बंगाल, बिहार, गोवा, मणिपुर, मेघालय, केरल और अरुणाचल प्रदेश के चुनावों पर ध्यान दें, तो पाएंगे कि यहां महिला मतदाताओं की संख्या, पुरुष मतदाताओं से अधिक रहती है. हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी यही ट्रेंड देखने को मिले हैं और 68 में से 42 सीटों पर महिलाओं ने पुरुष के ज्यादा वोटिंग की है. इन्हीं कारणों को देखते हुए कांग्रेस महिलाओं को साधने की कोशिश में है, जिसके लिए इंदिरा गांधी की जयंती और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ उसके लिए एक बेहतर मौका दिया है?

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