ढाका
शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ढाका लौटने जा रहे हैं। बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा है कि कई साल से लंदन में रह रहे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान जल्दी ही देश लौटेंगे। साथ ही उन्होंने खालिदा जिया की रिहाई की भी पुष्टि करते हुए बताया कि जल्दी ही वह जेल से बाहर आ जाएंगी। तारिक रहमान काफी समय से बांग्लादेश में विपक्ष के चेहरे के तौर पर पहचान रखने वाले नेता हैं। उनको इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश में हुए ‘इंडिया आउट’ कैंपेन का मास्टरमाइंड माना जाता है।
बीएनपी महासचिव आलमगीर ने कहा कि तारिक रहमान को हसीना सरकार ने झूठे केस में फंसाकर अन्यायपूर्ण तरीके से निर्वासित किया था। बिजनस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, तारिक ने मौजूदा आंदोलन का पूरा समर्थन किया है और हमने उन्हें तुरंत देश वापस लाने के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि तारिक और खालिदा ही नहीं बाकी भी जो लोग राजनीतिक कारणों से जेल में बंद हैं, उन्हें भी रिहा किया जाएगा। बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक हालात में माना जा रहा है कि अगले पीएम के तौर पर आने वाले समय में तारिक रहमान के हाथ में देश की कमान आ सकती है।
भारत विरोधी रही है तारिक रहमान और बीएनपी की सोच
तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं। ढाका विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल अफेयर्स की पढ़ाई करने वाले रहमान तीन दशक से ज्यादा समय से राजनीति में हैं। 2009 में वह बीएनपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और 2018 में खालिदा जिया के जेल जाने के बाद पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए गए थे। तारिक को ढाका ग्रेनेड अटैक केस में 2018 में ढाका ग्रेनेड अटैक में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। 2004 में ये धमाका हुआ था, जिसे शेख हसीना की हत्या की साजिश माना गया था। इस मुकदमे का फैसला आने से पहले ही तारिक देश छोड़कर लंदन जा चुके थे। ऐसे में अदालत ने तारिक को भगोड़ा घोषित कर दिया। काफी समय से वह लंदन से ही बांग्लादेश की राजनीति को देख रहे हैं।
तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी के भारत के साथ अच्छे रिश्ते नहीं रहे हैं। बीएनपी भारत पर बांग्लादेश में हस्तक्षेप का आरोप लगाती है और शेख हसीना को भारत का एजेंट तक कहती रही है। बीएनपी ने इस साल के शुरुआत में हुए बांग्लादेश के आम चुनाव का बहिष्कार किया था। पार्टी ने आरोप लगाया था कि शेख हसीना ने भारत के समर्थन से चुनाव जीता है। हसीना के सत्ता में लौटने के बाद बीएनपी ने ‘इंडिया आउट’ नाम से एक अभियान शुरू किया। इस आंदोलन का मकसद भारतीय वस्तुओं का बहिष्कार और हसीना सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करना था। इसके पीछे तारिक का ही दिमाग था और इसमें उनको एक हद तक सफलता भी मिली।
