23 मई से वृषभ राशी में गोचर कर रहे गुरु की शुक्र के साथ अंशात्मिक युति होगी अर्थात देव गुरु और दैत्य गुरु आकाश में एक साथ दिखाई देंगे, इसके अलावा जब भी ग्रहों की अंशो के साथ क्रांति भी समान होती हैं तो उस समय यह ग्रह युद्ध की स्थिति में आ जाते हैं.
इस युद्ध में जिस ग्रह की डिग्री ज्यादा होती है वह जीता माना जाता है परंतु शास्त्रों के अनुसार जब भी शुक्र ग्रह युद्ध में शामिल होता है तब यह हमेशा विजयी होता है. 23 मई को गुरु शुक्र की युति वृषभ राशी की 5 डिग्री 20 मिनट पर है और सूर्य सिर्फ 3 डिग्री के अन्दर होने से यह ग्रह अस्त भी हो रहे हैं. 23 मई के बाद 4 जून को गुरु और बुध की ग्रह युद्ध कि स्थिति आसमान में दिखाई पड़ेगी. यह सब खगोलीय घटनाक्रम ज्योतिष में बेहत विचित्र स्थिति का निर्माण कर रही हैं.
इस दौरान ही भारत के चुनाव के अंतिम दो चरणों का मतदान होना है और फिर 4 जून को नतीजे भी आते दिखाई देंगे. ग्रहो की स्थिति एक अप्रत्याशित नतीजो और राजनीतिक गतिविधियों में तेजी से बदलाव के योग निर्मित करेंगी और दोनों रजस ग्रह बुध और शुक्र का वित्तीय बाजारों से संबंधित होने के कारण 10 जून तक स्टॉक मार्केट में भी अस्थिरता बनीं रह सकती है.
सुभाष सक्सेना
ज्योतिषाचार्य
