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श्रीलंका का इस्‍तेमाल नहीं होने देंगे… अनुरा कुमारा ने राष्ट्रपति पद की शपथ लेते ही भारत को दिया भरोसा, चीन के माने जाते हैं दोस्त

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कोलंबो:

अनुरा कुमारा दिसानायके ने सोमवार सुबह राष्ट्रपति सचिवालय में मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या की मौजूदगी में श्रीलंका के 9वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है। अनुरा ने शपथ के बाद कहा कि वह श्रीलंका में पुनर्जागरण के एक नए युग की शुरुआत करने की जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए सभी मुमकिन कोशिश करेंगे। श्रीलंका में शनिवार को राष्ट्रपति पद के लिए वोट डाले गए था। रविवार को नतीजों का ऐलान किया गया, जिसमें जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) पार्टी के नेता और नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) गठबंधन के उम्मीदवार 55 वर्षीय दिसानायके को विजेता घोषित किया गया।

मार्क्सवादी नेता दिसानायके ने श्रीलंका के राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में निकटतम प्रतिद्वंद्वी समागी जन बालवेगया (एसजेबी) के साजिथ प्रेमदासा को हराया है। दिसानायके और उनकी पार्टी का झुकाव चीन की तरफ माना जाता है। हालांकि दिसानायके की पार्टी की ओर से कहा गया है कि उनका देश भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में नहीं उलझेगा और उनके देश का कोई इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। इसे अनुरा की ओर से चीन के मामले में भारत को आश्वस्त करने की कोशिश की तरह देखा जा रहा है क्योंकि उनको चीन का दोस्त माना जाता रहा है।

श्रीलंका का क्षेत्र किसी के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगा
दिसानायके की पार्टी के प्रवक्ता बिमल रत्नायके ने एक बयान में कहा कि श्रीलंकाई क्षेत्र का इस्तेमाल किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं किया जाएगा। वहीं एनपीपी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य प्रोफेसर अनिल जयंती ने भारत से जुड़े सवाल पर कहा कि इंडिया निश्चित रूप से हमारा अहम पड़ोसी और एक महाशक्ति है और उनका अपना एक महत्व है। हिंद महासागर में श्रीलंका की रणनीतिक स्थिति ने उसकी भूराजनीतिक प्रासंगिकता को बढ़ाया है।

श्रीलंका के नए राष्ट्रपति दिसानायके का राजनीति में लंबा अनुभव है। 80 के दशक में छात्र राजनीति से उन्होंने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। दिसानायके साल 2000 में पहली बार सांसद बने और 2004 में मंत्री पद संभाला था। दियानायके 2014 से जेवीपी के अध्यक्ष हैं और 2019 में भी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ चुके हैं।

दिसानायके का जन्म श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से 100 किलोमीटर दूर थंबुट्टेगामा में एक दिहाड़ी मजदूर के घर हुआ था। दिसानायके अपने परिवार के गांव से विश्वविद्यालय जाने वाले पहले छात्र थे। यूनिवर्सिटी में ही अपनी राजनीति से वह चर्चा में आ गए थे और तेजी से उन्होंने पहचान बनाई। उनकी मौजूदा सफलता के पीछे 2022 में श्रीलंका में आई आर्थिक मंदी को माना जाता है, जिसे उन्होंने पार्टी का मुद्दा बनाया।

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