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Thursday, June 4, 2026
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200 करोड़ वैक्सीनेशन… लक्ष्य बड़ा था, मुश्किलें तमाम थीं मगर कोरोना से यूं जीतता चला गया भारत

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भारत जल्द ही 200 करोड़ वैक्सीन का लक्ष्य हासिल करने वाला है। भारत जैसे देश में ये लक्ष्य आसान नहीं था मगर बेहतर मैनेजमेंट से ये लक्ष्य हासिल होने जा रहा है। 30 जनवरी 2020 का वो दिन था जब भारत में पहला कोविड मामला सामने आया था। इसके बाद मार्च में इस वायरस से भारत में पहली मौत हुई थी। 23 मार्च को भारत में लॉकडाउन की घोषणा की गई। उसके बाद वो दौर कोई भी इंसान याद नहीं करना चाहेगा। दो साल इंसान की जिंदगी कैदखाने में कैद हो गई। लाशों का अंबार लग गया था। हर तरफ सन्नाटा और मातम ही था। मगर कहा जाता है कि माना कि अंधेरा घना है, परंतु दीप चलाना कहां मना है…बस इसी उम्मीद के साथ भारत निरंतर आगे बढ़ता गया और इस महाविनाश वाले दौर से जल्द ही हम निकल पाए।

कोरोना वायरस के वक्त पर हमाले हेल्थ वर्कर्स ने बहुत ही शानदार रोल निभाया था। इस कठिन परिस्थिति में वो ही हमारा सहारा बने थे। भारत अब जल्दी ही 200 करोड़ का लक्ष्य पूरा करने जा रहा है। इस लक्ष्य तक पहुंचने में सरकार से लेकर आम आदमी सभी का योगदान रहा। इस तस्वीर में आप साफ देख सकते हैं कि भारत सरकार ने इसके खतरे को भांपते हुए समय-समय पर कठोर फैसले लिए। 2021 की पहली ही तारीख को पीएम मोदी ने वैक्सीनेशन का ऐलान कर दिया था।

दुनिया की 17.5 पॉपुलेशन सिर्फ भारत में
ग्राफिक्स के जरिए आपको बताया गया है कि भारत में पॉपुलेशन कितनी है और इसमें बच्चे, जवान, महिलाओं की क्या संख्या है। इससे आपको समझ आएगा कि यहां पर वैक्सीनेशन के इस लक्ष्य तक पहुंचना कितना चुनौतीपूर्ण रहा है।

सबसे पहले हेल्थ वर्करों को किया गया वैक्सीनेट
सबसे पहले हेल्थ वर्करों को वैक्सीनेट किया गया। उसके बाद बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से जूझने वाले लोगों को वैक्सीनेट किया गया। इस तरह बहुत ही आसानी से बिना भगदड़ की स्थिति के बिना आसानी से वैक्सीनेशन हो पाया।

एक दिन में 2.5 करोड़ वैक्सीनेशन
भारत मे एक दिन में 2.5 करोड़ लोगों को वैक्सीनेट किया गया। ये भारत के लिए बड़ा माइल्सस्टोन था। वैक्सीनेशन भारत में 16 जनवरी से शुरू हुआ था। तस्वीर में देखिए किस तरह से भारत ने इस लक्ष्य को हासिल किया।

सरकार ने सभी का किया धन्यवाद
भारत सरकार ने इस मौके पर लोगों को विस्तृत जानकारी दी और लोगों को धन्यवाद भी कहा। भारत के पास बेहतर मेडिकल फैसिलिटी नहीं थी। भारत के पास संसाधनों का भी अभाव था फिर भी हमारे देश ने सभी को पछाड़ दिया। भारत के आगे अमेरिका, ब्राजील जैसे देश भी पिछड़ गए।

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