संभल ,
यूपी के संभल में डीएम ने अपनी टीम के साथ नगर पालिका ऑफिस में छापेमारी की. करीब 7 घंटे तक डीएम की छापेमारी चलती रही. इस दौरान डीएम ने डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कंपनी और शहर भर के सफाई कर्मचारियों को लाइन अप कर लिया. डीएम ने जांच-पड़ताल शुरू की तो कूड़ा कलेक्शन कंपनी का बड़ा घोटाला सामने आया. जिसके बाद डीएम ने कंपनी के 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए. पुलिस ने कंपनी के मैनेजर, फील्ड ऑफिसर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया.
दरअसल, संभल जिले के डीएम डॉ राजेंद्र पेंसिया बुधवार सुबह अचानक एडीएम प्रदीप कुमार और एसडीएम विनय मिश्रा के साथ शहर के मुख्य बाजार और कई वार्डों में औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे तो जगह-जगह उन्हें कूड़े के ढेर दिखाई दिए. जिनको देखकर डीएम ने अधीनस्थ अफसरों से नाराजगी जताई. इसके बाद डीएम ने सदर कोतवाली इलाके स्थित नगर पालिका परिषद के कार्यालय पर छापेमारी की.
यहां डीएम ने कार्यालय में पहुंचते ही सबसे पहले डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाली कंपनी और शहर भर के सभी सफाई कर्मचारियों को लाइन अप कर लिया. डीएम के निर्देश पर सभी सफाई कर्मचारियों को नगर पालिका बुलाया गया और इसी के साथ कूड़ा कलेक्शन करने वाली कंपनी के सुपरवाइजरों और मैनेजर को भी पालिका में कॉल कर लिया गया. डीएम ने सभी सफाई कर्मियों को बुलाकर जांच पड़ताल की तो कई कर्मियों की जगह प्राइवेट कर्मचारी और उनके रिश्तेदार काम करते मिले.
246 सफाई कर्मचारियों में सिर्फ 148 काम पर थे
जिसके बाद डीएम ने कूड़ा कलेक्शन करने वाली कंपनी के मैनेजर और फील्ड ऑफिसर से सूची मांगी तो कंपनी श्री बालाजी स्टील एंड बिल्डिंग मैटेरियल सप्लायर संस्था के द्वारा 246 सफाई कर्मचारियों की सूची दी गई. कूड़ा कलेक्शन में 246 सफाई कर्मियों के लगे होने के बावजूद शहर में कूड़े के ढेर होने पर डीएम को कंपनी की सूची पर शक हुआ तो डीएम ने कंपनी के कर्मियो को भी नगरपालिका में बुला लिया. सफाई कर्मियों को बुलाते ही कंपनी का फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आ गया. जहां 246 सफाई कर्मचारियों में से केवल 148 कर्मचारी ही नगरपालिका में काम कर रहे थे, जबकि डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कंपनी के द्वारा 246 कर्मचारियों की सैलरी निकालकर सरकारी पैसे का गबन किया जा रहा था.
पालिका में जांच पड़ताल के दौरान डीएम ने कूड़ा कलेक्शन वाली कंपनी के सुपरवाइजर के मोबाइल फोन चेक किए तो छापेमारी के दौरान कंपनी के मैनेजर का एक और बड़ा कारनामा सामने आया. डीएम की छापेमारी शुरू होते ही कूड़ा कलेक्शन कंपनी के मैनेजर द्वारा सुपरवाइजरों के व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज करके कहा गया था कि डीएम की पूछताछ पर सभी लोग अपनी टीम में 4 सफाईकर्मी होने की जानकारी दें.
इस तरह से डीएम की जांच पड़ताल में कूड़ा कलेक्शन करने वाली कंपनी के परत दर परत फर्जीवाड़े सामने आ गए. जिसपर डीएम ने कोतवाली पुलिस को मौके पर बुलाकर कूड़ा कलेक्शन करने वाली कंपनी के मुख्य कर्मचारीयो को हिरासत में लेने के निर्देश दिए. कुछ ही देर में कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और एसएसआई श्रवण कुमार ने कूड़ा कलेक्शन कंपनी के प्रतिनिधि अरविंद गुप्ता और उदित संक्धार, मैनेजर अंकुश को मौके पर ही हिरासत में ले लिया.
फिलहाल, सदर कोतवाली पुलिस ने पालिका अध्यक्ष आशिया मुशीर की तहरीर के आधार पर कूड़ा कलेक्शन कंपनी के प्रतिनिधि अरविंद गुप्ता और उदित संक्धार, मैनेजर अंकुश और तीन सुपरवाइजर शारिक, इंतजार और सुहैब के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. वहीं, डीएम ने कूड़ा कलेक्शन करने वाली कंपनी के घोटाले की जांच के लिए एडीएम प्रदीप कुमार के नेतृत्व में एक हाई लेवल जांच टीम गठित कर दी है.
मामले में डीएम डॉ राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि औचक निरीक्षण के दौरान डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाली कंपनी की अनियमिताएं सामने आई हैं, जिसमें सभी कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन किया गया है. बहुत सी ऐसी चीज मिली है जो कि कागजों में शो हो रही हैं लेकिन मौके पर नहीं हैं. जांच टीम गठित की गई है और कूड़ा कलेक्शन करने वाली कंपनी के 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी करवाई गई है. इस तरह की अनियमिताओं को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
