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फैसला पूरी तरह से सियासी… 2013 वाला दांव चलकर क्या इस बार दिल्ली में कामयाब होंगे अरविंद केजरीवाल?

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नई दिल्ली

अरविंद केजरीवाल ने क्या अपने सियासी करियर का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक चल दिया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का यह फैसला 2025 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आया है। केजरीवाल के इस्तीफे के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। दिल्ली में 10 साल से AAP की सरकार है और माना जा रहा है कि इस बार पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, दिल्ली नगर निगम (MCD) भी AAP के पास है, जिससे जनता की उम्मीदें बढ़ गई हैं। पिछले एक साल से दिल्ली में बाढ़, डेंगू जैसी बीमारियों का प्रकोप, प्रदूषण और इंफ्रास्ट्रक्चर की हालत जैसी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। इन मुद्दों के कारण AAP का शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल भी फीका पड़ रहा है।

केजरीवाल का फैसला प्रशासनिक या पूरी तरह से राजनीतिक
लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस भी इस बार मजबूती के साथ दिल्ली चुनाव के मैदान में जाएगी। वहीं बीजेपी दिल्ली की सभी लोकसभा सीटें जीतकर वापसी की आस लगाए हुए है। केजरीवाल ने इस्तीफे के बाद जनता से सीधे संवाद करते हुए कहा कि यदि आपको लगता है कि मैं निर्दोष हूं, तो मुझे वोट दें। AAP ने इस फैसले को पारदर्शिता का कदम बताया है। मंत्री आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इससे साबित होता है कि केजरीवाल कितने ईमानदार हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केजरीवाल पर लगाई गई जमानत शर्तें भी उनके लिए सरकार चलाना मुश्किल बना रही थीं। हालांकि, कानूनी सलाह से वह इन कठिनाइयों से निपट सकते थे। इससे साफ है कि यह फैसला प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है। पहले हरियाणा और खासकर दिल्ली का चुनाव पार्टी के लिए काफी महतवपूर्ण है।

2013 की रणनीति क्या 2025 में होगी कारगर
केजरीवाल ने 2013 में भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दे पर चुनाव लड़ा था, और अब वे एक बार फिर उसी मुद्दे पर जनता के बीच जाना चाहते हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे के जरिए लोगों को 2013 की याद दिला दी है। AAP को उम्मीद है कि इससे जनता का ध्यान मौजूदा समस्याओं से हट जाएगा। देखना होगा कि केजरीवाल की यह रणनीति 2025 के चुनाव में कितनी कारगर साबित होती है।

क्या दिल्ली की जनता एक बार फिर AAP को मौका देगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। इसके साथ ही अब यह भी सवाल है कि दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। मुख्यमंत्री जो भी बनेगा उसके लिए भी दिल्ली में बचे हुए समय के लिए चुनौती कम नहीं होगी।

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