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मोदी 3.0 के पहले बजट में टैक्सपेयर्स को मिलेगी गुड न्यूज! जानिए क्या है सरकार का प्लान

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नई दिल्ली

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट जुलाई में पेश किया जा सकता है। इसमें टैक्सपेयर्स को गुड न्यूज मिल सकती है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण अगले कुछ दिनों में बजट-पूर्व बैठकों का सिलसिला शुरू कर सकती है। इस बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इनकम टैक्स रेट में कटौती पर विचार कर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इससे लोगों के पास खर्च करने योग्य आय यानी डिस्पोजेबल इनकम बढ़ेगी। इस तरह की इनकम बढ़ने से खपत बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। माना जा रहा है कि सरकार मौजूदा इनकम टैक्स स्ट्रक्चर को व्यावहारिक बनाने पर विचार कर सकती है। खासकर लोअर इनकम लेवल पर टैक्स रेट में कटौती की जा सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि डिमांड को रिवाइव करने के लिए खपत बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए टैक्स स्ट्रक्चर को व्यावहारिक बनाया जाएगा। इससे लोगों के हाथों में ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम आएगी और खपत में इजाफा होगा, आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और सरकार का जीएसटी कलेक्शन बढ़ेगा। अभी नए टैक्स सिस्टम में तीन लाख रुपये से अधिक इनकम पर पांच फीसदी टैक्स का प्रावधान है। इसी तरह 15 लाख रुपये से अधिक की इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। इस तरह इनकम के पांच गुना बढ़ने पर टैक्स रेट छह गुना बढ़ जाता है। एक अधिकारी ने कहा कि टैक्स में छूट से सरकार को रेवेन्यू का नुकसान होगा। लेकिन डिस्पोजेबल इनकम बढ़ने से खपत बढ़ेगी और डायरेक्ट तथा इनडायरेक्ट रेवेन्यू में भी तेजी आएगी। इस तरह सरकार को रेवेन्यू का नुकसान हो सकता है लेकिन कुल मिलाकर यह सरकार और इकॉनमी के लिए फायदेमंद होगा।

न्यू टैक्स रिजीम
इनकम (रुपये में) टैक्स रेट
0 से तीन लाख 0%
3 से 6 लाख 5%
6 से 9 लाख 10%
9 से 12 लाख 15%
12 से 15 लाख 20%
15 से ज्यादा लाख 30%

प्राइवेट कंजंप्शन
अधिकारियों का कहना है कि कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के बजाय कर ढांचे को आसान बनाने से ज्यादा फायदेमंद रह सकता है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट जुलाई के तीसरे हफ्ते में पेश किया जा सकता है। पिछले तीन साल के दौरान भारत की औसतन जीडीपी ग्रोथ सात फीसदी से अधिक रही है। अगले कुछ सालों में इसमें गिरावट की आशंका है। इसकी वजह यह है कि प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और डिमांड ने रफ्तार नहीं पकड़ी है। जनवरी-मार्च तिमाही में प्राइवेट फाइनल कंजंप्शन एक्सपेंडीचर जीडीपी का 52.9 फीसदी रहा जो 2011-12 के बेस ईयर सीरीज में सबसे कम है। 2023-24 के पूरे फाइनेंशियल ईयर की बात करें तो कंजंप्शन एक्सपेंडीचर चार फीसदी की रफ्तार से बढ़ा जो दो दशक में इसका सबसे कम ग्रोथ रेट है।

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