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मुख्यमंत्री या कॉन्ट्रैक्ट किलर! सामना में CM एकनाथ शिंदे पर आपत्तिजनक टिप्पणी

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मुंबई

शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के अखबार सामना में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। सामना अखबार के संपादकीय एकनाथ शिंदे को एक ‘कॉन्ट्रैक्ट किलर’ कहा गया है। सामना ने लिखा है कि मुख्यमंत्री शिंदे और उनके गुट का इस्तेमाल शिवसेना के विरोध में एक कॉन्ट्रैक्ट किलर की तरह हो रहा है। शिंदे नाम का इतिहास महाराष्ट्र में वीरता और ईमान का है लेकिन इस समय शिंदे महाराष्ट्र के खलनायक बनते जा रहे हैं, इस बात का उन्हें ध्यान भी नहीं है। मुख्यमंत्री पद मतलब प्रतिष्ठा नहीं महाराष्ट्र में हर दिन कई पोते और परपोते पैदा होते हैं। उनका आशीर्वाद असली शिवसेना के साथ ही रहेगा। एकनाथ शिंदे को खुद पर कहीं ब्रेक लगाने चाहिए। सामना ने लिखा है कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे द्वारा कड़ी मेहनत से बनाई गई शिवसेना को दिल्ली के शासकों ने कुटिलता और साजिश की चोट पहुंचाकर कागज पत्र से समाप्त कर दिया। इस काम के लिए महाराष्ट्र के एकनाथ शिंदे और उनके 40 गद्दारों की सहायता ली गई।

एक ज्वलंत नाम शिवसेना को फ्रीज कर दिया गया। बालासाहेब जिसकी रोज पूजा करते थे। उस धनुष बाण को फ्रीज कर दिया गया। महाराष्ट्र के कवच कुंडल भी शिंदे और उनके गद्दारों ने दिल्ली के चरणों में अर्पण कर दिए। जीवन में कुछ चीजें पवित्र मानी जानी चाहिए। राजनीति से परे मानी जानी चाहिए। यह वर्तमान शासकों की समझ से भी परे है। शिवराय की भवानी तलवार कहानी या किंवदंती यह पता नहीं लेकिन शिवसेना का मतलब मराठी लोगों की सुरक्षा के लिए उठाई गई भवानी तलवार ही है।

शिंदे नाम का इतिहास
सामना ने लिखा है कि शिंदे नाम का अपना इतिहास है वो इतिहास ईमान और वीरता का है लेकिन इस शिंदे के चलते हैं कई शिंदे शर्मिंदा हुए। पानीपत में दत्ताजी शिंदे ने अपनी वीरता से बलिदान दिया। महाराष्ट्र उनका सदैव स्मरण करता है। संसद में गोडसे शब्द असंसदीय घोषित कर दिया गया। वैसे ही शिंदे शब्द महाराष्ट्र में तिरस्कारी और असंसदीय होगा? लखोबा लोखंडे के वैकल्पिक शब्द के तौर पर वर्तमान में शिंदे का उल्लेख हो सकता है। इस समय एकनाथ शिंदे का व्यवहार महाराष्ट्र में सबसे तिरस्कारी साबित हो रहा है।

महाराष्ट्र पर चोट पहुंचाई
सामना ने लिखा है कि शिंदे, सत्तार, भुसे, सामंत, आबीटकर, सरवणकर, कुडालकर, सरनाईक इस गिरोह ने महाराष्ट्र पर चोट पहुंचाई। यह एक तरह से व्यभिचार ही है। शिवसेना का अस्तित्व समाप्त करने का प्रयास किया, धनुष-बाण पर दावा किया। इसकी जरूरत थी क्या? शिंदे और उनके गिरोह ने शिवसेना छोड़ा, यहां तक तो ठीक। उन्होंने अपने रास्ते का चयन किया। राजनीति में यही होता रहता है लेकिन इस गिरोह ने शिवसेना को `रिपब्लिकन पार्टी’ बनाने की कोशिश की। मंदिर में घुसकर ५६ वर्षों से पूजी जानेवाली मूर्ति को चोट पहुंचाकर टुकड़े करने की कोशिश उन्होंने की। इतना ही नहीं शिंदे और उनके गिरोह ने मुगलों की तरह मंदिर और मूर्ति को तोड़ा है। ऐसे मूर्तिभंजकों को दिल्ली का आशीर्वाद मिला है। महाराष्ट्र को भाजपा ने किस स्तर का मुख्यमंत्री दिया है उसे देखें और श्री फडणवीस ऐसे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में काम कर रहे हैं।

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