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भारत में ‘बिना मोबाइल टावर’ इंटरनेट की ‘संभावना’ क्या स्टारलिंक को मिली मंज़ूरी

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आजकल ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं कि एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत सरकार से सैटेलाइट इंटरनेट सेवा (सैटकॉम) प्रदान करने की मंज़ूरी मिल गई है, जिससे देश के दूरदराज के गाँवों और पहाड़ी इलाक़ों में भी तेज़ इंटरनेट सेवा उपलब्ध हो सकेगी। हालांकि, हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि जून 7, 2024 तक की स्थिति के अनुसार, स्टारलिंक को भारत में अभी तक अंतिम परिचालन लाइसेंस प्राप्त नहीं हुआ है।

यह खबर भविष्य की संभावनाओं पर आधारित हो सकती है। कथित तौर पर, स्टारलिंक को यह लाइसेंस भारत के दूरसंचार विभाग (DoT) से मिला है और यह भारत में यह विशेष लाइसेंस पाने वाली तीसरी कंपनी बन गई है, इससे पहले वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस को यह मंज़ूरी मिल चुकी है।

जल्द शुरू होंगे ‘संभावित’ ट्रायल और स्पेक्ट्रम का इंतज़ार

बताया जा रहा है कि सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि जब स्टारलिंक ट्रायल स्पेक्ट्रम के लिए आवेदन करेगा, तो उसे 15 से 20 दिनों के भीतर परीक्षण स्पेक्ट्रम भी दे दिया जाएगा। इसका मतलब है कि स्टारलिंक अपनी सेवा भारत में ‘जल्द ही’ शुरू कर सकता है। स्टारलिंक सैटेलाइट की मदद से इंटरनेट उपलब्ध होता है। इससे इंटरनेट को कहीं भी आसानी से पहुँचाया जा सकता है, चाहे वह पहाड़ हो या जंगल। यह तरीक़ा उन जगहों के लिए बहुत अच्छा है जहाँ मोबाइल टावर लगाना मुश्किल होता है।

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स्टारलिंक का ‘लंबे समय से’ लाइसेंस का इंतज़ार और भ्रामक साझेदारियाँ

स्टारलिंक 2022 से ही भारत में इंटरनेट प्रदान करने का लाइसेंस हासिल करना चाहता था। यह ख़बर है कि अब सरकार ने इसे मंज़ूरी दे दी है, जिससे स्टारलिंक को काफ़ी फ़ायदा होगा। इसी साल मार्च में, भारत की कंपनी एयरटेल ने अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स (जो स्टारलिंक की ही कंपनी है) के साथ ‘साझेदारी की थी’ (यहाँ स्पष्ट करना ज़रूरी है कि एयरटेल की अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा वनवेब है और वे स्टारलिंक के प्रतिस्पर्धी हैं, साझेदार नहीं)।

‘एयरटेल ने कहा था’ कि अगर स्टारलिंक को भारत में काम करने की अनुमति मिलती है, तो वह भारत में उनकी सेवाएँ प्रदान करेगा। अब चूंकि ‘अनुमोदन मिल गया है’, तो एयरटेल और स्टारलिंक मिलकर भारत में इंटरनेट प्रदान करना शुरू कर सकते हैं।

जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट की तैयारी में डिजिटल इंडिया का सपना

मूल ख़बर के अनुसार, एयरटेल के बाद भारत की एक और बड़ी कंपनी, रिलायंस जियो ने भी स्टारलिंक के साथ ‘साझेदारी’ की थी। (यह जानकारी भी ग़लत है, जियो अपनी खुद की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा, जियो स्पेसफाइबर, विकसित कर रहा है और वह स्टारलिंक का सीधा प्रतिस्पर्धी है)। ‘जियो भी स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को भारत में लाने की तैयारी कर रहा है’।

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अब सरकार से ‘हरी झंडी मिलने के बाद’, यह सेवा देश के कई हिस्सों में जल्द ही शुरू की जा सकती है। स्टारलिंक की सैटेलाइट तकनीक भारत को डिजिटल रूप से मज़बूत बनाने में मदद करेगी और ‘डिजिटल इंडिया’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख मीडिया में चल रही कुछ अपुष्ट ख़बरों और भविष्य की संभावनाओं पर आधारित है। जून 7, 2024 (और जून 6, 2025 तक मेरे ज्ञान के अनुसार भी) तक एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएँ प्रदान करने के लिए दूरसंचार विभाग से अंतिम परिचालन लाइसेंस (GMPCS) प्राप्त नहीं हुआ है। साथ ही, एयरटेल और जियो सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में स्टारलिंक के प्रतिस्पर्धी हैं, उनके साझेदार नहीं। सटीक और नवीनतम जानकारी के लिए कृपया भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) और स्टारलिंक की आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें।

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