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कोविड-19 के बाद तीन साल तक बढ़ा हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा, ब्लड ग्रुप से भी कनेक्शन

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नई दिल्ली

अमेरिका में एक नई रिसर्च में पता चला है कि कोविड-19 संक्रमण से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और मौत का खतरा तीन साल तक बढ़ सकता है। यह खतरा उन लोगों में ज्यादा है जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली है। स्टडी में यह भी पाया गया कि महामारी की शुरुआत में जब मूल SARS-CoV-2 स्ट्रेन फैला था, तब यह खतरा और भी ज्यादा था। यह रिसर्च अमेरिका की सबसे बड़ी मेडिकल रिसर्च एजेंसी, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) ने जारी की है।

तीन साल बाद तक बना रह सकता है खतरा
इस रिसर्च में उन लोगों को शामिल किया गया था जिन्हें पहले से दिल की बीमारी थी और जिन्हें नहीं थी। रिसर्च से पता चला कि कोविड-19 होने से दिल की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। पहले की कई रिसर्च में भी ऐसा ही दावा किया गया था। लेकिन यह पहली रिसर्च है जिसमें यह बताया गया है कि यह खतरा संक्रमण के तीन साल बाद तक बना रह सकता है। यह खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जो महामारी की पहली लहर के दौरान संक्रमित हुए थे।

किसे हार्ट रोग का ज्यादा खतरा?
रिसर्च में पाया गया कि जो लोग महामारी की शुरुआत में कोविड-19 से संक्रमित हुए थे, उन्हें उन लोगों की तुलना में दिल की बीमारियों का खतरा दोगुना था जिन्हें कभी वायरस नहीं हुआ। गंभीर कोविड-19 मामलों में यह खतरा लगभग चार गुना ज्यादा था। यह रिसर्च ‘आर्टेरियोस्क्लेरोसिस, थ्रोम्बोसिस, एंड वैस्कुलर बायोलॉजी’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुई है।

‘अभी और रिसर्च की जानी चाहिए’
एनआईएच के नेशनल हार्ट, लंग, एंड ब्लड इंस्टिट्यूट (NHLBI) में डिविजन ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज के निदेशक, डॉ डेविड गोफ ने कहा, ‘यह रिसर्च कोविड-19 के लंबे समय तक रहने वाले हार्ट रोग और उनके प्रभावों के बारे में जरूरी जानकारी देती है।’ उन्होंने कहा कि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए और रिसर्च की जानी चाहिए। इससे उन लोगों में हार्ट रोग को रोकने के लिए रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है जिन्हें कोविड-19 के गंभीर मामले थे।

ब्लड ग्रुप का क्या पहलू?
रिसर्च का एक नया पहलू ब्लड ग्रुप और गंभीर कोविड-19 रोगियों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक के बढ़ते जोखिम के बीच संभावित जेनेटिक संबधों पर ध्यान केंद्रित करना है। रिसर्च में पाया गया कि A, B या AB ब्लड ग्रुप वाले लोगों में कोविड-19 के बाद हार्ट अटैक या स्ट्रोक होने की संभावना दोगुनी से भी ज्यादा होती है। जबकि O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में यह खतरा कम होता है।

एक अरब से ज्यादा लोग कोविड-19 से हुए थे संक्रमित
एक्सपर्ट्स ने पाया कि कोविड-19 रोगियों में हार्ट संबंधी घटनाओं का जोखिम दोगुना था और गंभीर बीमारी वाले लोगों के लिए यह जोखिम चार गुना अधिक था। तीन साल के फॉलो-अप के दौरान यह जोखिम बना रहा। कई बार यह टाइप 2 शुगर जैसे जोखिम कारकों के बराबर या उससे भी ज्यादा था। यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया केक स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक्सपर्ट हूमन अलये ने कहा कि दुनिया भर में एक अरब से ज्यादा लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘अब सवाल यह है कि क्या गंभीर कोविड-19 को हार्ट रोग के लिए एक और जोखिम कारक माना जाना चाहिए या नहीं। जैसे टाइप 2 शुगर या पेरिफेरल आर्टरी डिजीज को माना जाता है, जहां हार्ट रोग की रोकथाम पर ध्यान दिया जाता है।

 

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