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Monday, June 22, 2026
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कांग्रेस के इस फैसले से दिल्ली की तरह बंगाल में भी बीजेपी की होगी बल्ले-बल्ले, राहुल ने दी दीदी को टेंशन

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कोलकाता

कांग्रेस के एक फैसले से दिल्ली की तरह पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी की बल्ले-बल्ले हो सकती है। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पश्चिम बंगाल कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब टीएमसी के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी के नेताओं को पश्चिम बंगाल में जनाधार और संगठन मजबूत करने की सलाह दी है। पार्टी पश्चिम बंगाल में पार्टी चुनाव से पहले सरेंडर मोड में नहीं जाएगी बल्कि टीएमसी और बीजेपी के खिलाफ मजबूती से चुनाव लड़ेगी। 2026 तक कांग्रेस अपने इस फैसले पर कायम रही तो बीजेपी की बंगाल में भी लॉटरी लग सकती है।

बंगाल में जीरो पर पहुंच गई कांग्रेस, फायदा टीएमसी को
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति दिल्ली की तरह ही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में वाम दलों से गठबंधन के बावजूद कांग्रेस का खाता नहीं खुला था। 2016 बंगाल चुनाव में 44 सीट जीतने वाली कांग्रेस पिछले इलेक्शन में टीएमसी और बीजेपी की सीधी लड़ाई में शून्य पर सिमट गई थी। 12.2 फीसदी वोट भी घटकर 2.93 फीसदी हो गया। इस हार का असर लोकसभा चुनाव में नजर आया और कांग्रेस सिर्फ एक सीट ही हासिल कर सकी।

माना जाता है कि दोनों चुनावों में कांग्रेस ने ममता बनर्जी पर हमले से ज्यादा बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने में मेहनत की। नतीजा यह रहा कि टीएमसी-बीजेपी के टक्कर में कांग्रेस के कार्यकर्ता भी बंट गए। वोटरों ने भी इन दोनों पार्टियों को जिताने और हराने के वोटिंग की। 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के फाइनल रिजल्ट में टीएमसी ने 215 सीटें जीतकर हैट्रिक लगाई और 77 सीटों के साथ बीजेपी मुख्य विपक्षी दल बनी।

दिल्ली चुनाव में कांग्रेस ने बदली स्ट्रैटजी, नुकसान आप का
दिल्ली में भी कांग्रेस 2014 के बाद से अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के बजाय बीजेपी को हराने के लिए चुनाव लड़ती रही। इस चुनावी रणनीति के कारण दिल्ली में भी 2015 के बाद से विधानसभा और लोकसभा में कांग्रेस का खाता नहीं खुला। जनता आप या बीजेपी को वोट करती रही और कांग्रेस कार्यकर्ता इन्हीं दो पार्टियों में अपना भविष्य तलाशते रहे।

2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने स्ट्रैटजी बदली और बीजेपी को हराने के बजाय अपनी जमीनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की। राहुल गांधी चुनावी सभाओं में सीधे तौर से अरविंद केजरीवाल और आप पर हमले किए। दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के इस प्रयास का फायदा बीजेपी को मिला। आम आदमी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। कांग्रेस का वोट प्रतिशत भी 2.08 प्रतिशत बढ़कर 6.34 हो गया।

दिल्ली और बंगाल में वोटों के अंतर से समझिए समीकरण
कांग्रेस के ताकत के साथ चुनाव लड़ने का बीजेपी को कैसे फायदा हो सकता है, इसे आंकड़ों से समझा जा सकता है। 2020 के दिल्ली चुनाव में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच वोटों का अंतर करीब 15 फीसदी था। 2025 में कांग्रेस वैसे तो 70 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे मगर 18 विधानसभाओं में पार्टी पूरी ताकत से मुकाबला किया।

त्रिकोणीय मुकाबले इन 18 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली। दिल्ली सदर से अरविंद केजरीवाल की हार में कांग्रेस के संदीप दीक्षित को मिले वोटों की बड़ी भूमिका रही। अब बंगाल पर नजर डालते हैं। 2021 के बंगाल चुनाव में टीएमसी और बीजेपी के बीच वोटों का अंतर करीब 10 प्रतिशत ही रहा। ऐसे में कांग्रेस दमखम से चुनाव लड़ेगी तो टीएमसी को झटका लग सकता है।

कांग्रेस की नाकामी से राज्यों में मजबूत हुए क्षेत्रीय दल
एक्सपर्ट मानते हैं कि लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने चुनावी रणनीति बदली है। कई राज्यों में कांग्रेस खुद को कमजोर मानते हुए बीजेपी को हराने के लिए क्षेत्रीय दलों पर आश्रित हो गई। इस नजरिये ने क्षेत्रीय दलों को बीजेपी के मुकाबले में खड़े होने का मौका दिया। इस कारण बंगाल, दिल्ली, यूपी, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में पार्टी के कार्यकर्ता और वोटर कांग्रेस से छिटकते गए। इंडिया गठबंधन के प्रयोग से भी कांग्रेस को सिर्फ यूपी में फायदा हुआ। अगर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सभी राज्यों में मजबूत नहीं होगी तो उसे फिर केंद्र की सत्ता से दूर ही रहना होगा। इस कारण पार्टी ने जनाधार बनाने का फैसला किया है।

अगर कांग्रेस ने ताकत झोंकी तो ममता दीदी को लगेगा झटका
पश्चिम बंगाल में जब अधीर रंजन चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया, तब यह अनुमान लगाया गया कि कांग्रेस राज्य में ममता बनर्जी के साथ गठबंधन के रास्ते तलाश रही है। मगर दिल्ली की मीटिंग में राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस को बीजेपी के साथ उन दलों के खिलाफ लड़ना है, जिन्होंने राज्यों में पार्टी को कमजोर किया है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रभारी गुलाम मीर ने कहा कि राज्य के लोग राज्य और केंद्र सरकार की कमियों से नाराज हैं। कांग्रेस पार्टी को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है और वह लोगों की आवाज सड़कों पर उठाएगी। बंगाल के लोग चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी राज्य में मजबूत भूमिका निभाए। कांग्रेस अब बंगाल में अकेले अपने दम पर मजबूत होने की कोशिश करेगी।

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