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आप भी कभी टीचर थीं.., राहुल गांधी ने बंगाल में बर्खास्त 25000 शिक्षकों की बहाली के लिए लिखा राष्ट्रपति को खत

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कोलकाता:

पश्चिम बंगाल के 25 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के मुद्दे पर राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। राहुल गांधी ने ऐसे वक्त पर राष्ट्रपति को पत्र लिखा है जब राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कह चुकी हैं कि जब तक जिंदा हूं, किसी की नौकरी नहीं जाएगी। ममता बनर्जी ने कहा था कि वह अदालत का सम्मान करती हैं लेकिन फैसले को नहीं मानेंगी। बनर्जी ने सोमवार को शिक्षकों से मुलाकात भी की थी। अब इस पूरे मामले में राहुल गांधी की एंट्री हुई है। राहुल गांधी ने लिखा है कि आप खुद शिक्षक रही हैं। पश्चिम बंगाल के शिक्षक लगभग एक दशक से सेवा दे रहे हैं। उनकी बर्खास्तगी लाखों छात्रों को बिना पर्याप्त शिक्षकों के कक्षाओं में जाने के लिए मजबूर करेगी।

राष्ट्रपति को क्या कुछ लिखा
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में कहा है कि आप पश्चिम बंगाल के उस शिक्षकों के मामले में हस्तक्षेप करें जिनकी नौकरी को पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने रद्द किया और फिर इस सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। गांधी ने अपने पत्र में कहा, मैडम आपने खुद एक शिक्षक के रूप में सेवा की है। मुझे यकीन है कि आप इस अन्याय की भारी मानवीय कीमत को समझती हैं ।शिक्षकों, उनके परिवारों और उनके छात्रों के लिए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया उनके अनुरोध पर अनुकूल रूप से विचार करें और सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निष्पक्ष साधनों के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों को जारी रखने की अनुमति दी जाए।

मानवीय दृष्टिकोण पर की अपील
सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 2016 में 25,000 से अधिक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि फैसले के बाद से, शिक्षकों के साथ-साथ बर्खास्त किए जाने वाले कर्मचारियों ने किसी भी तरह के निवारण की उम्मीद लगभग छोड़ दी है। गांधी ने कहा कि दागी और बेदाग दोनों तरह के शिक्षकों ने अपनी नौकरी खो दी है। भर्ती के दौरान किए गए किसी भी अपराध की निंदा की जानी चाहिए और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। हालांकि निष्पक्ष तरीके से चुने गए शिक्षकों के साथ दागी शिक्षकों के बराबर व्यवहार करना एक गंभीर अन्याय है। राहुल गांधी ने लिखा है कि उनकी मनमानी बर्खास्तगी उनके मनोबल और सेवा करने की प्रेरणा को नष्ट कर देगी और उनके परिवारों को उस चीज़ से वंचित कर देगी जो अक्सर आय का एकमात्र स्रोत होती है।

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