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Tuesday, May 5, 2026
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उत्‍तरकाशी हादसा: रेस्क्यू ऑपरेशन में खर्च हुए करोड़ों रुपये, सिल्‍क्‍यारा सुरंग बनाने वाली कंपनी देगी पैसा

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देहरादून:

उत्‍तरकाशी सुरंग में 17 दिन तक चले रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन का पूरा खर्च निर्माण करवा रही कंपनी उठाएगी। हैदराबाद की नवयुग इंजिनियरिंग कंपनी लिमिटेड को सिल्‍क्‍यारा-बारकोट सुरंग बनाने का टेंडर दिया गया है। राष्‍ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के निदेशक (प्रशासन और वित्‍त) अंशू मनीष खलको ने बताया हम जल्‍द ही रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन में खर्च हुए पैसे का बिल निर्माण कंपनी को भेजेंगे।

मनीष खलको ने बताया कि 17 दिन तक चले बचाव अभियान में अनेकों एजेंसियों ने बगैर रुके काम किया। इस ऑपरेशन में करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। अभी तक खर्च हुए पैसे का टोटल हिसाब नहीं हो पाया है। सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय आगे से इस तरह के हादसों में जिम्‍मेदारी फिक्‍स करेगा। हालांकि मंत्रालय पहले ही सुरंग ढहने की जांच का आदेश दे चुका है। इस प्रोजेक्‍ट का ऑडिट भी किया जाएगा।

टनल में फंसे श्रमिकों को निकालना चुनौतीपूर्ण था: वीके सिंह
उत्तरकाशी टनल में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकलने तक मौके पर ही जमे रहे केंद्रीय मंत्री वीके सिंह गाजियाबाद पहुंच चुके हैं। इस दौरान स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनका फूल मालाओं के साथ तिलक लगाकर स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 41 श्रमिकों को सुरक्षित टनल से निकालना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, चिंता बढ़ने लगी थी, लेकिन वहां जुटी टीम के प्रयास और टनल में फंसे श्रमिकों की हिम्मत ने इस ऑपरेशन में सफलता प्राप्त करने में मदद की। इस ऑपरेशन में रेस्क्यू टीम के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री समेत पूरी उत्तराखंड सरकार और कई मंत्रालय के संयुक्त प्रयास शामिल रहे। इस ऑपरेशन ने साबित कर दिया कि भारत किसी भी आपदा से निपटने में सक्षम हैं।

श्रमिकों के परिवारों से कैमरे के माध्यम से बात कराई जाती रही
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि एक बार तो समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। बाद में पूरे प्लान के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया। छोटे से पाइप के सहारे टनल में फंसे श्रमिकों को खाने का सामान, पानी गर्म करने की रॉड, गर्म कपड़े और अन्य जरूरी सामान के साथ ऑक्सिजन की व्यवस्था की गई। श्रमिकों के परिवारों से कैमरे के माध्यम से बात कराई जाती रही, बल्कि बाहर मौजूद साथी श्रमिक भी उनका उत्साहवर्धन करते रहे। वीके सिंह ने बताया कि शुरुआत में टनल के बाहर एकत्र मलबे को हटाकर अंदर जाने का प्रयास किया गया, लेकिन जब रास्ते में पहाड़ का मलबा आने लगा तो उत्तरकाशी के सिंचाई विभाग से मशीन मंगाकर कार्य शुरू किया गया। चूंकि मशीन की क्षमता कम होने पर वह सफल नहीं हुई तो नजफगढ़ से दूसरी मशीन मंगाकर ऑपरेशन शुरू किया गया। पहली मशीन फंस गई थी, इसके बाद वर्टिकल ड्रीलिंग और मैग्नीशियम मशीन के जरिए ड्रिल का प्रयास कराया गया, परंतु मैग्नीशियम मशीन का तापमान अधिक होने कारण टनल के नुकसान को बचाने के लिए उसे रोक दिया गया।

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