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मोदी और शी के मिलने से क्‍यों पुतिन का बढ़ा खून, किस बड़ी ‘डील’ पर रूस की नजर?

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नई दिल्‍ली

कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक से सबसे ज्‍यादा रूस खुश है। व्‍लादिमीर पुतिन के रूस ने भारत और चीन के बीच बढ़ते संबंधों का स्वागत किया है। रूस का कहना है कि दुनिया में शांति और विकास के लिए दोनों देशों का एक साथ आना जरूरी है। उसकी खुशी का एक कारण यह भी है कि वह भारत और चीन के बूते अमेरिका और यूरोपीय देशों के वर्चस्‍व को तोड़ना चाहता है। रूस रुपये और रूबल में व्‍यापार करने के सिस्‍टम को तैयार करने पर पुरजोर तरीके से लगा है। इसके जरिये वह डॉलर के इस्‍तेमाल को घटाना चाहता है। हालांकि, भारत अभी इसे लेकर बेहद सतर्क है।रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने बताया है कि भारत के साथ रूस भारतीय रुपये और रूबल में सीधे व्यापार भुगतान प्रणाली स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

रुपये-रूबल की व्‍यवस्‍था पर चल रहा व‍िचार
एक इंटरव्यू में अलिपोव ने कहा, ‘भारत और रूस दोनों ही रूबल-रुपये व्यापार तंत्र के बारे में सोच रहे हैं।’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विनिमय दर के बजाय भारतीय बैंकों का ‘अत्यधिक सतर्क’ रवैया सबसे बड़ी चुनौती है।

डॉलर के इस्तेमाल को कम करने पर रूस के दबाव के बावजूद भारत अधिक सतर्क रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस पर प्रतिबंधों और रुपये-रूबल व्यापार के विस्तार के आसपास की जटिलताओं के चलते भारत सरकार और देश के वित्तीय नियामक कई प्रस्तावों को लेकर सतर्क बने हुए हैं। रूस के सबसे बड़े बैंक सर्बैंक एजी के कई प्रस्ताव अभी भी मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

अलिपोव ने दावा किया है कि अमेरिका भारत और रूस के बीच लेनदेन को ट्रैक करने में बहुत सतर्क रहा है। वह प्रतिबंधों की धमकी भी दे रहा है। यही कारण है कि भारत और रूस रूबल-रुपये व्यापार तंत्र के बारे में सोच रहे हैं।

रूस का दावा- अगला नंबर भारत का भी हो सकता है
अलिपोव ने फरवरी 2022 से यूक्रेन में मॉस्को के बड़े सैन्य अभियान के बाद अमेरिका की ओर से रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की। साथ ही आगाह किया कि इसी तरह की कार्रवाई अन्य ब्रिक्स देशों को भी निशाना बना सकती है। उन्होंने कहा, ‘आज यह रूस है। कल यह चीन हो सकता है। और मुमकिन है भारत भी।’

रिपोर्ट के अनुसार,अलिपोव ने वैश्विक वित्तीय सहयोग के विभिन्न मुद्दों में भारत, रूस और चीन को समान आवाज रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।अलिपोव ने आगे कहा, ‘भारत की आवाज को ध्यान में रखा जाना चाहिए। दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह भारत में सभी क्षमताएं हैं।’ अलिपोव ने यह भी बताया कि आने वाले हफ्तों में रूस और भारत के बीच उच्च-स्तरीय दौरे होने की उम्मीद है। इसमें इस नवंबर में एक अंतर-सरकारी वार्ता भी शामिल है।

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