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उत्तर कोरिया की मदद से हिज्बुल्लाह ने कैसे बिछाया ‘टेरर टनल’ का जाल? इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती

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तेल अवीव/बेरूत,

मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है. गाजा के बाद अब लेबनान और ईरान के साथ इजरायल संघर्ष की स्थिति में है. इजरायल लगातार लेबनान में आतंकवादी संगठन हिज्बुल्लाह को निशाना बना रहा है. इस बीच हिज्बुल्लाह की ‘आतंकी सुरंगों’ का खुलासा हुआ है. तस्वीरों में ये सुरंगें बिल्कुल किसी गुफा की तरह लगती हैं. एक रिपोर्ट में इन सुरंगों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है. कहा तो यह भी जा रहा है कि इन सुरंगों के निर्माण में उत्तर कोरिया ने हिज्बुल्लाह की मदद की थी.

7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमलों के एक साल बाद यह स्पष्ट है कि ये हमले सिर्फ हवा से नहीं बल्कि जमीन के नीचे से भी किए गए थे. डेलीमेल की एक रिपोर्ट में इन सुरंगों के बारे में जानकारी दी गई है. पिछले हफ्ते, आईडीएफ (इजरायली डिफेंस फोर्स) ने खुलासा किया कि 1 अक्टूबर को सैनिकों के लेबनान में सीमा पार करने से पहले इजरायली विशेष बलों ने हिज्बुल्लाह की सुरंगों को नष्ट करने के लिए देश के दक्षिण में दर्जनों ऑपरेशन किए थे.

दक्षिणी लेबनान में मिलीं दर्जनों सुरंगें
इजरायल अब अपने उत्तर में एक बड़े खतरे से निपटने का प्रयास कर रहा है. बीते दिनों इजरायली सेना ने दावा किया था कि 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमले में हिज्बुल्लाह भी शामिल था. रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल हिज्बुल्लाह के हाथों दूसरी बार ऐसी तबाही का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है.

दक्षिणी लेबनान में आईडीएफ के एक ऑपरेशन में इजरायली सैनिकों को लगभग 80 फीट गहरी दर्जनों सुरंगें मिली थीं, जिनमें रॉकेट लॉन्चर और गोला-बारूद के भंडार थे. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि ‘हिजबुल्लाह ने घुसपैठ करने के लिए गुप्त रूप से आतंकी सुरंगें खोदी हैं’.

हिज्बुल्लाह की सुरंगें अभी भी अछूती
दरअसल, यह अनुमान लगाया गया है कि इजरायल रक्षा बलों (IDF) ने हमास की लगभग 80 प्रतिशत सुरंगों को खत्म कर दिया है, लेकिन हिज्बुल्लाह की सुरंगें, जो गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से काफी हद तक अछूती रहीं हैं, माना जाता है कि वे कहीं अधिक परिष्कृत और काफी बड़ी हैं, जिससे हिज्बुल्लाह बड़ी संख्या में मिसाइलों और वाहनों को दक्षिणी लेबनान के आसपास बिना पकड़े ले जा सकता है.

अल्मा रिसर्च एंड एजुकेशन सेंटर ने हिज्बुल्लाह की अटैक सुरंगों की साइलो लॉन्च क्षमता पर प्रकाश डाला है. फतेह 110 जैसी कम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को इन सुरंगों से ऊर्ध्वाधर शाफ्ट के माध्यम से लॉन्च किया जाता है. भूमिगत अवसंरचना एक ट्रक को उस स्थान तक ले जाने में सक्षम बनाती है जहां मिसाइल दागी जानी है.

सुरंगों में मूलभूत सुविधाओं की सभी चीजें
हमास ने 90 के दशक के अंत में मिस्र में सुरंगों का इस्तेमाल शुरू किया था. वहीं हिज्बुल्लाह ने इस रणनीति को 2006 में इजरायल के साथ युद्ध के बाद अपनाया. डेलीमेल की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की रीचमैन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और अंडरग्राउंड वारफेयर के लेखक डॉ. डैफने रिचमोंड-बराक के अनुसार, ‘उन सुरंगों में बिजली और वेंटिलेशन है. सोने के लिए क्वार्टर, गद्दे, फ्रिज और किचन भी हैं. सभी आवश्यक उपकरणों के साथ सैन्य अड्डे भी हैं. ये सब लंबे समय तक भूमिगत रहने में सक्षम होने के लिए तैयार किया गया है.’

उन्होंने कहा कि मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि लेबनान में इस समय जमीनी आक्रमण सुरंगों से जुड़ा हुआ है. सुरंगें प्रमुख शहरों को भी जोड़ती हैं. पूरे नेटवर्क को खत्म करना आईडीएफ के लिए मुश्किल होगा. सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि हिज्बुल्लाह का सुरंग नेटवर्क उत्तर कोरिया की मदद से बनाया गया था.

ईरान की कंपनियों ने की सुरंगों के निर्माण में मदद
रिचमोंड-बराक के अनुसार, ‘हिजबुल्लाह की सुरंगें बड़े पैमाने पर आक्रमण सुरंगों के रूप में बनाई गई हैं. ये सुरंगें दक्षिण कोरिया के लिए उत्तर कोरिया की प्लानिंग की याद दिलाती हैं. हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि उत्तर कोरिया के लोगों ने हिज्बुल्लाह से मुलाकात की और परिणाम यहां स्पष्ट हैं.’ अल्मा के अनुसार, सुरंगों का निर्माण ईरानी कंपनियों की मदद से किया गया था, जिनमें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़ी कंपनियां भी शामिल थीं.

उत्तर कोरिया की मदद से खोदी सुरंगें
लेबनान में सुरंगों की खुदाई, आक्रामक और बुनियादी ढांचे, दोनों का काम 1980 के दशक में उत्तर कोरिया की सहायता से ही शुरू किया गया था और खास तौर पर 90 के दशक के अंत में. उत्तर कोरिया के पास पहाड़ी और चट्टानी इलाकों में सुरंगों की खुदाई में ऐतिहासिक विशेषज्ञता है.

2006 में दूसरे लेबनान युद्ध के बाद, हिज्बुल्लाह ने उत्तर कोरिया के साथ संबंध बनाए रखा और ईरान से भी सहायता प्राप्त की थी. 2014 तक, हिज्बुल्लाह को इस हद तक ट्रेनिंग, जानकारी और तकनीक प्राप्त हो गई थी कि वह खुद सुरंगों को खोदने और बनाने में सक्षम हो गया.

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