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पैरों में चप्पल, चेहरे पर स्माइल… यह कहां पहुंच गए शांतनु? रतन टाटा जैसी सादगी आई नजर

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शांतनु नायडू। नाम तो सुना होगा। वही शांतनु जो महान उद्योगपति रतन टाटा के युवा दोस्त थे। या कहें कि अभी भी हैं। रतन टाटा के जाने के बाद शांतनु अभी भी दोस्ती निभा रहे हैं। उनमें कई बार रतन टाटा का अक्स नजर आ जाता है। शांतनु हाल ही में एक कार्यक्रम में शामिल हुए। वहां वह बच्चों के बीच नजर आए। उस समय उनके अंदर कॉर्पोरेट का ‘क’ तक नहीं था। थी तो चेहरे पर मुस्कुराहट, पैरों में चप्पल, जमीन पर बैठना और रतन टाटा जैसी सादगी। शांतनु अपने जीवन से जुड़े कई अपडेट्स लिंक्डइन पर शेयर करते रहते हैं। उन्होंने ऐसी ही एक पोस्ट लिंक्डइन पर शेयर की है, जिसे काफी सराहा जा रहा है।

कहां पहुंचे शांतनु नायडू?
शांतनु हाल ही में एक एनजीओ की ओर से आयोजित बच्चों के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यह एनजीओ लोगों के बच्चों के साथ एक दिन गुजारने का मौका देता है। इसमें बच्चे किताबें पढ़ते हैं और अपने-अपने अनुभव शेयर करते हैं। यह एनजीओ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ा है। बता दें कि शांतनु भी बच्चों की एजुकेशन के लिए काफी एक्टिव रहते हैं। वह टाटा ग्रुप में अहम जिम्मेदारी निभाने के साथ ‘मुंबई बुकीज’ के फाउंडर भी हैं। यह एक रीडर क्लब है। इसमें लोग हर वीकेंड सुबह 8 बजे से 10 बजे तक दो घंटे के लिए किताबें पढ़ने के लिए इकट्ठे होते हैं।

क्या लिखा उन्होंने पोस्ट में?
शांतनु ने बच्चों के साथ गुजारे लम्हे को लिंक्डइन पर शेयर किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि बच्चों के लिए कोई रोक-टोक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लिखा है, ‘किताबें लिखने वालों ने बच्चों को फिर से पढ़ने के लिए उत्साहित करने का एक तरीका सीखा है। वो ये है कि सारे बंधन हटा दो। कोई रोक-टोक नहीं होनी चाहिए। बच्चों को किताबें दो। उनके लिए लाइब्रेरी बनाओ। उन्हें जादुई दुनिया की बातें बताओ। किताबों की दुकानों में उनका हाथ पकड़कर उन्हें अच्छी किताबें चुनने में मदद करो।’

कौन हैं शांतुन नायडू?
32 साल के शांतनु नायडू दिवंगत रतन टाटा के काफी करीबी रहे हैं। स्वभाव से काफी शांत नजर आने वाले शांतनु और रतन टाटा की दोस्ती काफी गहरी रही है। दुबले-पतले शांतनु रतन टाटा के असिस्टेंट रहे हैं। रतन टाटा शांतनु के साथ काफी समय गुजारते थे। हालांकि इनका रतन टाटा के परिवार के कोई संबंध नहीं है। शांतनु टाटा ट्रस्ट के डिप्टी जनरल मैनेजर के रूप में काम करते थे। शांतनु रतन टाटा को स्टार्टअप्स में निवेश के लिए कई टिप्स देते थे। रतन टाटा ने खुद फोन करके कहा था कि मेरे असिस्टेंट बनोगे। इसके बाद वह साल 2022 में रतन टाटा के ऑफिस में जीएम बन गए।

टाटा ग्रुप में मिली है अहम जिम्मेदारी
रतन टाटा के गुजरने के बाद भी शांतनु टाटा ग्रुप में बने हुए हैं। उन्हें इस ग्रुप में अहम जिम्मेदारी मिली हुई है। शांतनु की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक वह टाटा मोटर्स में जनरल मैनेजर और स्ट्रैटेजिक इनिशिएटिव्स के हेड हैं। इसके अलावा शांतनु टाटा स्मॉल एनिमल हॉस्पिटल (मुंबई) में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स हैं। इस अस्पताल को रतन टाटा ने जानवरों की देखभाल के लिए शुरू किया था। शांतनु को भी रतन टाटा की तरह जानवरों से लगाव है। साथ ही वह गुडफेलोज इंडिया और मुंबई बुकीज के फाउंडर भी हैं।

वसीयत में मिली हिस्सेदारी
शांतनु को रतन टाटा की वसीयत में भी हिस्सेदारी मिली है। वसीयत के मुताबिक रतन टाटा ने शांतनु को कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में MBA की पढ़ाई के लिए दिया गया 1 करोड़ रुपये का लोन माफ कर दिया है। साथ ही उन्हें गुडफेलोज स्टार्टअप में भी टाटा की हिस्सेदारी मिली है। यह स्टार्टअप बुजुर्गों की सेवाओं से जुड़ा काम करता है। रतन टाटा का 9 अक्टूबर 2024 को 86 साल की उम्र में निधन हो गया था। वह साल 1990 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे थे।

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