नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने रेप के एक मामले में भारतीय सेना के एक 64 वर्षीय पूर्व अधिकारी को राहत दी है। शीर्ष अदालत ने एक 39 वर्षीय विवाहित महिला की तरफ से पूर्व सैन्य अधिकारी के खिलाफ दर्ज मामले को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि महिला ने 2014 से शहर के विभिन्न पुलिस थानों में इसी तरह के आठ फर्जी मामले दर्ज कराए थे। कोर्ट ने इसे कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया।
आठ लोगों के खिलाफ एक जैसा केस
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि जब परेशान आरोपी ने पहली बार राहत के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, तब न्यायालय ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने याचिकाकर्ता पूर्व सैन्यकर्मी कैप्टन राकेश वालिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि अदालत के सामने सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि उसी प्रतिवादी ने कम से कम आठ अन्य व्यक्तियों (कुल नौ मामले) के खिलाफ लगभग समान मामले दर्ज कराए हैं। अलग-अलग व्यक्तियों के खिलाफ कमोबेश एक जैसे आरोप लगाने वाली एफआईआर पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले के एक अन्य पहलू पर भी ध्यान दिलाया।
महिला ने जांच में नहीं किया सहयोग
पीठ ने कहा कि हमें यह भी बताया गया है कि एफआईआर दर्ज करने के बाद शिकायतकर्ता महिला ने जांच में सहयोग नहीं किया है। साथ हीनोटिस दिए जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुई है। कोर्ट ने साथ ही कहा कि यह “बिल्कुल उसी तरह का मामला है, जहां दिल्ली हाई कोर्ट को सीआरपीसी की धारा 482 (या नई भारतीय न्याय संहिता की धारा 528 के तहत) के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करना चाहिए था और कार्यवाही को रद्द कर देना चाहिए था।
2008 से 2014 तक 8 केस
6 दिसंबर 2014- हौज काजी पुलिस स्टेशन
आरोप- अश्लील इशारे, फोन नंबर मांगना और धमकी देना
22 जून 2020 – आईपी इस्टेट
आरोप- कोर्ट रीडर पर रेप का आरोप
3 अप्रैल 2021- जामिया नगर
आरोप- दो साल से दोस्ती फिर यौन शोषण
4 जून 2021- लाहौरी गेट
आरोप- हैंडलूम शॉप के मालिक पर सेक्सी फोटो मांगने का आरोप
30 जून 2021- हजरत निजामुद्दीन
आरोप- एक आदमी पर जबरदस्ती कार में खींचने गलत तरीके से छूने की बात
29 दिसंबर 2021- महरौली
आरोप- मॉडलिंग असाइनमेंट देने का झांसा देकर उत्पीड़न
4 मार्च 2022- कोतवाली
आरोप- सेक्शन 354, सेक्शन 354ए और 34
19 सितंबर 2022- द्वारका
आरोप- शादी का झांसा देकर उत्पीड़न
यह भी सामने आया कि विवाहित महिला, जिसके दो बच्चे हैं, की तरफ से दर्ज कराई गई विभिन्न एफआईआर में बलात्कार, छेड़छाड़, उसकी शील भंग करने का प्रयास, आपराधिक धमकी और संबंधित अपराधों का आरोप लगाया गया है। यह 2014 से शुरू होकर एक दशक से अधिक समय तक चला। लेकिन इनमें कई विसंगतियां दिखाई देती हैं। इसमें उसके नाम, उपनाम और अन्य विवरणों की वर्तनी शामिल है। ये अलग-अलग व्यक्तियों के रूप में प्रस्तुत करने के लिए बदल दिए गए प्रतीत होते हैं।
फेसबुक पर मुलाकात, मॉडलिंग का ऑफर
वालिया के खिलाफ महरौली पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 328 (अपराध करने के इरादे से जहर आदि के माध्यम से चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया था। महिला ने दावा किया कि वह फेसबुक पर पूर्व अधिकारी से मिली थी। आरोपी ने उसे मॉडलिंग असाइनमेंट के सिलसिले में मिलने के लिए कहा था। शुरू में, उसने मना कर दिया, लेकिन उसके लगातार अनुरोध करने पर, वह दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर उससे मिलने के लिए तैयार हो गई।
महिला ने आगे आरोप लगाया कि वह उसकी कार में बैठ गई। इसके बाद आरोपी ने उसे कोल्ड ड्रिंक ऑफर की, जिसमें नशीला पदार्थ मिलाया गया था। जब वह बेहोश हो गई, तो उसे एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहां उसके साथ छेड़छाड़ और रेप किया गया। उसने कहा कि वह तीन साल से अपने पति से अलग रह रही थी। उसने दावा किया कि वह पहले एक फ्रीलांस मॉडल के रूप में काम करती थी। मॉडलिंग छोड़ने के बाद, उसने दावा किया कि वह नौकरी की तलाश में थी।
कानून का दुरुपयोग मान खारिज किया केस
वालिया ने मदद के लिए पुरुष अधिकार कार्यकर्ता दीपी का नारायण भारद्वाज से संपर्क किया। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता पांच पुस्तकों का लेखक है। इनमें से कुछ बेस्टसेलर होने का दावा किया जाता है। आरोपी ने दावा किया कि उसने महिला से तभी संपर्क किया जब उसने उसकी पुस्तकों के प्रचार के लिए अपनी सेवाएं देने की पेशकश की।
यह पहला मामला है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने रेप और छेड़छाड़ के दावों को सिलसिलेवार दर्ज कराने वाली महिला द्वारा कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग को मान्यता दी है। साथ ही उसकी कार्यप्रणाली को सूचीबद्ध किया है और मामले को खारिज कर दिया है।
महिला पर दर्ज हो जबरन वसूली का मामला
भारद्वाज ने कहा कि यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि एक महिला की गवाही के आधार पर किसी निर्दोष व्यक्ति को मुकदमे की पीड़ा नहीं दी जा सकती, जबकि हर सबूत उसकी बेगुनाही की ओर इशारा करता है। मुझे वाकई खुशी है कि हम एक ऐसे सैनिक के लिए यह केस लड़ पाए जिसने देश की सेवा की और जबरन वसूली के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस कम से कम अब तो अपना रास्ता बदलेगी, इस महिला पर जबरन वसूली का मामला दर्ज करेगी और उसे सलाखों के पीछे भेजेगी, इससे पहले कि वह एक और जिंदगी बर्बाद कर दे। उन्होंने कहा कि मैं एडवोकेट अश्विनी दुबे की आभारी हूं जिन्होंने हमारे लिए इस केस को इतनी शिद्दत से लड़ा।
