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ट्रंप के जीतते ही इस मुस्लिम देश को हुआ बड़ा नुकसान! करेंसी की हालत हुई खराब

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नई दिल्ली,

अमेरिका चुनाव 2024 में रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी कमला हैरिस को करारी मात दी है. एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का चुनाव जीतना मुस्लिम देश ईरान के लिए काफी भारी साबित हुआ है. जैसे ही ट्रंप की पार्टी ने वोटों की गिनती में जीत हासिल की, वैसे ही ईरान की करेंसी ‘रियाल’ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अभी तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई. वर्तमान में एक डॉलर की कीमत 7, 03, 000 ईरानी रियाल के बराबर पहुंच गई है जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है.

साल 2015 में ईरान के रियाल का भाव एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 32 हजार था. यह वह समय था जब ईरान दुनिया की कई बड़ी ताकतों के साथ परमाणु डील में शामिल था. हालांकि, बाद में बात बिगड़ी और साल 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप परमाणु करार से पीछे हट गए. ट्रंप के इस फैसले से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ गया जो अभी तक बना हुआ है. ईरान अमेरिका की ओर से लगाए गए कई बड़े प्रतिबंध झेल रहा है.

हालांकि, प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने अमेरिका के प्रति अपने तेवर हमेशा कड़े ही रखे हैं. ट्रंप के सत्ता से जाने के बाद जो बाइडन ने जब सत्ता संभाली तो भी ईरान और अमेरिका की स्थिति में कुछ सुधार देखने को नहीं मिला. कई बड़े कारोबारी प्रतिबंधों की वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरान का रियाल लगातार नीचे गिरता चला गया.

मई 2024 में हेलीकॉप्टर क्रैश में मारे गए ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के बाद जुलाई में मसूद पेजेशकियन नए राष्ट्रपति बने. जिस समय उन्होंने अपना कार्यकाल शुरू किया उस समय ईरान के रियाल की हालत डॉलर के मुकाबले काफी ज्यादा बिगड़ी हुई. उस समय ईरान की करेंसी 5,84,000 प्रति डॉलर थी जो अब रिपब्लिकन पार्टी के सत्ता में आते ही सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

ईरान ने कहा- हम पर नहीं होगा अमेरिका चुनाव का कोई भी असर
जहां ईरानी रियाल ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही इतना नीचे गिर गया तो वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि उस पर अमेरिका की नई सरकार का कोई असर नहीं होगा. ईरान सरकार की प्रवक्ता फातिमा मोहजेरानी ने कहा कि अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव का हमसे कोई खास संबंध नहीं है. अमेरिका और ईरान की अधिकतर नीतियां पहले से ही तय हैं जिन पर सत्ता में बैठे लोगों के बदल जाने का कोई बड़ा असर नहीं होगा. हमने पहले से ही जरूरी तैयारियां की हुई हैं.

अमेरिका लगा रहा प्रतिबंध पर प्रतिबंध, नहीं हो रहा तनाव कम
ईरान पिछले काफी समय अमेरिकी प्रतिबंधों को झेल रहा है जिनमें आर्थिक और कारोबारी प्रतिबंध शामिल हैं. इन प्रतिबंधों से ईरान को काफी नुकसान भी पहुंच रहा है, उसके बावजूद भी उसका रुख अमेरिका के प्रति जरा भी नरम नहीं है. उधर अमेरिका भी ईरान से तनाव कम करने की किसी सोच में नहीं है.

इजरायल-गाजा युद्ध को लेकर भी दोनों देश एक दूसरे को दुश्मन बनाकर बैठे हैं. हाल ही में जब इजरायल की ओर से ईरान पर मिसाइल हमला हुआ तो भी ईरान ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी थी.इसके साथ ही जो अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं उनकी वजह से चौतरफा तनाव बढ़ता जा रहा है. विश्व में ईरान बड़ा तेल निर्यातक है और ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान को तेल के कारोबार में भी काफी समस्या हो रही है.

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु भी एक बड़ा मुद्दा है. अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश हमेशा कहते रहे हैं कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के जरिए परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान का कहना रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

कब शुरू हुआ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की शुरुआत 1979 में ईरानी क्रांति के साथ हुई थी. बताया जाता है कि इससे पहले तक अमेरिका और ईरान के बीच काफी मधुर संबंध थे, लेकिन इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान ने अपनी विदेश नीति में बदलाव किया और अमेरिका के साथ उसके संबंधों में खटास आनी शुरू गई थी. जिसके बाद कई दशक बीत गए लेकिन दोनों देशों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर तनाव बढ़ता जा रहा है. चाहे वह मिडिल ईस्ट क्षेत्र से जुड़ा हो, समुद्री कारोबार से जुड़ा हो या अलग-अलग तरह के प्रतिबंधों से जुड़ा हो.

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