23.3 C
London
Friday, May 22, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीययूक्रेन में फंसे रूस को चीन ने चक्रव्‍यूह में घेरा, पुतिन को...

यूक्रेन में फंसे रूस को चीन ने चक्रव्‍यूह में घेरा, पुतिन को भारी पड़ी ड्रैगन से दोस्‍ती, अरबों डॉलर का झटका

Published on

मास्‍को:

यूक्रेन युद्ध के बीच चीन के साथ अपनी दोस्‍ती पर इतरा रहे रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन को शी जिनपिंग ने बड़ा झटका दिया है। चीन रूस के लिए वित्‍तीय लाइफ लाइन कहे जाने वाले साइबेरिया 2 गैस पाइपलाइन से किनारा कर रहा है। इसी वजह से इस पाइपलाइन का निर्माण कार्य धीमा हो सकता है। चीन चाहता है कि रूस उसे गैस की खरीद में और ज्‍यादा डिस्‍काउंट दे। वहीं चीन ने इस पाइपलाइन को बनाने के लिए अरबों डॉलर का बिल भी रूस को थमा दिया है। इस पाइपलाइन को रूस और चीन के बीच बढ़ती दोस्‍ती के प्रतीक के तौर पर पेश किया जाता था लेकिन ड्रैगन ने रूस को धोखा दे दिया है।

साऊथ चाइना मार्निंग पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक अगर यह पाइपलाइन पूरी हो जाती तो इसके जरिए 50 अरब क्‍यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस हर साल सप्‍लाई की जा सकती थी। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस अभी यूरोप को गैस की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है जो उसका बहुत बड़ा बाजार था। रूस को उम्‍मीद थी कि वह चीन को गैस बेचकर अपने घाटे की भरपाई कर लेगा लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। चीन अब रूस की इस मजबूरी का फायदा उठाना चाहता है ताकि उसे कम दाम में रूस से गैस कई वर्षों के लिए मिल जाए। इससे चीन को जहां ऊर्जा सुरक्षा हासिल होगी, वहीं उसको पैसा भी कम देना होगा।

रूस की मजबूरी, फायदा उठाने में जुटा चीन
पुतिन ने वादा किया था कि कम से कम 98 अरब क्‍यूबिक मीटर गैस की आपूर्ति रूस से चीन को की जाएगी। अभी साइबेरिया 1 पाइप लाइन है लेकिन उसकी मदद से केवल 67 अरब क्‍यूबिक मीटर गैस की हर साल आपूर्ति ही की जा सकती है। रूसी राष्‍ट्रपति की ओर से इस दूसरी पाइपलाइन के लिए दबाव है लेकिन चीन इसमें खेल कर रहा है और भारी भरकम डिस्‍काउंट चाहता है। रूसी सूत्रों का कहना है कि चीन गैस को लेकर अब मोलभाव करने में जुट गया है। इस सूत्र ने कहा कि पुतिन पर बहुत ज्‍यादा दबाव है कि वह या तो पाइपलाइन बनाएं नहीं तो बहुत बड़ी मात्रा में गैस बेकार हो जाएगी। इससे रूस को बहुत ज्‍यादा घाटा होगा।

इस सूत्र ने कहा कि पाइपलाइन के निर्माण की शर्तों के तहत चीन सुनिश्चिम करना चाहता है कि उन्‍हें कोई खतरा न हो और उसे पैसा भी नहीं देना पड़े। रूस को ही पाइपलाइन बनाने का पूरा खर्च वहन करना पड़े। चीन और रूस के बीच ‘बिना सीमा वाले’ रिश्‍तों में यह पाइपलाइन प्रॉजेक्‍ट ‘नई परीक्षा’ साबित होने जा रहा है। वह भी तब जब रूस पर पश्चिमी देशों ने अप्रत्‍याशित प्रतिबंध लगा दिए हैं। पश्चिमी देशों ने रूसी गैस की यूरोप में सप्‍लाई को भी रोक दिया है। चीन और रूस के बीच मध्‍य अक्‍टूबर महीने में बेल्‍ट एंड रोड सम्‍मेलन के दौरान इस पाइपलाइन पर बातचीत होने वाली थी लेकिन पुतिन को जिनपिंग ने छूट नहीं दी और उन्‍हें खाली हाथ लौटना पड़ा था।

Latest articles

नौतपा से पहले ही तपने लगा मध्यप्रदेश, आग उगल रहे सूर्यदेव, कई जिलों में लू का रेड अलर्ट

भोपाल। मध्यप्रदेश में नौतपा शुरू होने से पहले ही भीषण गर्मी ने लोगों की...

राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव की तारीखों का चुनाव आयोग ने किया ऐलान, इन 10 राज्यों में खाली हुई सीटें

नई दिल्ली। देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों को लेकर चुनाव होना...

सूरजपुर जिला चिकित्सालय में अत्याधुनिक सीटी स्कैन सुविधा शुरू, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया वर्चुअल शुभारंभ

रायपुर। विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अवसर पर जिला चिकित्सालय सूरजपुर में...

सुबह-सुबह गांव की गलियों में पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, चाय पर चर्चा कर सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

राजस्थान। भजनलाल शर्मा ने गांवों में पहुंचकर आमजन से सीधे संवाद की अपनी पहल...

More like this

भेल में अत्याधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणालियों का उद्घाटन— ईडी ने किया शुभारंभ

भोपाल। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) भोपाल के कार्यपालक निदेशक (ईडी) पीके उपाध्याय ने...

नीदरलैंड ने लौटाई विरासत, PM मोदी को सौंपीं चोल राजा की 1 हजार साल पुरानी निशानियां, जानें क्या है इनकी खासियत?

एम्सटर्डम। पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारतीय संस्कृति और सभ्यता के लिए...