मुंबई
एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में एकनाथ गुट के नेता और दादर के विधायक सदा सरवणकर की लाइसेंसी रिवॉल्वर को मुंबई पुलिस ने जब्त किया है। आपको बता दें कि यह झड़प गणेश विसर्जन के दिन दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के बीच हुई थी। इस मामले में पुलिस ने सदा सरवणकर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। परसों ही पुलिस ने रिवाल्वर को अपने कब्जे में लिया था। जिसे फ़िलहाल फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा गया है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में पुलिस ने अभी तक सदा सरवन कर या किसी अन्य को नोटिस संबंध नहीं भेजा है। फॉरेंसिक जांच के बाद ही पता लग पाएगा कि रिवाल्वर से फायरिंग हुई थी या नहीं।
क्या था मामला
उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एकनाथ शिंदे के खेमे के कार्यकर्ता शनिवार देर रात मुंबई में आपस में भिड़ गए थे। उस दौरान दोनों समूहों की शिकायतों के बाद मुंबई पुलिस ने स्थानीय विधायक सदा सरवणकर सहित दोनों पक्षों के 10 से 20 सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में दादर पुलिस ने शिवसेना के पांच कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था, जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। पुलिस के मुताबिक, यह घटना न्यू प्रभादेवी इलाके में रात करीब साढ़े बारह बजे हुई, जिसमें शिवसेना के पदाधिकारी संतोष तलवणे पर महेश सावंत और 30 अन्य लोगों ने कथित तौर पर हमला किया। तलवणे शिंदे खेमे का हिस्सा हैं, जबकि महेश सावंत पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले समूह से हैं।
उद्धव गुट से जुड़े शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने शिंदे खेमे के विधायक सदा सरवणकर के खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत झड़प वाली जगह पर कथित तौर पर गोलीबारी करने के लिए कार्रवाई की मांग की थी। सावंत ने उद्धव गुट के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद दादर पुलिस थाने में अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि अगर गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया गया और सरवणकर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो उनकी पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और लोगों को पता चलेगा कि असली शिवसेना कौन है।
गणेश विसर्जन के बाद कहासुनी
सावंत ने कहा था कि गणेश प्रतिमा विसर्जन के बाद कहासुनी हुई और आधी रात के करीब शिवसेना के दोनों धड़ों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरवणकर ने प्रतिद्वंद्वी समूह को गालियां दीं और दो बार गोली भी चलाई।शिवसेना सांसद ने यह भी दावा किया कि पुलिस भी इसकी गवाह है। उन्होंने कहा, ‘‘जब हमारे कार्यकर्ता दादर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने गए तो उसे स्वीकार नहीं किया गया।’’
दादर थाने में अरविंद सावंत के साथ मौजूद रहे विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने संवाददाताओं से कहा कि पुलिस की एकतरफा कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, ‘‘अगर दोनों पक्षों की गलती है तो दोनों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हमने शिकायत दी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। लेकिन जब दूसरा पक्ष शिकायत करता है तो हमारे लोगों को रात में गिरफ्तार कर लिया जाता है।’’
हालांकि, सरवणकर ने गोली चलाने से इनकार किया और दावा किया कि उनके प्रतिद्वंद्वी उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए बुलाती है तो वह उसका सहयोग करेंगे। शिंदे समूह के प्रवक्ता किरण पावस्कर ने भी सरवणकर के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज किया था। पावस्कर ने कहा, ‘‘सरवणकर के पास वाई श्रेणी की सुरक्षा है और यह असंभव है कि वह सार्वजनिक रूप से गोली चलाएंगे। इस तरह के आरोप ‘बचकाना’ हैं।’’
इन धाराओं के तहत मुकदमा हुआ था दर्ज
पुलिस के मुताबिक पांचों कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 324 (जानबूझकर खतरनाक हथियारों या साधनों से चोट पहुंचाना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 506 (आपराधिक धमकी) सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। जबकि दादर पुलिस ने सरवणकर और अन्य के खिलाफ शस्त्र अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत एक और प्राथमिकी दर्ज की है। उन्होंने कहा कि झड़प के दौरान गोलीबारी भी हुई और पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि गोली किसने चलाई।
