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ट्रंप के आदेश के कारण भारतीय माता-पिता समय से पहले ही बच्चों को जन्म देने के लिए मजबूर! जानें मामला

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नई दिल्ली,

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पद ग्रहण करते ही जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता को खत्म करने की घोषणा कर दी. ट्रंप ने आदेश को लागू करने के लिए 30 दिन का समय दिया है. इस आदेश के लागू होने के बाद अवैध प्रवासियों या वीजा पर अमेरिका में रहने वाले लोगों के उन बच्चों को अमेरिकी नागरिकता नहीं मिल पाएगी जिनका जन्म अमेरिका में हुआ है. ट्रंप की इस घोषणा के साथ ही अमेरिका में समय से पहले डिलीवरी कराने की बाढ़ सी आ गई है.

अवैध रूप से या वीजा पर रह रही प्रेग्नेंट महिलाएं समय से पहले ही सी-सेक्शन के जरिए डिलीवरी करा लेना चाहती हैं ताकि उनके बच्चे को अमेरिका की नागरिकता मिल जाए और बच्चे की वजह से उन्हें और उनके पति को अमेरिका में रहने की कानूनी वजह भी मिल जाए.

ट्रंप ने 20 जनवरी को पद ग्रहण करते ही जन्मसिद्ध नागरिकता के अधिकार को खत्म करने की घोषणा की थी. ट्रंप का आदेश 20 फरवरी को लागू हो जाएगा. इसे देखते हुए अमेरिका में अवैध रूप से या वीजा पर रह रहीं वो महिलाएं जो अपनी प्रेग्नेंसी के सातवें या आठवें हफ्ते में हैं, 20 फरवरी से पहले ही बच्चों को जन्म देने के लिए क्लिनिक्स में आवेदन कर रही हैं.

न्यू जर्सी के एक मैटरनिटी क्लिनिक की डॉ. एस डी रमा कहती हैं कि जब से ट्रंप ने जन्मजात नागरिकता को समाप्त करने की बात कही है, समय से पहले डिलीवरी कराने के लिए आ रही महिलाओं की संख्या बढ़ गई है.अमेरिका के 14वें संविधान संशोधन में बच्चों को जन्मजात नागरिकता की गारंटी दी गई थी. 150 सालों से चले आ रहे इस कानून को ट्रंप ने खत्म कर दिया.

डॉ. रमा ने बताया कि उनके क्लिनिक में समय से पहले सी-सेक्शन डिलीवरी के लिए कॉल करने वाली महिलाओं में सबसे अधिक भारतीय महिलाएं हैं. ये सभी महिलाएं अपनी डिलीवरी 20 फरवरी से पहले शिड्यूल कराना चाहती हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए रमा ने कहा, ‘मेरे पास सात महीने की एक प्रेग्नेंट महिला अपने पति के साथ आई. मार्च में उसकी डिलीवरी होनी है लेकिन वो 20 फरवरी से पहले ही सी सेक्शन के जरिए डिलीवरी कराना चाहती है.’

प्री टर्म डिलीवरी मां और बच्चे, दोनों के लिए खतरनाक
टेक्सास की प्रसूति स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एसजी मुक्कला का भी कहना है कि पिछले दो दिनों में समय से पहले डिलीवरी को लेकर उनके पास 15-20 जोड़े आए हैं.वो कहती हैं, ‘मैं उन कपल्स को बता रही हूं कि समय से पहले डिलीवरी संभव है लेकिन इसमें जच्चा-बच्चा को खतरा होता है. समय से पहले डिलीवरी से बच्चों के फेफड़े सही से विकसित नहीं हो पाते, उन्हें दूध पीने में दिक्कत आती है, जन्म से समय बच्चे का वजन कम होता है, उन्हें न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें हो सकती हैं.’

भारत से हर साल हजारों की संख्या में लोग एच-1बी वीजा पर नौकरी के सिलसिले में अमेरिका जाते हैं. अमेरिका में स्थायी निवास के लिए ग्रीन कार्ड मिलना बेहद मुश्किल हो गया है क्योंकि नौकरी के आधार पर ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने वालों लोगों की संख्या लाखों में है और इतने लोगों को क्लियरेंस मिलने में करीब 200 साल का वक्त लग जाएगा.

इसलिए लोग अमेरिका में बच्चे पैदा करने को अमेरिका में रहने के सुनहरे मौके के रूप में देखते हैं. इससे उन्हें अमेरिका में लंबे समय या फिर स्थाई रूप से रहने का टिकट मिल जाता है. प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 लाख भारतीय बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने की वजह से नागरिकता मिली है.

वरुण (बदला हुआ नाम) अपनी पत्नी प्रिया (बदला हुआ नाम) के साथ एच-1बी वीजा पर 8 साल पहले अमेरिका पहुंचे थे. वो पिछले छह सालों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें अमेरिका में स्थायी निवास मिल जाए. वो कहते हैं, ‘मैं चाहता हूं कि मेरा बच्चा अमेरिका में जन्मे. हम छह सालों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं. हमारे परिवार की स्थिरता सुनिश्चित करने का यही एक तरीका है.’ 34 साल की प्रिया की डिलीवरी मार्च के शुरुआत में होने वाली है.

28 साल के एक एच-1बी वीजा होल्डर कहते हैं कि कुछ ही हफ्तों में उनकी पत्नी की डिलीवरी होने वाली है और वो चाहते हैं कि ये डिलीवरी 20 फरवरी से पहले हो जाए. वो कहते हैं, ‘यहां आने के लिए हमने बहुत कुछ दांव पर लगाया था. अब ऐसा लगता है कि अमेरिका का दरवाजा हमारे मुंह पर बंद हो रहा है.’

अवैध प्रवासियों की मुश्किलें और ज्यादा
अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के लिए ट्रंप का फैसला और मुश्किल पैदा करने वाला है. कैलिफोर्निया में रहने वाले विजय (बदला हुआ नाम) अमेरिका में अवैध तरीके से गए थे और वो वहां पिछले 8 सालों से रह रहे हैं. उनकी पत्नी सात महीने की प्रेग्नेंट हैं.

वो कहते हैं कि ट्रंप प्रशासन के फैसले ने उन्हें तोड़कर रख दिया है. विजय कहते हैं, ‘हमने शरण की मांग करने की सोची थी लेकिन तभी मेरी पत्नी प्रेग्नेंट हो गईं और हमारे वकील ने हमें सुझाव दिया कि बच्चे के जरिए हमें अमेरिका का नागरिकता अपने आप मिल जाएगी. लेकिन अब हमें कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा.’

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