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सख्त नियम, भ्रष्टाचार के आरोप… वर्ल्ड कप से ज्यादा मेजबान कतर की चर्चा क्यों?

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नई दिल्ली,

20 नवंबर से कतर में फुटबॉल के ‘महाकुंभ’ फीफा वर्ल्ड कप-2022 की शुरुआत हो रही है. पूरी दुनिया एक महीने के लिए फुटबॉल के रंग में डूब जाएगी. कुल 32 टीमें इस वैश्विक प्रतियोगिता में भाग लेंगी. 2010 में तत्कालीन फीफा अध्यक्ष सेप ब्लाटर ने जब कतर को 2022 फुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी सौंपी, तभी से इस देश को मेजबानी सौंपने के निर्णय का विरोध शुरू हो गया था. खुद सेप ब्लाटर ने टूर्नामेंट के शुरू होने से एक हफ्ता पहले कहा कि कतर को विश्व कप मेजबान चुनना ‘गलती’ थी. आखिर क्यों इस बार का वर्ल्ड कप कई मायनों में अलग और विवादों से भरा है. आइए जानते हैं.

मध्य-पूर्व में पहली बार आयोजन 
पहली बार किसी फुटबॉल वर्ल्ड कप का आयोजन मध्य-पूर्व देश में हो रहा है. यही नहीं, आमतौर पर विश्व कप जून-जुलाई के बीच खेला जाता है. लेकिन इस बार ये नवंबर-दिसंबर में खेला जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि जून-जुलाई के दौरान कतर में काफी गर्म मौसम रहता है और खिलाड़ियों के लिए उन परिस्थितियों में खेलना चुनौतीपूर्ण होतीं. इसलिए फीफा ने कतर को विश्व कप नवंबर-दिसंबर में कराने का सुझाव दिया. इसके चलते कई यूरोपियन घरेलू लीग्स को करीब डेढ़ महीने के लिए बीच में ही रोकना पड़ा.

सबसे महंगा फुटबॉल वर्ल्ड कप
कतर में होने जा रहा ये टूर्नामेंट अब तक का सबसे महंगा फुटबॉल वर्ल्ड कप है. एक अनुमान के मुताबिक कतर ने स्टेडियम, होटल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर लगभग 200 बिलियन डॉलर रुपए खर्च किए हैं. जबकि रूस में आयोजित 2018 वर्ल्ड कप में 11.7 बिलियन डॉलर रुपए का खर्च आया था.

सिर्फ एक मेजबान शहर
अमूमन फीफा वर्ल्ड कप मेजबान देश देशों के अलग-अलग शहरों में होता है. लेकिन इस बार इस टूर्नामेंट का आयोजन एक ही शहर में होगा. सारे मैचों का आयोजन कतर की राजधानी दोहा के 8 स्टेडियमों में होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि कतर बहुत छोटा देश है. कुल क्षेत्र की बात करें तो कतर भारत के राज्य त्रिपुरा से थोड़ा ही बड़ा है.

भ्रष्टाचार के लग रहे आरोप
वर्ल्ड कप 2018 की मेजबानी रूस और वर्ल्ड कप 2022 की मेजबानी कतर को सौंपने को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए. यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस का आरोप है कि कतर ने मेजबानी हासिल करने के लिए रिश्वत दी. हालांकि 2022 विश्व कप के आयोजकों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और पलटवार करते हुए कहा कि पश्चिम देश कतर की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है.

मानवाधिकारों को लेकर सवाल
मेजबान कतर को मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का सामना भी करना पड़ा है. कतर पर प्रवासी मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार करने और उनके मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगा है. प्रवासी मजदूरों को सैलरी ना देने, उन्हें कहीं और काम न करने जैसे कई आरोप कतर पर लगे हैं. इन आरोपों पर कतर सरकार का कहना है कि उनके देश में मजदूरी से जुड़े प्रावधानों में लगातार सुधार जारी है. लेकिन प्रवासी मजदूरों के शोषण करने के आरोपों को कतर सरकार ने नकारा है. इंग्लैंड फुटबॉल टीम के कप्तान हैरी केन कह चुके हैं कि वे मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ विश्व कप के मैचों में बांह पर काली पट्टी बांधकर खेलेंगे.

LGBT+ समुदाय के अधिकार
कतर एक मुस्लिम देश है जहां समलैंगिकता गैर-कानूनी है. इसलिए समलैंगिक प्रशंसकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. कई फुटबॉल खिलाड़ियों ने भी इस पर चिंता जताई है. हालांकि इस पर वर्ल्ड कप आयोजक बार-बार दोहरा रहे हैं कि हर किसी व्यक्ति का कतर में स्वागत है. कोई भी यहां आकर फुटबॉल के महाकुंभ का आनंद उठा सकता है, चाहे वो LGBT+ समुदाय से हो या फिर किसी भी पृष्ठभूमि से आता हो.

शराब/ऐल्कोहॉल पर नियंत्रण
मुस्लिम देश होने के कारण कतर में शराब और ऐल्कोहॉल की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध है. किसी भी फुटबॉल वर्ल्ड कप को फैन्स और खास बनाते हैं. इस टूर्नामेंट में दुनिया भर से लाखों प्रशंसक आएंगे. आमतौर पर फैन्स मजे के लिए शराब का सेवन करते हैं. आयोजकों का कहना है कि फैन्स के लिए शराब बिक्री की व्यवस्था मैच से पहले और बाद में की जाएगी. लेकिन मैच के दौरान फैन्स शराब नहीं खरीद पाएंगे. हालांकि बाद में यह भी कहा गया कि स्टेडियम में शराब/बीयर नहीं मिलेगी. आयोजकों ने ये भी कहा है कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे को नुकसान ना पहुंचाए और कोई हंगामा ना करे, तो उन्हें शराब के सेवन को लेकर कोई आपत्ति नहीं है.

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