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Wednesday, June 3, 2026
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मंदिरों, बाबाओं और मस्जिद की संपत्ति पर टैक्स क्यों नहीं… संसद में जब पप्पू यादव ने पूछ लिया ये सवाल

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पूर्णिया:

संसद में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कई अहम मुद्दों पर चिंता जताई। उन्होंने किसानों की समस्याओं, मणिपुर की स्थिति, परीक्षा पेपर लीक, बच्चों पर हो रहे अत्याचार, पड़ोसी देशों के साथ संबंध, देश पर बढ़ते कर्ज, धार्मिक संस्थानों में जमा धन, बाबाओं की संपत्ति, NGO और CSR फंड, नोटबंदी, स्वास्थ्य और शिक्षा पर लगाए गए जीएसटी, बिहार के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

धार्मिक संस्थानों और बाबाओं की संपत्ति पर सवाल
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने मंदिरों, गुरुद्वारों, चर्च और मस्जिदों में जमा बड़ी धनराशि का मुद्दा उठाते हुए सवाल पूछा। सांसद पप्पू यादव ने कहा कि मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च जैसी धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति का मूल्यांकन नहीं होता। अकेले मंदिरों में ही 3.5 से 4 लाख करोड़ रुपये जमा हैं। इसके अलावा गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों की संपत्ति का भी कोई हिसाब नहीं है। पप्पू यादव ने सवाल किया कि क्या वित्त मंत्री इन पर नज़र नहीं रखते? दो दिन मुफ़्त खाना खिलाकर क्या इन्हें पैसा रखने की आज़ादी दे दी जाती है?

बाबाओं की बढ़ती संपत्ति पर भी पप्पू यादव ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ बाबाओं के पास हज़ारों करोड़ की संपत्ति है। यह पैसा कहां से आता है और कहां जाता है, इसका कोई लेखा-जोखा नहीं है। कई बाबाओं ने NGO के ज़रिए बड़ी रकम इकट्ठा की है। लेकिन NGO पर टैक्स नहीं लगता और सरकार का उन पर कोई नियंत्रण नहीं है।

किसानों और शिक्षा प्रणाली को लेकर चिंता
सांसद पप्पू यादव ने सबसे पहले किसानों की दुर्दशा पर बात की, खासकर उनकी आत्महत्याओं और आंदोलनों के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार परीक्षा पेपर लीक होने की घटनाएँ सामने आ रही हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। साथ ही, उन्होंने बच्चों के खिलाफ हो रहे अत्याचार और उन पर दर्ज किए जा रहे मुकदमों पर भी सवाल खड़े किए।

विदेशी संबंधों और कर्ज को लेकर सवाल
उन्होंने भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में कोई भी पड़ोसी देश भारत के साथ व्यापार करने को इच्छुक नहीं दिख रहा है। विकसित देशों के साथ भी व्यापार को लेकर हिचकिचाहट देखी जा रही है। भूटान के मंत्री चीन में ज्यादा समय बिता रहे हैं, जबकि भूटान भारत का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है।

इसके अलावा, देश के बढ़ते विदेशी कर्ज पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 2024 तक भारत पर 718 अरब डॉलर (लगभग 60 लाख 96 हजार करोड़ रुपये) का कर्ज होगा, और सवाल किया कि क्या भारत इस कर्ज को चुका पाने में सक्षम होगा?

NGO और CSR फंड की पारदर्शिता पर जोर
पूर्णिया सांसद ने बताया कि देश में 33 लाख करोड़ रुपये NGO के पास हैं, लेकिन सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने CSR फंड के दुरुपयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बड़ी-बड़ी कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला यह फंड कहाँ और कैसे इस्तेमाल हो रहा है, इसकी पारदर्शिता होनी चाहिए।

नोटबंदी और जीएसटी की समीक्षा की मांग
नोटबंदी के असर पर बोलते हुए पप्पू यादव ने कहा कि इसके बावजूद काले धन की समस्या खत्म नहीं हुई है। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा पर लगाए गए जीएसटी का विरोध करते हुए कहा कि इससे आम आदमी पर बोझ बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सीमेंट, पेंसिल, कलम, किताब जैसी आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी लगाने से शिक्षा महंगी हो गई है। गरीब और मध्यम वर्गीय बच्चों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना कठिन हो गया है।

बिहार के विकास के लिए पप्पू यादव ने दिए सुझाव
बिहार के विकास को लेकर भी उन्होंने कई सुझाव दिए। उन्होंने राज्य में मखाने के उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की बात कही, क्योंकि बिहार दुनिया में सबसे अधिक मखाने का उत्पादन करता है, लेकिन सही प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में इसका उचित लाभ नहीं मिल पाता। इसके अलावा, उन्होंने कोसी नदी पर बांध बनाने और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की भी मांग रखी।

सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग
अपने भाषण के अंत में पप्पू यादव ने सरकार से आग्रह किया कि वह इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से विचार करे। उन्होंने चेताया कि अगर इन समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो देश के विकास की गति रुक सकती है। उन्होंने सरकार से गरीबों, किसानों और युवाओं के हित में ठोस कदम उठाने की अपील की।

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