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देश के पहले बजट की कहानी… तब क्‍या बोले थे वित्‍त मंत्री, कैसे थे भारत के हालात?

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नई दिल्‍ली

वित्‍त मंत्री न‍िर्मला सीतामरण 1 फरवरी को बजट 2023 पेश करेंगी। यह मोदी सरकार 2.0 के साथ उनका भी पांचवां बजट होगा। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यह मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट होगा। इसमें सरकार पूरा लेखाजोखा देगी कि आने वाले वित्‍त वर्ष में वह किस तरह से खर्च और कमाई करेगी। देश ने आजादी के 75 साल पूरे कर लिए हैं। हर बजट के साथ उसने आगे की ओर कदम बढ़ाए हैं। यह सिलसिला 26 नवंबर, 1947 से शुरू हुआ था। तब आजाद भारत का पहला केंद्रीय बजट पेश किया गया था। इसे पेश करने वाले थे तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री आके शणमुखम शेट्टी )। यह आज के बजट से कई मायनों में अलग था। भारत अंग्रेजी हुकूमत की जंजीरों से मुक्‍त हुआ था। बजट के जरिये सरकार को आगे का रोडमैप तैयार करना था। उस वक्‍त के बजट में सरकर ने कुल सालाना खर्च के लिए क्‍या अनुमान रखा था? वित्‍त मंत्री क्‍या बोले थे? खजाने की स्थिति कैसी थी? आइए, यहां सबकुछ जानते हैं।

आजाद भारत का पहला केंद्रीय बजट पेश करने का श्रेय शणमुखम शेट्टी को जाता है। इसे स्‍वतंत्रता मिलने के करीब तीन महीने बाद 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। इसे पेश करते हुए तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री बोले थे- ‘मैं आजाद भारत का पहला बजट पेश करने के लिए खड़ा हुआ हूं। इसे एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में माना जा सकता है।’ तब उन्‍होंने यह बजट पेश करने के लिए अपने आपको बहुत खुशकिस्‍मत माना था।

शेट्टी ने उस दिन क्‍या पहना था?
शेट्टी ने उस दिन टाई और सफेद शर्ट के साथ काला सूट पहना था। उनके हाथों में ब्रीफकेस था। बजट पेश करने के बाद उन्‍होंने ऑल इंडिया रेडियो पर भी इसका प्रसारण किया था। यह बजट कई मायनों में खास था। कारण था कि तब पाकिस्‍तान का रिजर्व बैंक अस्तित्‍व में नहीं आया था। दोनों देश इस बात पर राजी हुए थे कि सितंबर 1948 तक भारत और पाकिस्‍तान का करेंसी सिस्‍टम कॉमन होगा।

क्‍या थे तब भारत के हालात?
आजादी के समय भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था सिर्फ 2.7 लाख करोड़ रुपये की थी। यह दुनिया की जीडीपी के 3 फीसदी से भी कम था। अंग्रेज भारत को बेपनाह लूटकर गए थे। गरीबी और मुफलिसी चरम पर थी। आजादी के 75 साल बाद देश की जीडीपी करीब 55 गुना बढ़ चुकी है। दुनिया की जीडीपी में 2024 तक इसकी हिस्‍सेदारी 10 फीसदी से ज्‍यादा होने के अनुमान हैं।

कितना था खर्च और डिस्‍कल डेफिसिट का अनुमान?
देश के पहले बजट में 171.15 करोड़ रुपये के कुल रेवेन्‍यू का अनुमान था। खर्च का अनुमान 197.29 करोड़ रुपये रखा गया था। तब फिस्‍कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटे का अनुमान 26.24 करोड़ रुपये था। करीब 92.74 करोड़ रुपये बजट डिफेंस सर्विस के लिए आवंटित किया गया था।

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