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कौन है सोनिया सोनी, जिसके पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देकर दिया गहलोत सरकार को झटका

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टोंक

राजस्थान के टोंक में मालपुरा क्षेत्र की निलंबित चल रही पूर्व पालिकाध्यक्ष सोनिया सोनी को मंगलवार को दोहरी राहत मिली है। भ्रष्टाचार के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की एसएलपी को खारिज किया। वहीं हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सोनी के निलंबन आदेश पर भी रोक लगाई है। इसके बाद सोनिया सोनी के समर्थकों में खुशी की लहर है।

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने दिया था सोनिया के पक्ष में फैसला
इस मामले को लेकर सोनिया के वकील लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप में 4 मई 2022 को निलंबित कर दिया था। इस मामले में सोनिया सोनी की ओर से हाईकोर्ट की एकल पीठ में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 24 अगस्त 2022 को सोनिया सोनी की याचिका मंजूर कर उसे बहाल कर दिया। इसके विरोध में राज्य सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दी। राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने फिर सोनिया को राहत प्रदान की हैं।

सुप्रीम कोर्ट में भी सोनिया सोनी को राहत मिली
राज्य सरकार की याचिका खारिज होने के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की। इसकी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई हुई। यहां जस्टिस संजय किशन कोल और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ में राज्य सरकार की एसएलपी को खारिज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत सोनिया सोनी के लिए बड़ी जीत है।

राज्य सरकार ने फिर दूसरी बार किया निलंबित
हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद सोनिया सोनी वापस पालिकाध्यक्ष का चार्ज लेने पहुंची तो राज्य सरकार ने एक बार फिर 7 अक्टूबर 2022 को उन्हें निलंबित कर दिया। इस दौरान उन पर फिर भ्रष्टाचार और पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। इस पर सोनिया सोनी ने वापस हाईकोर्ट में निलंबन के खिलाफ याचिका दायर की। यहां इस याचिका पर न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह की एकल पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान निलंबन पर एक बार फिर रोक लगा दी।

सोनिया सोनी ने खुद अपने केस की पैरवी की
हाईकोर्ट में वकीलों की चल रही है प्रदेशव्यापी हड़ताल के चलते मंगलवार को केस की सुनवाई होनी थी। इस पर पूर्व पालिकाध्यक्ष सोनिया सोनी ने खुद ही अपने केस की पैरवी करने का निर्णय लिया। इस दौरान सोनी ने अपने पति मनीष सोनी के साथ केस की पैरवी करते हुए अपना पक्ष रखा। इस केस की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 7 अक्टूबर 2022 के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। आपको बता दी थी सोनिया सोनी 7 फरवरी 2021 को भाजपा से पालिकाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुई थी।जिस पर राज्य सरकार द्वारा दो अलग-अलग मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए निलंबित किया गया।

दो बार निलंबित होने के बाद नहीं मानी हार
पूर्व पालिका अध्यक्ष सोनिया सोनी कांग्रेस सरकार के विपरीत भाजपा की पालिकाध्यक्ष बनी। लिहाजा दो बार राजनीतिक द्वेषता का शिकार बनी । उन्हें दो बार निलंबित कर दिया गया।लेकिन न्यायालय ने भी दोनों बार उन्हें राहत प्रदान की है। इसको लेकर टोंक भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र पराणा ने कहा कि राज्य सरकार ने द्वेषता से अवैध रूप से सोनी को निलंबित किया था। लेकिन न्यायालय ने सही निर्णय दिया। उन्होंने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता।

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