12.6 C
London
Sunday, June 7, 2026
Homeराज्यधर्मांतरण कराने के 37 आरोपियों पर कसा रहेगा पुलिस का शिकंजा, इलाहाबाद...

धर्मांतरण कराने के 37 आरोपियों पर कसा रहेगा पुलिस का शिकंजा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की रिट

Published on

इलाहाबाद

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धर्मांतरण के एक मामले में 37 आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज कर दी है। इन पर एक शख्स को लालच देकर हिंदू धर्म से ईसाई बनने के लिए मजबूर करने का आरोप है। यह रिट याचिका जोस प्रकाश जॉर्ज और 36 अन्य लोगों द्वारा दायर की गई थी। इसमें उन पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया गया था।

वकील ने दी ये दलील
23 जनवरी, 2023 को फतेहपुर जिले के कोतवाली थाने में आईपीसी की धाराओं 420, 467, 468, 506, 120-बी और गैर कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध कानून की धारा 3/5 (1) के तहत प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि लगभग समान आरोपों पर एक ही अधिनियम के तहत 15 अप्रैल, 2022 को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि लगभग इसी तरह के आरोपों के साथ आईपीसी की धाराओं 153ए, 420, 467, 468 और 506 और गैर कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध कानून की धारा 3/5 (1) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

मौजूदा मामले में शिकायतकर्ता उन गवाहों में से एक है जिसका बयान 15 अप्रैल, 2022 को दर्ज प्राथमिकी में सीआरपीसी की धारा 161 के तहत पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अपनी दलील में कहा कि दोनों ही प्राथमिकियों में एक या दो व्यक्तियों को छोड़कर आरोपी समान ही हैं और दोनों मामलों में शिकायतकर्ता अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ही मामलों में धोखाधड़ी और लालच देकर सामूहिक धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया गया है, इन तथ्यों को देखते हुए उक्त प्राथमिकी सीआरपीसी की धारा 154 और 158 के तहत वर्जित है।

कोर्ट ने खारिज की दलील
अदालत ने शुक्रवार को आरोपियों के अधिवक्ता की दलील खारिज कर दी। अधिवक्ता ने दलील दी थी कि मौजूदा आरोपियों के खिलाफ दर्ज मौजूदा प्राथमिकी इसलिए रद्द कर दी जानी चाहिए क्योंकि इसी मामले में पहले से एक प्राथमिकी लंबित है।

न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति गजेंद्र कुमार की पीठ ने कहा कि हालांकि, दूसरी प्राथमिकी उसी घटना से संबंधित है, लेकिन इसे इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि इसे एक सक्षम व्यक्ति द्वारा दर्ज कराया गया है। अदालत ने कहा, “चूंकि 15 अप्रैल, 2022 की प्राथमिकी एक सक्षम व्यक्ति द्वारा दर्ज नहीं कराई गई थी, इसलिए इसका कोई महत्व नहीं है। समान कारण के लिए मौजूदा प्राथमिकी को दूसरी प्राथमिकी नहीं कहा जा सकता। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि समान घटना की दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।” अदालत ने कहा, “प्राथमिकी में लगाए गए आरोप में एक संज्ञेय अपराध शामिल है इसलिए यह प्राथमिकी रद्द किए जाने योग्य नहीं है। इन कारणों को देखते हुए इस रिट याचिका को खारिज किया जाता है।”

Latest articles

जनता पर फिर महंगाई की मार: घरेलू गैस सिलिंडर 29 रुपये महंगा, विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली। एलपीजी गैस सिलिंडर की कीमत में बढ़ोतरी के बाद विपक्ष एक बार...

भोपाल के रेस्टोरेंट में आग, लोगों में हड़कंप, बुझाने के लिए दीवार तोड़कर घुसे दमकलकर्मी

भोपाल। राजधानी के लालघाटी क्षेत्र स्थित भोज इन रेस्टोरेंट में रविवार को अचानक आग...

सांसद आलोक शर्मा के प्रयास लाए रंग: सीहोर में फिर रुकेगी इंदौर-जबलपुर ओवरनाइट एक्सप्रेस

​भोपाल। लंबे समय से चली आ रही सीहोरवासियों की बड़ी मांग आखिरकार पूरी हो...

बीएचईएल झांसी में ‘पर्यावरण जागरूकता माह-2026’ का शुभारंभ, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

झांसी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) झांसी इकाई...

More like this

सुशासन तिहार के दौरान ठठारी पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ऐतिहासिक चतुर्भुज विष्णु मंदिर में की पूजा-अर्चना

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के तहत शनिवार को सक्ती जिले के...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का एसएमएस अस्पताल में औचक निरीक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दिए निर्देश

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल...

पंजाब में ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान को जन आंदोलन बनाने पर जोर, तीन विधानसभा क्षेत्रों में हुई समीक्षा बैठकें

पंजाब। पंजाब सरकार द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध...