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अमेरिकी खुफिया विभाग की पहली हिंदू प्रमुख हैं तुलसी गबार्ड, भारत से उनका का क्या है संबंध

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वॉशिंगटन:

अमेरिकी सैन्य दिग्गज और हवाई से पूर्व डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि तुलसी गबार्ड अमेरिकी खुफिया विभाग प्रमुख बनी हैं। वह यह जिम्मेदारी संभालने वाली पहली हिंदू हैं। बुधवार को सीनेट ने नेशनल इंटेलिजेंस की निदेशक के रूप में तुलसी गबार्ड के नामांकन तो 52-48 मतों से मंजूरी दी, जिसमें अधिकांश रिपब्लिकन ने उनका समर्थन किया। हालांकि रूस पर उनकी पिछली टिप्पणियों, सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के साथ उनकी मुलाकात और व्हिसलब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन के लिए उनके पिछले समर्थन पर शुरुआती आपत्तियां थीं।

केंटकी के सीनेटर मिच मैककोनेल उनकी पुष्टि के खिलाफ वोट देने वाले एकमात्र रिपब्लिकन थे। तुलसी गबार्ड अब अमेरिका की 18 खुफिया एजेंसियों की देखरेख करते हुए अमेरिकी खुफिया समुदाय का नेतृत्व करेंगी।

भारतीय मूल की नहीं हैं तुलसी गबार्ड
तुलसी गबार्ड के तीन भाइयों के नाम जय, भक्ति और आर्यन हैं। उनकी एक बहन हैं, जिनका नाम वृंदावन है। 2012 में उन्होंने खुद स्पष्ट किया कि उनका कोई भारतीय संबंध नहीं है। तुलसी गबार्ड ने एक भारतीय-अमेरिकी के रूप में पहचाने जाने वाले संदेश के जवाब में लिखा, ”मैं भारतीय मूल की नहीं हूं।” तुलसी गबार्ड ने 2015 में हवाई में सिनेमैटोग्राफर अब्राहम विलियम्स से वैदिक रीति से शादी की थी।

पीएम मोदी ने की तुलसी गबार्ड से मुलाकात
दो दिवसीय यात्रा पर बुधवार को अमेरिका पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुलसी गबार्ड से मुलाकात की है। अपनी बैठक के दौरान पीएम मोदी ने गबार्ड के साथ अपनी पिछली बातचीत को याद किया और उन्हें उनकी नई भूमिका के लिए बधाई दी। पीएम मोदी ने एक्स पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं और लिखा, ”वॉशिंगटन डीसी में यूएसए की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड से मुलाकात की। उनकी पुष्टि पर उन्हें बधाई दी। भारत-यूएसए मित्रता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, जिसकी वे हमेशा से प्रबल समर्थक रही हैं।”

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी चर्चा विशेष रूप से आतंकवाद से निपटने, साइबर सुरक्षा, उभरते खतरों और रणनीतिक खुफिया जानकारी साझा करने में द्विपक्षीय खुफिया सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रहीं। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया तथा सुरक्षित, स्थिर और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

कौन हैं तुलसी गबार्ड?
43 वर्षीय तुलसी गबार्ड इराक युद्ध की दिग्गज है। उन्होंने अफ्रीका और मध्य पूर्व के युद्ध क्षेत्रों में तीन बार तैनात होकर सेवाएं दी हैं। वह 2021 से यूएस आर्मी रिजर्व में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर हैं और इससे पहले 2013 से 2021 तक हवाई के दूसरे कांग्रेस जिले के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया है। वह पहले एक डेमोक्रेट थीं, जिन्होंने अक्टूबर 2022 में पार्टी छोड़ दी और 2024 में रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गईं। वह 2020 में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार भी थीं और NYT की बेस्टसेलिंग ऑथर भी हैं। तुलसी गबार्ड अमेरिकी कांग्रेस में पहली हिंदू थीं, लेकिन उनका भारत से कोई संबंध नहीं है। उनके धर्म के कारण उन्हें अक्सर भारतीय मूल का समझ लिया जाता है।

तुलसी का जन्म 12 अप्रैल 1981 को अमेरिकी समोआ में हुआ था और उनका पालन-पोषण हवाई और फिलीपींस में हुआ। उनकी माता का नाम कैरल और पिता का नाम माइक गबार्ड है। मां कैरल गबार्ड एक बहुसांस्कृतिक परिवार में पली-बढ़ी थीं और हिंदू धर्म में उनकी रुचि हो गई थी। उन्होंने हिंदू धर्म से प्रभावित होकर अपने सभी बच्चों के नाम रखें। हिंदू धर्म में पवित्र पौधे तुलसी के नाम पर तुलसी गबार्ड का नाम रखा गया।

 

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