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Sunday, April 5, 2026
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पटना में होटल के जिस कमरे में ठहरे बाबा बागेश्वर, वो बन गया भक्तों का तीर्थस्थल! बुकिंग तक रद्द

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पटना

बागेश्वर बाबा का पटना दौरा संपन्न हो चुका है। राजधानी में 5 दिन हनुमंत कथा और ‘दिव्य दरबार’ लगाने के बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री वापस लौट चुके हैं। भले ही बाबा पटना से जा चुके हैं लेकिन वो जिस होटल में ठहरे हुए थे वो आज लोगों की आस्था का केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में होटल के उस कमरे को देखने पहुंच रहे जहां बाबा रुके हुए थे। कई लोग होटल के उस कमरे में ठहरना चाहते हैं। वो ये जानना चाहते हैं कि बाबा पटना में किस तरह से रहे, क्या खाया-पिया? उनके साथ कौन-कौन लोग आए थे? चलिए हम बताते हैं आगे।

होटल में थी हाई प्रोफाइल व्‍यवस्‍था
पटना के पनाश होटल में बाबा बागेश्वर के ठहरने को लेकर फाइव स्टार व्यवस्था की गई थी। एक फ्लोर पर 17 कमरे उनके लिए बुक किए गए थे। लेकिन ये कमरे भी एक समय कम पड़ गए थे। बाबा के साथ उनका भंडारी, सुरक्षाकर्मी और भक्‍तों के अलावा बड़ी संख्या लोग भी थे। पंडित धीरेंद्र शास्त्री अक्सर अपनी कथाओं में सात्विक भोजन का जिक्र करते थे और लोगों को इसके लिए प्रेरित करते। यही वजह थी कि होटल में उनके लिए सात्विक भोजन बन सके इसके लिए अलग से किचन की व्यवस्था की गई थी। यह किचन उसी फ्लोर पर बनाया गया था जहां बाबा धीरेंद्र शास्त्री ठहरे थे।

बाबा के लिए किए गए थे खास इंतजाम
ध्यान देने वाली बात यह है कि होटल मैनेजमेंट ने भी धीरेंद्र शास्त्री के आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ी। यहां उनके लिए बिना प्याज लहसुन वाला सात्विक भोजन ही बनाया गया। बाबा के खाने-पीने की जिम्मेदारी उनके भंडारी ने अपने ऊपर ले रखी थी। वहीं होटल मैनेजमेंट की तरफ से भी बाबा को साफ शुद्ध भोजन उपलब्ध हो इसका खास ख्याल रखा गया था। उनके लिए नए बर्तन मंगवाए गए। बर्तनों से भी प्याज-लहसुन ना छू जाए इस बात को सुनिश्चित किया गया।

भक्तों के लिए पनाश होटल बना आस्‍था केंद्र
बागेश्वर धाम प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रति भक्तों की आस्था ऐसी वो बाबा के बारे में जानने के लिए पनाश होटल पहुंच रहे है। उनके लिए ये होटल किसी धार्मिक स्थल जैसा हो गया है। देश भर के भक्त अब इस होटल के बारे में जानकारी ले रहे। इस होटल के बाहर मौजूद एक बिजनेसमैन सुरेश कमलिया ने कहा कि मौका मिला तो वह उस कमरे में जरूर रुकना चाहेंगे जिसमें बाबा बागेश्वर ने पटना प्रवास के दौरान वक्त बिताया।

सुरेश कमलिया का मानना है कि अब यह जगह किसी धार्मिक स्थल जैसी हो गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि बाबा ने यहां अपना अच्छा खासा वक्त बिताया है। वहीं होटल के बाहर से गुजर रही अनुप्रिया कहती हैं कि उनकी बड़ी इच्छा थी बाबा से मिलने की। हालांकि, लंबी कतार और भीड़ को देखकर वह उनसे नहीं मिल पाईं। अब पनाश होटल के बाहर से गुजरते समय वो बाबा को जरूर याद कर रही हैं।

होटल के कर्मी कर रहे बाबा को याद
वैसे तो बाबा बागेश्वर पटना से जा चुके हैं लेकिन उनके होटल में बिताए गए वक्‍त होटल कर्मचारियों को रोमांचित कर रहे हैं। यहां मौजूद लोगों का कहना है कि बाबा के आने से होटल का वातावरण काफी भक्तिमय हो गया था। बाबा की बातें होटल के कर्मचारियों पर भी असर डालती थीं। पनाश होटल के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मी का कहना है कि बाबा के जाने से अब सब कुछ सूना-सूना सा लग रहा। दो दिनों पहले तक दिनभर होटल के बाहर बड़े-बड़े लोगों का आना-जाना होता रहता था। सैकड़ों गाड़‍ियों का जमावड़ा लगा रहता था।

बाबा के लिए लोग लाए फल के साथ ठेकुआ
होटल के एक कर्मचारी ने बताया भक्त बहुत दूर-दूर से बाबा के लिए मन में आस्था लेकर आते थे। उनके लिए प्रसाद, फल-फूल और घर के बनाए हुए पकवान भी लेकर आते थे। हालांकि, बाबा ज्यादातर भक्तों से फल ही स्वीकार करते थे। ऑपरेशन मैनेजर कुमोद शर्मा के अनुसार, होटल में सुबह से शाम तक भक्तों की भारी भीड़ रहा करती थी। हर भक्त अपने साथ कुछ न कुछ लेकर बाबा के पास आता था। लेकिन साथ लाई जाने वाली चीजों में सबसे ज्यादा ठेकुआ होता था। बिहार में छठ महापर्व के प्रसाद के रूप में प्रसिद्ध ठेकुआ भक्तों ने बाबा को अर्पण किया।

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