9.9 C
London
Tuesday, April 28, 2026
HomeखेलWFI में बवाल शुरू... फेडरेशन के महासचिव ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह...

WFI में बवाल शुरू… फेडरेशन के महासचिव ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह पर लगाए ये आरोप

Published on

नई दिल्ली,

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) का चुनाव गुरुवार (21 दिसंबर) को संपन्न हुआ था. इस चुनाव में संजय सिंह ने जीत दर्ज की थी, जो पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के करीबी सहयोगी रहे हैं. यूपी कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष संजय को 40 वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी अनीता श्योराण को 7 वोट मिले. संजय सिंह के अध्यक्ष बनने के बाद बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट समेत कई रेसलर नाराज हैं.

WFI में शुरू हुआ बवाल
WFI के चुनाव हुए दो दिन भी नहीं गुजरे हैं, लेकिन फेडरेशन में भी बवाल शुरू हो गया है. पूरा बवाल संजय सिंह की ओर से लिए गए एक फैसले को लेकर है. संजय सिंह ने अध्यक्ष बनने के बाद जूनियर राष्ट्रीय चैम्पियनशिप की तारीखें घोषित कर दीं. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक संजय ने महासचिव प्रेमचंद लोचब से राय नहीं ली.

इस पूरे मामले को लेकर प्रेमचंद लोचब बिफर पड़े हैं. अनीता श्योराण के गुट से चुने गए रेलवे खेल संवर्धन बोर्ड के पूर्व सचिव लोचब ने कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा नहीं लिया. लोचब का मानना है कि सभी फैसले डब्ल्यूएफआई महासचिव के जरिए लिए जाने चाहिए. लोचब ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में अध्यक्ष ने नियमों की अनदेखी की.

लोचब ने संजय सिंह को लिखे पत्र में कहा, ’21 दिसंबर को चुनाव के तुरंत बाद डब्ल्यूएफआई के संविधान के अनुसार नवनियुक्त कार्यकारिणी की कोई नियमित बैठक आयोजित नहीं की गई. ऐसा लगता है कि राज्य महासंघों की आपत्ति जायज है और गोंडा के नंदिनी नगर में 28-30 दिसंबर तक होने वाली अंडर-20 और अंडर-15 राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप को स्थगित करना चाहिए.’

संजय सिंह ने बचाव में कही ये बात
इस पत्र की एक प्रति भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को भी भेजी गई है. डब्ल्यूएफआई के संविधान के अनुसार फैसले लेने के दौरान महासचिव का शामिल होना अनिवार्य है. संजय सिंह ने अपने बचाव में कहा कि वह नहीं चाहते थे कि जूनियर पहलवानों का एक साल बर्बाद हो और इसलिए जल्दी में यह फैसला किया गया.

संजय सिंह का मानना है कि यह फैसला जूनियर पहलवानों के हित को ध्यान में रखकर किया गया और किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है. संजय सिंह ने कहा कि डब्ल्यूएफआई का संविधान उन्हें फैसला लेने की अनुमति देता है और महासचिव उसका पालन करने के लिए बाध्य है.

उन्होंने कहा, ‘किसी को ठेस पहुंचाने के लिए यह फैसला नहीं किया गया. हमारी एकमात्र चिंता यही थी कि जो जूनियर पहलवान 2023 के कैलेंडर वर्ष में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में नहीं खेल पाए, उन्हें इसका मौका मिलना चाहिए, कई पहलवानों का आयु ग्रुप में यह आखिरी साल है और एक जनवरी 2024 के बाद वे जूनियर चैम्पियनशिप में भाग लेने के अयोग्य हो जाएंगे.’

Latest articles

विधानसभा में 33% महिला आरक्षण का संकल्प पारित: CM बोले-कांग्रेस ने बहनों की क्षमता-आकांक्षाओं की पीठ में खंजर घोंपा

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष एक दिवसीय सत्र में सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन’...

मनरेगा ई-केवाईसी में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल: 97.11% लक्ष्य पूरा कर रचा इतिहास, बड़े राज्यों को भी पछाड़ा

  रायपुर। छत्तीसगढ़ ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से की शिष्टाचार भेंट, विकास और जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने बेंगलुरु प्रवास के दौरान कर्नाटक के...

More like this

कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में DBT प्रायोजित व्याख्यान श्रृंखला संपन्न: जैव प्रौद्योगिकी के भविष्य पर हुई चर्चा

भोपाल। भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग (DBT) के सहयोग से भोपाल के कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ...

बीएचईएल स्पोर्ट्स क्लब में 8वीं मप्र राज्य मास्टर्स बैडमिंटन चैंपियनशिप का शुभारंभ

भोपाल। 8वीं मप्र राज्य मास्टर्स बैडमिंटन चैंपियनशिप का शुभारंभ भेल खेल प्राधिकरण बैडमिंटन कोर्ट, बरखेड़ा...